Cyber Fraud: फर्जी HDFC बैंक अधिकारी बनकर ₹1 लाख की ठगी, ईस्ट दिल्ली साइबर पुलिस ने दो आरोपी गिरफ्तार
नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के साइबर थाना पुलिस ने खुद को एचडीएफसी बैंक का अधिकारी बताकर लोगों से क्रेडिट कार्ड की गोपनीय जानकारी हासिल करने और ऑनलाइन ठगी करने वाले साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने एक पीड़ित के क्रेडिट कार्ड से ₹1,00,629 की अवैध ट्रांजैक्शन कर ऑनलाइन गोल्ड कॉइन खरीदे थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं, जबकि गिरोह के एक अन्य फरार सदस्य की तलाश जारी है।
पुलिस के अनुसार यह मामला साइबर थाना, पूर्वी जिला में दर्ज एफआईआर नंबर 96/2025 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता राजकुमार, निवासी न्यू अशोक नगर, ने पुलिस को बताया कि उन्हें एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने खुद को एचडीएफसी बैंक का अधिकारी बताते हुए क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा दिया। बातचीत के दौरान उसने धोखे से क्रेडिट कार्ड और बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल कर ली। कुछ ही देर बाद पीड़ित के क्रेडिट कार्ड से कई अनधिकृत ट्रांजैक्शन कर कुल ₹1,00,629 की ठगी कर ली गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस, डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने साइबर फ्रॉड के नेटवर्क का पता लगाते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 43 वर्षीय विक्की मेहता निवासी ओम विहार, उत्तम नगर और 33 वर्षीय चित्रसेन त्रिपाठी निवासी मोहन गार्डन, उत्तम नगर के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी की रकम से ऑनलाइन गोल्ड कॉइन खरीदे गए थे, जिन्हें मोहन गार्डन स्थित एक पते पर डिलीवर कराया गया था।
जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि पूरे साइबर फ्रॉड में फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल किया गया था। इस्तेमाल की गई सिम विक्की मेहता के नाम पर जारी थी। पूछताछ में खुलासा हुआ कि वह कथित तौर पर प्रति सिम ₹1,000 लेकर फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराता था, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधों को अंजाम देने में किया जाता था।
वहीं चित्रसेन त्रिपाठी की भूमिका ठगी की रकम से खरीदे गए गोल्ड कॉइन को अपने पते पर प्राप्त करने की थी। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी अपने एक अन्य फरार साथी के साथ मिलकर इस पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क का संचालन कर रहे थे।
पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि फरार आरोपी लोगों को फोन या व्हाट्सएप कॉल कर खुद को बैंक अधिकारी बताता था। इसके बाद वह क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, केवाईसी अपडेट करने या अन्य बैंकिंग सुविधाओं का झांसा देकर लोगों से कार्ड नंबर, सीवीवी, ओटीपी और अन्य गोपनीय जानकारी हासिल करता था। इसी जानकारी का इस्तेमाल कर पीड़ितों के खातों और क्रेडिट कार्ड से अवैध ट्रांजैक्शन किए जाते थे।
पुलिस ने दोनों आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन बरामद कर उन्हें जब्त कर लिया है। इन मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटाई जा सके।
पूर्वी जिला साइबर थाना पुलिस अब फरार आरोपी की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि यह गिरोह दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों में हुई साइबर ठगी की घटनाओं में भी शामिल रहा है या नहीं। पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क का जल्द खुलासा किया जाएगा और इसमें शामिल अन्य आरोपियों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



