Jagatpuri Assault Case: 36 घंटे बाद भी FIR नहीं होने का आरोप, घायल परिवार काट रहा थाने के चक्कर; 20-25 लोगों पर मारपीट का दावा
नई दिल्ली। शाहदरा जिले के जगतपुरी थाना क्षेत्र में दो लोगों के साथ कथित तौर पर बेरहमी से मारपीट का मामला सामने आया है। पीड़ितों का आरोप है कि करीब 20 से 25 लोगों ने लाठी-डंडों, ईंट और पत्थरों से उन पर हमला किया, जिसमें दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि घटना के करीब 36 घंटे बाद भी उनकी FIR दर्ज नहीं की गई और घायल अवस्था में उन्हें कार्रवाई के लिए लगातार जगतपुरी थाने के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। हालांकि परिवार द्वारा पुलिस की कार्यशैली को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
घटना पूर्वी दिल्ली के जगतपुरी इलाके की बताई जा रही है। पीड़ितों की पहचान विक्की शर्मा और उनके साथी अजय बजाज के रूप में हुई है। दोनों ने आरोप लगाया है कि रविवार रात उनके साथ बड़ी संख्या में लोगों ने मारपीट की।
पीड़ितों के मुताबिक रविवार रात वे अपने एक कारीगर को बुलाने के लिए परवाना रोड स्थित उसके घर गए थे। वहां कारीगर के ससुर से उनकी बातचीत हुई। बातचीत के बाद दोनों वहां से वापस लौट रहे थे।
विक्की शर्मा का आरोप है कि वापस लौटते समय अचानक एक व्यक्ति ने उनके पेट पर चोट कर दी। जब उन्होंने उससे मारपीट करने का कारण पूछा तो कथित तौर पर उस व्यक्ति ने उन्हें थप्पड़ मार दिया।
आरोप है कि इसके बाद विवाद बढ़ गया और संबंधित व्यक्ति ने अपने साथियों को मौके पर बुला लिया। पीड़ित का दावा है कि कुछ ही देर में वहां करीब 20 से 25 लोग इकट्ठा हो गए।
विक्की शर्मा और अजय बजाज का आरोप है कि भीड़ में शामिल लोगों के हाथों में लाठी-डंडे थे और उन्होंने ईंट-पत्थरों से भी हमला किया। अचानक हुए कथित हमले में दोनों को गंभीर चोटें आईं।
पीड़ित पक्ष के मुताबिक विक्की शर्मा के सिर पर गंभीर चोट लगी। इसके अलावा दोनों पीड़ितों के हाथों में फ्रैक्चर होने का भी दावा किया गया है। चोटों की वास्तविक प्रकृति और गंभीरता की पुष्टि मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर हो सकेगी।
पीड़ितों का कहना है कि उनकी किसी व्यक्ति से कोई पुरानी दुश्मनी नहीं थी। ऐसे में उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उन पर कथित तौर पर इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने हमला क्यों किया।
घटना के बाद विक्की शर्मा ने पुलिस को कॉल करने का दावा किया है। उनका आरोप है कि सूचना देने के बावजूद काफी देर तक पुलिस मौके पर नहीं पहुंची।
पीड़ित के मुताबिक पुलिस का इंतजार करने के बाद वह खून से लथपथ हालत में खुद जगतपुरी थाने पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि थाने पहुंचने के बाद भी उन्हें तत्काल अस्पताल नहीं भेजा गया।
विक्की का दावा है कि थाने से उन्हें दोबारा घटनास्थल पर जाने के लिए कहा गया। इसके बाद वह घायल अवस्था में वापस घटनास्थल पर पहुंचे।
पीड़ित पक्ष के अनुसार कुछ समय बाद PCR की टीम वहां पहुंची और घायल विक्की को इलाज के लिए हेडगेवार अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में उनका उपचार किया गया और MLC भी कराई गई।
अजय बजाज को लगी चोटों को लेकर भी परिवार ने गंभीर दावा किया है। परिवार के मुताबिक दोनों के हाथों में फ्रैक्चर हुआ है। पुलिस जांच में मेडिकल रिपोर्ट और MLC मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं।
इलाज और मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों पीड़ित कथित तौर पर दोबारा जगतपुरी थाने पहुंचे और पुलिस को अपनी शिकायत दी।
परिवार का आरोप है कि शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने तत्काल FIR दर्ज नहीं की। पीड़ित पक्ष के मुताबिक उन्हें यह कहकर घर भेज दिया गया कि पुलिस की ओर से बाद में उनसे संपर्क किया जाएगा।
परिवार ने मामले के जांच अधिकारी को लेकर भी आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि IO खुर्शीद की ओर से फिलहाल समय नहीं होने की बात कही गई और शिकायत पर कार्रवाई के लिए उन्हें इंतजार करने को कहा गया।
हालांकि जांच अधिकारी और जगतपुरी थाना पुलिस को लेकर परिवार की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई और FIR दर्ज करने की वर्तमान स्थिति क्या है।
पीड़ित परिवार का दावा है कि कथित हमले के करीब 36 घंटे से अधिक समय गुजरने के बाद भी उन्हें FIR दर्ज होने की जानकारी नहीं मिली। इसी कारण परिवार लगातार थाने पहुंचकर कार्रवाई की मांग कर रहा है।
यदि घटनास्थल और आसपास CCTV कैमरे मौजूद हैं तो उनकी फुटेज आरोपियों की पहचान करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। पुलिस उपलब्ध फुटेज, स्थानीय लोगों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से घटनाक्रम की पुष्टि कर सकती है।
कथित हमले में 20 से 25 लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है। ऐसे में जांच के दौरान प्रत्येक आरोपी की पहचान और उसकी कथित भूमिका तय करना महत्वपूर्ण होगा।
पुलिस को यह भी पता लगाना होगा कि शुरुआती विवाद किस बात को लेकर हुआ और इतनी बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर कैसे पहुंचे। पीड़ितों ने किसी पुरानी दुश्मनी से इनकार किया है, इसलिए हमले के पीछे की वास्तविक वजह भी जांच का विषय है।
मामले में पीड़ितों की MLC और अन्य मेडिकल रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण होंगी। इससे चोटों की प्रकृति, उनकी गंभीरता और कथित हमले में इस्तेमाल किए गए साधनों के संबंध में जांच को दिशा मिल सकती है।
वहीं, परिवार की ओर से पुलिस की प्रतिक्रिया को लेकर लगाए गए आरोप भी गंभीर हैं। पीड़ित का दावा है कि कॉल करने के बाद पुलिस देर से पहुंची और घायल अवस्था में थाने पहुंचने के बावजूद उसे पहले अस्पताल भेजने के बजाय घटनास्थल पर वापस जाने को कहा गया।
इन आरोपों की पुष्टि के लिए पुलिस कॉल रिकॉर्ड, PCR कॉल का समय, पुलिस टीम के पहुंचने का समय और थाने से संबंधित रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
परिवार अब मांग कर रहा है कि उनकी शिकायत पर जल्द FIR दर्ज की जाए, कथित हमलावरों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
मामले में कई सवाल अभी अनुत्तरित हैं। कथित हमला क्यों हुआ, इसमें वास्तव में कितने लोग शामिल थे, आरोपियों की पहचान क्या है और पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने अब तक क्या कानूनी कार्रवाई की है, इन सभी बिंदुओं पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि दो लोग घायल हैं और उन्हें न्याय के लिए थाने के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। परिवार ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
फिलहाल परिवार द्वारा पुलिस पर FIR दर्ज नहीं करने और कार्रवाई में देरी के आरोप लगाए गए हैं, लेकिन इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जगतपुरी थाना पुलिस का आधिकारिक पक्ष और शिकायत की वर्तमान कानूनी स्थिति सामने आने के बाद मामले की पूरी तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।



