East Delhi Auto Lifter Arrest: AATS ने शातिर ऑटोलिफ्टर को किया गिरफ्तार, चोरी की ब्रेजा, फर्जी नंबर प्लेट और मास्टर की बरामद
नई दिल्ली। पूर्वी जिला पुलिस की एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वॉड (AATS) ने वाहन चोरी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक कथित शातिर ऑटोलिफ्टर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से चोरी की मारुति सुजुकी ब्रेजा, फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट और वाहनों को खोलने व इस्तेमाल करने में काम आने वाली एक मास्टर की बरामद करने का दावा किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान 24 वर्षीय अविनाश चौधरी के रूप में हुई है, जो दिल्ली के मंडावली स्थित जोशी कॉलोनी का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक आरोपी पेशे से डॉग ट्रेनर है।
पूर्वी जिला पुलिस के अनुसार इलाके में वाहन चोरी, स्नैचिंग और अन्य स्ट्रीट क्राइम की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए AATS की टीम लगातार चेकिंग, पेट्रोलिंग और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी कर रही थी। इसी अभियान के दौरान पुलिस को एक संदिग्ध मारुति सुजुकी ब्रेजा के बारे में जानकारी मिली।
संदिग्ध वाहन की पहचान और उसका इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति तक पहुंचने के लिए पुलिस ने बड़े स्तर पर CCTV फुटेज की जांच शुरू की। पुलिस के मुताबिक टीम ने करीब 150 से 200 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली और अलग-अलग स्थानों पर ब्रेजा की आवाजाही को ट्रैक किया।
जांच के दौरान संदिग्ध वाहन की गतिविधियां जोशी कॉलोनी और मधु विहार इलाके में दिखाई देने का दावा किया गया। पुलिस टीम ने अलग-अलग CCTV कैमरों से मिली फुटेज को जोड़ते हुए वाहन के संभावित रूट का पता लगाने का प्रयास किया।
इसके साथ ही फिजिकल सर्विलांस और तकनीकी निगरानी की मदद भी ली गई। पुलिस के मुताबिक लगातार निगरानी के बाद संदिग्ध वाहन का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति की पहचान अविनाश चौधरी के रूप में की गई।
इसके बाद पुलिस ने आरोपी और वाहन को पकड़ने के लिए निगरानी बढ़ा दी। 30 अगस्त 2026 की रात पुलिस टीम को संदिग्ध ब्रेजा की लोकेशन के बारे में जानकारी मिली।
पुलिस के अनुसार रात करीब 11:30 बजे मयूर विहार फेज-1 स्थित क्राउन प्लाजा होटल के पीछे नोएडा लिंक सर्विस रोड पर संदिग्ध मारुति सुजुकी ब्रेजा को रोक लिया गया। वाहन चला रहे व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
पुलिस ने चालक की पहचान 24 वर्षीय अविनाश चौधरी के रूप में की। वह मंडावली की जोशी कॉलोनी का रहने वाला बताया गया है। पुलिस के मुताबिक अविनाश पेशे से डॉग ट्रेनर है।
वाहन के दस्तावेज और उसकी वास्तविक पहचान का सत्यापन करने के लिए पुलिस ने ZIPNET के माध्यम से जांच की। जांच में सामने आया कि बरामद मारुति सुजुकी ब्रेजा चोरी की है।
पुलिस के मुताबिक इस वाहन की चोरी के संबंध में गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में FIR संख्या 27/2026 दर्ज है। इसके बाद पुलिस ने वाहन को कानूनी प्रक्रिया के तहत कब्जे में ले लिया।
जांच के दौरान यह भी सामने आने का दावा किया गया कि ब्रेजा पर लगा रजिस्ट्रेशन नंबर वाहन का वास्तविक नंबर नहीं था। पुलिस का आरोप है कि चोरी की गाड़ी की पहचान छिपाने के लिए उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगाई गई थी।
पुलिस का मानना है कि फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल इसलिए किया जा रहा था ताकि सड़क पर चेकिंग या CCTV निगरानी के दौरान चोरी के वाहन की असली पहचान सामने न आ सके।
तलाशी के दौरान पुलिस को एक मास्टर की भी मिलने का दावा किया गया है। पुलिस इस मास्टर की के इस्तेमाल और आरोपी द्वारा कथित तौर पर वाहन चोरी करने के तरीके की भी जांच कर रही है।
चोरी की ब्रेजा, फर्जी नंबर प्लेट और मास्टर की को पुलिस ने जब्त कर लिया है। बरामद सामान को मामले की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई का हिस्सा बनाया गया है।
पुलिस के अनुसार आरोपी से पूछताछ के दौरान वाहन चोरी के कुछ अन्य मामलों को लेकर भी जानकारी सामने आई है। अविनाश ने कथित तौर पर एक महिंद्रा थार और एक टोयोटा फॉर्च्यूनर की चोरी में भी अपनी संलिप्तता की बात कही है।
आरोपी ने पुलिस को कथित रूप से बताया कि ये दोनों वाहन नोएडा के सेक्टर-58 थाना क्षेत्र में कहीं छिपाए गए हैं। हालांकि आरोपी द्वारा पूछताछ में किए गए इस कथित खुलासे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस इसका सत्यापन कर रही है।
पुलिस टीम अब आरोपी की ओर से बताई गई संभावित जगहों पर वाहनों की तलाश और बरामदगी के प्रयास कर रही है। संबंधित थाना पुलिस से भी आवश्यक जानकारी साझा की जा सकती है।
थार और फॉर्च्यूनर की कथित चोरी के मामलों में आरोपी की वास्तविक भूमिका क्या थी, यह संबंधित मामलों के रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगा।
पूर्वी जिला पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी अकेले वाहन चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था या उसके साथ अन्य लोग भी जुड़े हुए थे। किसी संभावित वाहन चोरी नेटवर्क की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी के बाद वाहनों को कहां ले जाया जाता था, उनकी पहचान बदलने के लिए फर्जी नंबर प्लेट की व्यवस्था कौन करता था और चोरी किए गए वाहनों को आगे बेचने या इस्तेमाल करने का क्या तरीका था।
आरोपी से बरामद मास्टर की को लेकर भी जांच की जा रही है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि इसका इस्तेमाल किन वाहनों में किया गया और आरोपी के पास यह कहां से आई।
पूर्वी जिला पुलिस के मुताबिक आरोपी को 31 अगस्त को अदालत में पेश किया गया। इसके बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।
इस पूरी कार्रवाई में CCTV कैमरों के विश्लेषण को महत्वपूर्ण बताया गया है। करीब 150 से 200 कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद पुलिस संदिग्ध वाहन की गतिविधियों को ट्रैक करते हुए आरोपी तक पहुंचने का दावा कर रही है।
इसके अलावा फिजिकल सर्विलांस और तकनीकी निगरानी ने भी कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई। पुलिस अब आरोपी के पुराने रिकॉर्ड और अन्य वाहन चोरी के मामलों से उसके संभावित संबंधों की जांच कर रही है।
गाजियाबाद के इंदिरापुरम से चोरी हुई ब्रेजा दिल्ली में आरोपी तक कैसे पहुंची, वाहन चोरी के बाद उस पर फर्जी नंबर प्लेट किसने लगाई और इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है या नहीं, इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
फिलहाल पुलिस ने चोरी की ब्रेजा, फर्जी नंबर प्लेट और मास्टर की बरामद करने का दावा किया है। थार और फॉर्च्यूनर से संबंधित आरोपी के कथित खुलासे का सत्यापन तथा संभावित बरामदगी की कार्रवाई जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपी के अन्य वाहन चोरी मामलों और किसी बड़े नेटवर्क से संबंध की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



