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Geeta Colony Building: सत्य निकेतन हादसे के बाद गीता कॉलोनी में एक तरफ झुकी दिखी इमारत, अंदर रह रहे 40-45 लोगों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

Geeta Colony Building: सत्य निकेतन हादसे के बाद गीता कॉलोनी में एक तरफ झुकी दिखी इमारत, अंदर रह रहे 40-45 लोगों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद राजधानी में जर्जर और असुरक्षित भवनों को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी बीच पूर्वी दिल्ली के गांधीनगर क्षेत्र की गीता कॉलोनी में एक करीब ढाई मंजिला इमारत एक तरफ झुकी हुई दिखाई देने के बाद वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस इमारत में करीब 40 से 45 लोग रहते हैं, जबकि ग्राउंड फ्लोर पर कई दुकानें भी संचालित हो रही हैं।

बताया जा रहा है कि यह इमारत गीता कॉलोनी की स्लम कॉलोनी में स्थित है। बाहर से देखने पर भवन एक तरफ झुका हुआ नजर आ रहा है। इसकी मौजूदा स्थिति को देखते हुए आसपास रहने वाले लोग किसी संभावित दुर्घटना को लेकर चिंतित हैं।

सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि इमारत में बड़ी संख्या में लोग रह रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां करीब 40 से 45 लोग निवास करते हैं और ये सभी किराएदार हैं। ऐसे में भवन की स्थिति को लेकर उठ रहे सवाल केवल एक परिवार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दर्जनों लोगों की सुरक्षा से जुड़े हुए हैं।

इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर कई दुकानें भी चल रही हैं। इस वजह से दिन के समय यहां रहने वालों के अलावा दुकानदारों और ग्राहकों की आवाजाही भी बनी रहती है। अगर भवन की स्थिति वास्तव में असुरक्षित है तो इसके आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा का सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक इमारत की हालत को लेकर वहां रहने वाले लोगों में चिंता है। इसके बावजूद किराएदार मकान खाली करके जाने के लिए तैयार नहीं हैं। इसके पीछे उनके सामने वैकल्पिक आवास की समस्या और दूसरी जगह रहने की व्यवस्था नहीं होने जैसी मजबूरियां बताई जा रही हैं।

किराएदारों के सामने स्थिति कठिन बनी हुई है। एक तरफ उन्हें भवन की मौजूदा हालत को लेकर चिंता है, वहीं दूसरी तरफ तत्काल मकान खाली करने की स्थिति में रहने के लिए दूसरी जगह की व्यवस्था करना भी चुनौती हो सकती है। इसी कारण कथित जोखिम के बावजूद लोग फिलहाल इमारत में रह रहे हैं।

स्थानीय लोगों का दावा है कि मकान मालिक को भी इमारत की स्थिति के बारे में जानकारी दी जा चुकी है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि भवन की तकनीकी जांच कराई गई है या नहीं और इसे रहने के लिए सुरक्षित या असुरक्षित घोषित करने के संबंध में किसी सक्षम एजेंसी की ओर से क्या कदम उठाया गया है।

इमारत का एक तरफ झुका हुआ दिखाई देना निश्चित रूप से चिंता पैदा कर रहा है, लेकिन इसकी वास्तविक संरचनात्मक स्थिति किसी तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। भवन कितना सुरक्षित है, उसकी नींव और अन्य हिस्सों की स्थिति कैसी है तथा झुकाव की वास्तविक वजह क्या है, इसका निर्धारण विशेषज्ञ जांच के जरिए किया जाना जरूरी होगा।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा को लेकर पहले से चर्चा तेज है। सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद पुरानी, जर्जर और नियमों के विपरीत बदलाव वाली इमारतों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की मांग उठ रही है।

गीता कॉलोनी की इस इमारत में 40 से 45 लोगों के रहने के दावे के कारण मामला और संवेदनशील हो जाता है। यदि भवन की संरचना में गंभीर कमजोरी मौजूद है तो किसी भी अप्रिय घटना से पहले वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।

ग्राउंड फ्लोर पर चल रही दुकानों के कारण भवन का उपयोग केवल आवासीय उद्देश्य से नहीं हो रहा है। यहां रोजाना लोगों की आवाजाही होने के कारण किसी संभावित खतरे का प्रभाव अधिक लोगों पर पड़ सकता है। ऐसे में भवन की स्थिति की जल्द तकनीकी जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक किराएदारों को भवन की स्थिति के बारे में जानकारी है, लेकिन वे अपनी आवासीय मजबूरियों के कारण वहीं रह रहे हैं। यह स्थिति जर्जर इमारतों से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू को भी सामने लाती है कि जोखिम की जानकारी होने के बावजूद आर्थिक और आवासीय परिस्थितियों के कारण कई परिवार तत्काल दूसरी जगह शिफ्ट नहीं हो पाते।

मकान मालिक को भवन की स्थिति बताए जाने के दावे के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि इमारत की मरम्मत, खाली कराने या तकनीकी निरीक्षण के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इस संबंध में किसी अंतिम कार्रवाई का उल्लेख नहीं है।

ऐसे मामलों में भवन की वास्तविक स्थिति का फैसला केवल बाहरी तस्वीर देखकर नहीं किया जा सकता। संबंधित एजेंसी और स्ट्रक्चरल विशेषज्ञ की जांच के बाद ही यह तय हो सकता है कि इमारत की मरम्मत संभव है, उसे तत्काल खाली कराने की आवश्यकता है या भवन के संबंध में कोई अन्य सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए।

सत्य निकेतन की घटना के बाद गीता कॉलोनी में सामने आई इस स्थिति ने पूर्वी दिल्ली में पुरानी और कमजोर इमारतों की पहचान तथा समय पर निरीक्षण की जरूरत को फिर चर्चा में ला दिया है। खास तौर पर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में किसी भवन से जुड़ी दुर्घटना आसपास की दूसरी संपत्तियों और लोगों के लिए भी खतरा पैदा कर सकती है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल इमारत में रह रहे करीब 40 से 45 लोगों की सुरक्षा का है। स्थानीय लोगों की चिंताओं और भवन के झुके हुए दिखाई देने को देखते हुए इसकी तकनीकी स्थिति की जांच और जरूरत पड़ने पर वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था अहम होगी।

इस मामले में संबंधित सरकारी एजेंसी की आधिकारिक तकनीकी रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इमारत वास्तव में कितने खतरे में है। तब तक भवन को लेकर किए जा रहे दावों की आधिकारिक पुष्टि बाकी है, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के वहां रहने के कारण सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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