NH24 Bribery Case: दिल्ली ट्रैफिक पुलिस पर गंभीर आरोप, NH-24 पर वसूली का खेल उजागर
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में NH24 Bribery Case ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला ईस्ट दिल्ली स्थित डीसीपी ऑफिस के पीछे NH-24 से जुड़ा है, जहां ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के साथ एक निजी व्यक्ति को पैसों की डीलिंग करते हुए कैमरे में कैद किया गया।
मीडिया टीम मौके पर पहुंची और वसूली की पूरी प्रक्रिया को कैमरे में रिकॉर्ड करने लगी। इसी दौरान तैनात एएसआई मनोज कुमार पत्रकारों पर भड़क गए और वीडियो बनाने से रोकने लगे। उन्होंने पत्रकारों को धमकाते हुए कहा, “जो करना है कर लो, जहां शिकायत करनी है कर दो।” पुलिस की यह प्रतिक्रिया पूरे मामले को और संदिग्ध बना देती है।
निजी शख्स की भूमिका पर सवाल
पुलिसकर्मी के साथ मौजूद सफेद शर्ट और नीली पैंट पहने युवक की पहचान गौतम के रूप में हुई है। सूत्रों के अनुसार, यही शख्स गाड़ियों को रोकने और उनसे पैसों की वसूली का काम करता है। चौंकाने वाली बात यह है कि बिना वर्दी और बिना किसी आधिकारिक पहचान के यह व्यक्ति ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई का हिस्सा कैसे बन सकता है?
स्थानीय लोगों की राय
स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऐसे “निजी वसूली एजेंट” सिर्फ NH-24 तक सीमित नहीं हैं। दिल्ली के कई अन्य इलाकों में भी ट्रैफिक पुलिस के साथ ऐसे लोग अक्सर देखे जाते हैं। इससे आम जनता में यह धारणा मजबूत हो रही है कि यह कोई अकेला मामला नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क है।
दिल्ली पुलिस की चुप्पी
मीडिया ने जब इस मामले पर डीसीपी ट्रैफिक से प्रतिक्रिया लेनी चाही तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इससे संदेह और गहरा हो गया है कि क्या अधिकारी वास्तव में इस वसूली रैकेट से अनजान हैं या फिर जानबूझकर आंख मूंदे हुए हैं।
कानून और पुलिस की साख पर असर
यह मामला केवल वसूली का नहीं बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस की साख का भी है। यदि पुलिसकर्मी ही निजी लोगों को अपने साथ रखकर वसूली करवाने लगेंगे तो जनता का भरोसा कानून व्यवस्था से पूरी तरह उठ जाएगा।
अब जनता की नजरें कार्रवाई पर
अब देखने वाली बात होगी कि दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारी इस मामले पर क्या कदम उठाते हैं। क्या दोषी पुलिसकर्मियों और उनके साथ जुड़े निजी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी या मामला दबा दिया जाएगा?
NH24 Bribery Case ने दिल्ली पुलिस की छवि को बड़ा झटका दिया है। यह घटना बताती है कि ट्रैफिक पुलिस में सुधार और पारदर्शिता की कितनी सख्त जरूरत है। जब तक इस तरह की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक जनता और मीडिया का विश्वास बहाल होना मुश्किल है।



