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Delhi Cyber Crime: ऑपरेशन ‘Cyber Hawk’ में बड़ा खुलासा, चीनी टेलीग्राम लिंक वाला साइबर फ्रॉड गैंग बेनकाब, बैंक कर्मचारी सहित 3 गिरफ्तार

Delhi Cyber Crime: ऑपरेशन ‘Cyber Hawk’ में बड़ा खुलासा, चीनी टेलीग्राम लिंक वाला साइबर फ्रॉड गैंग बेनकाब, बैंक कर्मचारी सहित 3 गिरफ्तार

दिल्ली के ईस्ट जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन ‘Cyber Hawk’ के तहत पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में पांडव नगर थाना क्षेत्र में दर्ज मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक बैंक कर्मचारी भी शामिल है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह विदेशी हैंडलर्स, खासकर चीनी टेलीग्राम चैनल के जरिए संचालित हो रहा था।

मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई, जिसमें उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी अमन बाबू मौर्य के खाते से 10 हजार रुपये की ठगी की गई थी। जांच के दौरान पुलिस को एक संदिग्ध म्यूल बैंक अकाउंट का पता चला, जो City Union Bank की मयूर विहार फेज-1 शाखा में खोला गया था। इस खाते का इस्तेमाल बार-बार साइबर ठगी के लिए किया जा रहा था और यह 8 अलग-अलग NCRP शिकायतों से जुड़ा पाया गया।

स्पेशल स्टाफ, ईस्ट डिस्ट्रिक्ट की टीम ने तकनीकी और वित्तीय जांच के जरिए इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया। जांच में सामने आया कि शौकीन नामक व्यक्ति के नाम पर खोले गए खाते को उसके भतीजे शारुख उर्फ जोजो ने खुलवाया था। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में शारुख ने खुलासा किया कि बैंक का एक कर्मचारी भी इस पूरे नेटवर्क में शामिल है, जो पैसे लेकर म्यूल अकाउंट खुलवाने में मदद करता था।

इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सिटी यूनियन बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर फ्रांशु कुमार (23 वर्ष) को गिरफ्तार किया, जिसकी भूमिका तकनीकी सबूतों और डिजिटल ट्रेल के आधार पर सामने आई।

जांच के दौरान एक बड़ा खुलासा यह भी हुआ कि आरोपी टेलीग्राम चैनलों के जरिए विदेशी हैंडलर्स से जुड़े हुए थे। मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में ऐसे चैट्स और वीडियो कॉल के सबूत मिले हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित हो रहा था। आरोपियों को कमीशन के रूप में क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में भुगतान किया जाता था।

गिरोह का तरीका बेहद शातिर था। यह लोग पहले लालच देकर लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे, जिन्हें म्यूल अकाउंट कहा जाता है। फिर इन खातों की डिटेल्स विदेशी हैंडलर्स को टेलीग्राम के जरिए भेज दी जाती थीं। इसके बाद APK फाइल के जरिए फोन में ऐसा सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया जाता था, जिससे OTP मैसेज और बैंकिंग एक्सेस रिमोट तरीके से कंट्रोल किया जा सके। इसके जरिए ठगी का पैसा तेजी से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था और बाद में उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता था।

पुलिस के अनुसार, यह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क है, जिसमें स्थानीय स्तर पर लोग विदेशी गिरोहों के साथ मिलकर काम कर रहे थे। फिलहाल इस मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य आरोपियों की पहचान कर उन्हें पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि इस तरह के मामलों से साफ है कि साइबर अपराध लगातार तकनीकी रूप से उन्नत हो रहे हैं, ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, खासकर किसी अनजान लिंक या APK फाइल को डाउनलोड करने से बचना चाहिए।

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