Delhi Lawyers Strike: शाहदरा थाने में 15 से 20 वकीलों के खिलाफ केस दर्ज, विरोध में दिल्ली की सभी जिला अदालतों में हड़ताल
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुलिस प्रशासन और वकीलों के बीच छिड़ा विवाद अब बेहद गंभीर और टकरावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। शाहदरा थाने में पुलिसकर्मियों के साथ तीखी नोकझोंक और हंगामे के मामले में दिल्ली पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए 15 से 20 अधिवक्ताओं के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करने, आपराधिक बल प्रयोग करने और धमकी देने के गंभीर आरोपों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की चार प्रमुख धाराओं के तहत कार्रवाई की है। इस पुलिस कार्रवाई के विरोध में दिल्ली की सभी जिला अदालतों के अधिवक्ताओं ने लामबंद होते हुए 27 अक्टूबर को पूर्ण न्यायिक कार्य बहिष्कार (हड़ताल) का ऐलान कर दिया, जिससे तीस हजारी, पटियाला हाउस, कड़कड़डूमा, रोहिणी, साकेत और द्वारका अदालतों में मुकदमों की सुनवाई ठप हो गई।
इस पूरे विवाद की जड़ 23 अक्टूबर को अधिवक्ता ललित बंसल पर हुए कथित जानलेवा हमले से जुड़ी हुई है। जानकारी के अनुसार, 23 अक्टूबर को अधिवक्ता ललित बंसल के साथ कुछ लोगों ने गंभीर मारपीट की थी, जिसमें उनके सिर में गंभीर चोटें आई थीं। इस मामले में हमलावरों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर साथी अधिवक्ता शाहदरा थाने पहुंचे थे। वकीलों का सीधा आरोप है कि पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ ठोस कानूनी कार्रवाई करने के बजाय उन्हें कथित तौर पर बिना उचित जांच के छोड़ दिया। वहीं दूसरी ओर, पुलिस विभाग का कहना है कि दर्ज शिकायत के आधार पर कानूनी प्रावधानों के अनुरूप निष्पक्ष जांच आगे बढ़ाई जा रही थी और किसी के साथ कोई पक्षपात नहीं किया गया।
पुलिस की ओर से दर्ज कराई गई आधिकारिक शिकायत के अनुसार, 24 अक्टूबर को कड़कड़डूमा अदालत परिसर में हेड कांस्टेबल अमित मलिक को कुछ वकीलों ने घेर लिया और 21 अक्टूबर को दर्ज एक पूर्व मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर सवाल-जवाब करते हुए उनके साथ दुर्व्यवहार किया। इसके बाद उसी दिन दोपहर करीब 2:30 बजे अधिवक्ता अमूल्य और शाहदरा बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों समेत लगभग 15 से 20 अधिवक्ता शाहदरा थाने में दाखिल हुए। आरोप है कि वकील सीधे थाना प्रभारी (एसएचओ) के कक्ष में पहुंच गए और अधिकारियों के साथ तीखी बहस करने लगे। पुलिस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वकीलों ने पुलिस पर आरोपियों को छोड़ने के बदले रिश्वत लेने के बेबुनियाद आरोप लगाए और थाने में जमकर हंगामा किया।
पुलिस द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में यह भी गंभीर आरोप है कि कहासुनी के दौरान एक अधिवक्ता ने ड्यूटी पर मौजूद थाना प्रभारी को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी और उनका हाथ झटकने व खींचने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि थाने के भीतर हुई इस पूरी घटना की फुटेज वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में डिजिटल साक्ष्य के रूप में सुरक्षित है। सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) मनस्वी वशिष्ठ की आधिकारिक शिकायत के आधार पर 26 अक्टूबर को शाहदरा थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 221, 132, 224 और 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। इसमें धारा 221 सरकारी कर्मचारी के कार्य में बाधा डालने, धारा 132 लोक सेवक को कर्तव्य निर्वहन से रोकने हेतु बल प्रयोग करने, धारा 224 चोट पहुंचाने की धमकी देने और धारा 3(5) समान मंशा से किए गए कृत्य से संबंधित है।
दूसरी ओर, दिल्ली की जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने पुलिस के दावों को सिरे से खारिज करते हुए एसीपी मनस्वी वशिष्ठ पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। वकीलों की समन्वय समिति का आरोप है कि जब अधिवक्ता अपने घायल साथी ललित बंसल के मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करने पहुंचे थे, तब एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने कानून की मर्यादा तोड़ते हुए अपनी सर्विस रिवॉल्वर निकालकर वकीलों को डराने और धमकाने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस के आला अधिकारियों ने रिवॉल्वर दिखाने के आरोप को पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत बताया है। वकीलों की समिति ने निष्पक्ष जांच पूरी होने तक संबंधित एसीपी और शाहदरा थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांग की है। दोनों पक्षों के बीच जारी इस तनाव के कारण 27 अक्टूबर को राजधानी की निचली अदालतों में कामकाज पूरी तरह चरमरा गया और हजारों वादकारियों को तारीख लेकर लौटना पड़ा।



