Sunday, January 25, 2026
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Navratri Ramleela: नवरात्र के दूसरे दिन रामलीला सोसाइटी ने धर्म और सत्य पर आधारित भव्य प्रसंग प्रस्तुत किया

Navratri Ramleela: नवरात्र के दूसरे दिन रामलीला सोसाइटी ने धर्म और सत्य पर आधारित भव्य प्रसंग प्रस्तुत किया

नवरात्र के दूसरे दिन भव्य रामलीला सोसाइटी ने लालकिला मैदान में आयोजित रामलीला में धर्म, सत्य और नैतिकता पर आधारित प्रसंगों का शानदार मंचन किया। इस अवसर पर मंच पर सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र संवाद और ताड़का वध की लीला का मंचन किया गया। राजा हरिश्चंद्र संवाद में राजा के सत्य और धर्म के प्रति अडिग होने की कथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित दर्शकों को सच बोलने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

ताड़का वध का दृश्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। लगभग 60 फुट ऊँची ताड़का की प्रतिकृति, जिसे रावण से भी ऊँचा बनाया गया था, मंच पर आने के बाद दर्शकों के बीच रोमांच और उत्साह का वातावरण उत्पन्न कर दिया। मंच पर प्रसंगों के दौरान कलाकारों ने नाटकीय अभिनय, भावपूर्ण संवाद और पारंपरिक वेशभूषा का उपयोग करते हुए दर्शकों को पूरी तरह मोहित कर दिया।

इस मौके पर सोसाइटी के प्रधान सतीश लूथरा सहित सभी पदाधिकारी उपस्थित रहे और उन्होंने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। सतीश लूथरा ने बताया कि राजा हरिश्चंद्र संवाद आज का सबसे प्रभावशाली और बड़ा प्रसंग रहा। इसने दर्शकों के मन में सत्य और धर्म के महत्व को गहराई से स्थापित किया। उन्होंने कहा कि ताड़का वध का मंचन इस रामलीला की भव्यता और सांस्कृतिक रंग को और बढ़ाता है।

दर्शकों में बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल थे, जिन्होंने इस नाटकीय प्रस्तुति का आनंद लिया। रामलीला के इस विशेष आयोजन में आने वाले दर्शक भक्ति, संस्कृति और मनोरंजन का अद्भुत संगम देखने के लिए आए। आयोजकों ने बताया कि इस रामलीला का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि सामाजिक और धार्मिक संदेश को लोगों तक पहुँचाना भी है। इस दृष्टि से यह आयोजन बच्चों और युवाओं के लिए नैतिक शिक्षा का भी एक मंच साबित हुआ।

इस भव्य आयोजन में हर प्रसंग को बड़ी निपुणता से प्रस्तुत किया गया, जिससे रामलीला देखने आए दर्शकों ने कलाकारों और आयोजकों की तारीफ की। सतीश लूथरा ने अंत में कहा कि इस रामलीला का मुख्य आकर्षण यही है कि यहां हर साल अत्यधिक संख्या में लोग भक्ति, संस्कृति और भव्यता का अद्भुत संगम देखने के लिए पहुंचते हैं, और यह समाज में नैतिक और धार्मिक चेतना को भी बढ़ावा देता है।

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