Sunday, January 25, 2026
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Delhi Illegal Recovery: दिल्ली में बिल्डरों से अवैध वसूली का काला खेल, नाला बेलदारों और JE का नेटवर्क उजागर

Delhi Illegal Recovery: दिल्ली में बिल्डरों से अवैध वसूली का काला खेल, नाला बेलदारों और JE का नेटवर्क उजागर

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में अवैध वसूली का एक बड़ा नेटवर्क बेनकाब हुआ है। बिल्डरों से जबरन वसूली करने वाले इस गिरोह में नगर निगम (MCD) का नाम लेकर काम करने वाले निजी लोग शामिल हैं, जिन्हें आमतौर पर “नाला बेलदार” कहा जाता है। इनका काम सिर्फ नाले की सफाई दिखाना नहीं, बल्कि बिल्डरों से मोटी रकम वसूलना है। इस पूरे नेटवर्क का सबसे कुख्यात नाम मोनू नाला बेलदार बताया जा रहा है, जिस पर पहले भी कई शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।

JE का संरक्षण और बिल्डरों की मजबूरी

सूत्रों का कहना है कि इन नाला बेलदारों को स्थानीय स्तर पर मौजूद जूनियर इंजीनियर (JE) का सीधा संरक्षण मिलता है। बिल्डरों को यह कहा जाता है कि पैसे निगम के लिए लिए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि यह रकम सीधे निजी जेबों में चली जाती है। कई बिल्डरों ने नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया कि उन्हें हर प्रोजेक्ट पर “गुंडा टैक्स” देना पड़ता है, वरना निर्माण कार्य रोकने की धमकी दी जाती है।

A1 न्यूज़ की पड़ताल में सामने आया कि एमसीडी के डिप्टी कमिश्नर (DC) ने तीनों जिलों के DCP को एक पत्र लिखकर साफ निर्देश दिए थे कि नाला बेलदारों और उनके सहयोगियों पर कार्रवाई की जाए। उस पत्र में कई नामों की सूची भी शामिल थी। इसके बावजूद, इन पर कार्रवाई का अभाव यह दिखाता है कि कहीं न कहीं सिस्टम में मिलीभगत भी है।

जांच के दौरान A1 न्यूज़ की टीम ने JE विकास मीना को मोनू नाला बेलदार के साथ देखा। जब पत्रकारों ने सवाल किया कि यह व्यक्ति आपके साथ कौन है, तो JE वहां से भाग खड़ा हुआ। पूरा दृश्य कैमरे में कैद हुआ और इससे यह साफ हो गया कि JE और नाला बेलदारों के बीच गहरे रिश्ते हैं।

FIR दर्ज लेकिन कार्रवाई अधूरी

स्थानीय लोगों और बिल्डरों का कहना है कि भले ही कुछ मामलों में FIR दर्ज हुई हो, लेकिन इन लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यही वजह है कि यह नेटवर्क लगातार सक्रिय है और करोड़ों रुपये की अवैध कमाई कर रहा है। सवाल यह है कि शिकायतों और सबूतों के बावजूद यह गैंग खुलेआम क्यों घूम रहा है और बिल्डरों से पैसों की वसूली करता रहा है?

अवैध वसूली का असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अवैध वसूली से न केवल बिल्डरों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है, बल्कि प्रोजेक्ट की लागत भी बढ़ जाती है। इसका सीधा असर घर खरीदने वालों और आम जनता पर पड़ता है। जब बिल्डरों को लाखों रुपये अवैध वसूली में देने पड़ते हैं, तो अंततः यह रकम मकान की कीमत में जुड़ जाती है।

सवाल जो बने हुए हैं

  • आखिर Delhi Illegal Recovery का यह नेटवर्क किसके संरक्षण में चल रहा है?

  • क्या JE और नाला बेलदारों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई होगी?

  • जब FIR दर्ज हो चुकी है, तो इन लोगों पर शिकंजा क्यों नहीं कसा जा रहा?

  • बिल्डरों और आम जनता को कब तक इस काले खेल का शिकार होना पड़ेगा?

स्थानीय लोगों की मांग

इलाके के लोगों का कहना है कि सरकार और पुलिस को मिलकर इस नेटवर्क पर तुरंत अंकुश लगाना चाहिए। अगर प्रशासन सख्ती नहीं दिखाता, तो नाला बेलदार और उनके सहयोगी इसी तरह बिल्डरों को लूटते रहेंगे और शहर की ईमानदार छवि धूमिल होती रहेगी।

दिल्ली में Delhi Illegal Recovery का यह मामला सिर्फ भ्रष्टाचार की कहानी नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरियों को भी उजागर करता है। जब तक JE और नाला बेलदारों की इस गठजोड़ पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक बिल्डरों और आम जनता का शोषण जारी रहेगा।

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