UPI Fraud: दिल्ली में फर्जी पेमेंट स्क्रीनशॉट से लाखों की ठगी, महिला समेत 3 गिरफ्तार; दिल्ली-मुंबई के 8 मामलों में 31 लाख का खुलासा
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में साइबर ठगी के एक शातिर तरीके का नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट साइबर थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने फर्जी UPI पेमेंट स्क्रीनशॉट दिखाकर दुकानदारों और कारोबारियों को ठगने वाले एक कथित मल्टी-स्टेट गैंग का खुलासा करते हुए महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में दिल्ली और मुंबई से जुड़े आठ मामलों में करीब 31 लाख रुपये की ठगी का खुलासा होने की बात सामने आई है।
आरोपियों का ठगी करने का तरीका सामान्य साइबर फ्रॉड से अलग था। पुलिस के मुताबिक, आरोपी दुकानदारों और कारोबारियों से सामान खरीदते या उनकी सेवाएं लेते थे। भुगतान का समय आने पर मोबाइल फोन पर UPI ट्रांजैक्शन का ऐसा स्क्रीनशॉट दिखाया जाता था, जिससे पहली नजर में लगता था कि रकम का भुगतान सफलतापूर्वक हो चुका है।
स्क्रीनशॉट को असली मानकर दुकानदार सामान आरोपियों को सौंप देते थे। बाद में बैंक खाते या UPI ऐप की जांच करने पर पता चलता था कि उनके खाते में वास्तव में कोई रकम आई ही नहीं थी। तब तक आरोपी सामान लेकर मौके से निकल चुके होते थे।
इस ठगी की खास बात यह थी कि आरोपियों को पीड़ित का OTP हासिल करने, बैंक खाते का पासवर्ड जानने या अकाउंट हैक करने की जरूरत नहीं पड़ती थी। पुलिस के अनुसार, केवल फर्जी भुगतान स्क्रीनशॉट दिखाकर दुकानदार को विश्वास दिलाया जाता था कि ट्रांजैक्शन पूरा हो चुका है। इसी भरोसे का फायदा उठाकर सामान या सेवाएं हासिल कर ली जाती थीं।
मामला उस समय पुलिस के सामने आया जब दिल्ली के सदर बाजार इलाके में फर्जी UPI पेमेंट के जरिए ठगी की शिकायत मिली। शिकायत मिलने के बाद नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट साइबर थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस टीम ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए तकनीकी निगरानी के साथ गुप्त सूत्रों से मिली जानकारी का सहारा लिया।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को संदिग्धों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इसके बाद दिल्ली के बुराड़ी, वजीराबाद और मलकागंज इलाकों में कार्रवाई की गई और महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब तीनों से पूछताछ कर उनके अन्य साथियों और पूरे नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही है।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि कथित गैंग की गतिविधियां केवल दिल्ली तक सीमित नहीं थीं। इसके तार मुंबई तक जुड़े होने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, अब तक दिल्ली और मुंबई में दर्ज आठ मामलों को इस नेटवर्क से जोड़कर देखा गया है और इन मामलों में करीब 31 लाख रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गैंग ने फर्जी UPI स्क्रीनशॉट किस तरीके से तैयार किए और इसके लिए किन डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि नेटवर्क में गिरफ्तार तीन आरोपियों के अलावा और कितने लोग शामिल हैं तथा किन-किन राज्यों या शहरों में इसी तरीके से वारदात को अंजाम दिया गया।
आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड और डिजिटल गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दिल्ली और मुंबई में सामने आए आठ मामलों के अलावा कहीं इसी तरीके से और लोगों को तो निशाना नहीं बनाया गया। जांच के आधार पर ठगी की कुल रकम और मामलों की संख्या में आगे बदलाव हो सकता है।
इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने दुकानदारों और कारोबारियों को UPI भुगतान स्वीकार करते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। पुलिस का कहना है कि ग्राहक के मोबाइल फोन पर दिखाई दे रहे पेमेंट स्क्रीनशॉट को भुगतान का अंतिम प्रमाण नहीं मानना चाहिए।
UPI के जरिए भुगतान किए जाने पर दुकानदार को अपने बैंक खाते या संबंधित UPI ऐप में ट्रांजैक्शन की वास्तविक स्थिति जरूर जांचनी चाहिए। खाते में रकम क्रेडिट होने की पुष्टि होने के बाद ही सामान ग्राहक को सौंपना सुरक्षित तरीका है। केवल स्क्रीनशॉट, पेमेंट सक्सेस मैसेज या ग्राहक की ओर से दिखाए गए किसी डिजिटल प्रमाण पर निर्भर करना नुकसान का कारण बन सकता है।
साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। फर्जी UPI स्क्रीनशॉट से जुड़ा यह मामला दिखाता है कि साइबर ठगी के लिए हर बार बैंक अकाउंट हैक करना या OTP हासिल करना जरूरी नहीं है। सोशल इंजीनियरिंग और डिजिटल भुगतान पर लोगों के भरोसे का फायदा उठाकर भी ठगी को अंजाम दिया जा सकता है।
फिलहाल महिला समेत तीनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं। नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट साइबर थाना पुलिस गैंग के बाकी सदस्यों की तलाश करने के साथ दिल्ली और मुंबई से जुड़े मामलों की जांच आगे बढ़ा रही है। पुलिस की जांच का फोकस पूरे नेटवर्क, फर्जी स्क्रीनशॉट तैयार करने के तरीके और इससे जुड़े अन्य संभावित मामलों का पता लगाने पर है।



