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MCD Action: सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में अवैध और जर्जर इमारतों पर सख्ती, न्यू अशोक नगर से मधु विहार तक सीलिंग-तोड़फोड़

MCD Action: सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में अवैध और जर्जर इमारतों पर सख्ती, न्यू अशोक नगर से मधु विहार तक सीलिंग-तोड़फोड़

नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए इमारत हादसे के बाद राजधानी में जर्जर भवनों और नियमों का उल्लंघन कर किए गए निर्माणों के खिलाफ दिल्ली नगर निगम ने कार्रवाई तेज कर दी है। अलग-अलग इलाकों में इमारतों का सर्वे किया जा रहा है और नियमों का उल्लंघन मिलने पर सीलिंग तथा तोड़फोड़ की कार्रवाई की जा रही है। पूर्वी दिल्ली में भी नगर निगम की टीमें सक्रिय हैं और न्यू अशोक नगर, लक्ष्मी नगर तथा मधु विहार समेत कई इलाकों में कार्रवाई की गई है।

सत्य निकेतन की घटना के बाद दिल्ली में भवन सुरक्षा और अवैध निर्माण का मुद्दा एक बार फिर प्रमुखता से सामने आया है। इसके बाद नगर निगम की ओर से ऐसे भवनों की पहचान पर जोर बढ़ाया गया है, जिनमें निर्माण नियमों के उल्लंघन या सुरक्षा संबंधी कमियां होने की आशंका है।

पूर्वी दिल्ली में MCD की टीमों ने कई स्थानों पर सर्वे के साथ कार्रवाई की। न्यू अशोक नगर और लक्ष्मी नगर के अलावा मधु विहार में भी नगर निगम की टीम पहुंची। यहां एक कॉम्प्लेक्स की कुछ दुकानों को सील किया गया।

मौके पर मौजूद दिल्ली नगर निगम के अधिकारी अयूब खान ने कार्रवाई के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि मधु विहार का संबंधित कॉम्प्लेक्स मिसयूज लैंड के तहत बनाया गया था। उनके मुताबिक इस परिसर के खिलाफ पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है और कुछ दुकानों को पहले ही सील किया गया था।

अयूब खान के अनुसार बुधवार को भी कॉम्प्लेक्स की करीब तीन से चार दुकानों पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि कार्रवाई अचानक शुरू नहीं की गई है, बल्कि संबंधित परिसर में पहले भी नियमों के तहत कदम उठाए गए हैं।

MCD अधिकारी ने बताया कि क्षेत्र में लगातार सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के दौरान भवनों और व्यावसायिक परिसरों की स्थिति तथा नियमों के पालन की जांच की जा रही है। जहां किसी तरह की कमी या नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल सीलिंग तक सीमित नहीं रहेगी। आवश्यकता और उल्लंघन की प्रकृति के अनुसार तोड़फोड़ की कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके अलावा जर्जर और संभावित रूप से खतरनाक भवनों की पहचान की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

एक तरफ MCD भवन नियमों और सुरक्षा का हवाला देते हुए कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रभावित दुकानदारों ने इस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। मधु विहार के जिस कॉम्प्लेक्स में दुकानों को सील किया गया, वहां वर्षों से कारोबार कर रहे कुछ लोगों ने अपनी रोजी-रोटी और पुराने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कार्रवाई का विरोध किया।

सील की गई दुकानों में से एक दुकान 72 वर्षीय सुनील सब्बारवाल और उनकी पत्नी की बताई गई है। बुजुर्ग दंपति का कहना है कि वे करीब 30 वर्षों से इसी दुकान के जरिए अपना जीवन-यापन करते आ रहे हैं। दुकान बंद होने से उनके सामने आजीविका की समस्या खड़ी होने का दावा किया गया है।

सुनील सब्बारवाल का कहना है कि वह करीब तीन दशक से नगर निगम को टैक्स देते आ रहे हैं और उनकी ओर से निर्धारित दायित्वों का पालन किया जाता रहा है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित विवाद को लेकर अदालत में भी मामला चल रहा है।

उनके मुताबिक नगर निगम की ओर से उन्हें नोटिस दिया गया था और उस नोटिस का जवाब भी अदालत में दिया गया। इसके बावजूद उनकी दुकान पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला न्यायिक प्रक्रिया में है और वह लंबे समय से टैक्स का भुगतान कर रहे हैं तो उनकी दुकान को सील क्यों किया जा रहा है।

हालांकि टैक्स या अन्य शुल्क का भुगतान अपने आप किसी निर्माण या भूमि उपयोग की वैधता तय करता है या नहीं, यह संबंधित नियमों और दस्तावेजों के आधार पर निर्धारित होता है। संबंधित दुकान और कॉम्प्लेक्स की कानूनी स्थिति का अंतिम निर्धारण सक्षम प्राधिकरण और चल रही न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

इसी कॉम्प्लेक्स में दुकान चलाने वाली शबनम ने भी MCD की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि मधु विहार और आसपास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में इमारतें तथा कॉम्प्लेक्स मौजूद हैं, लेकिन कार्रवाई के लिए बार-बार इसी परिसर को चुना जा रहा है।

शबनम का कहना है कि दुकानदार लंबे समय से यहां कारोबार कर रहे हैं और बिजली के बिल तथा नगर निगम का टैक्स भी जमा करते रहे हैं। इसके बावजूद उनकी दुकानों को नियमों के उल्लंघन के दायरे में बताते हुए कार्रवाई किए जाने पर उन्होंने आपत्ति जताई।

प्रभावित दुकानदारों के इन आरोपों के विपरीत MCD अधिकारी अयूब खान का कहना है कि संबंधित कॉम्प्लेक्स में मिसयूज लैंड का मामला है और यहां पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। नगर निगम की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि सर्वे के दौरान जहां नियमों का उल्लंघन मिलेगा, वहां कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम में एक तरफ नगर निगम के सामने भवन निर्माण और भूमि उपयोग से जुड़े नियमों को लागू करने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से इन परिसरों में कारोबार कर रहे दुकानदार अपनी आजीविका का मुद्दा उठा रहे हैं। ऐसे में प्रशासनिक कार्रवाई और प्रभावित लोगों के दावों के बीच विवाद भी सामने आ रहा है।

सत्य निकेतन हादसे के बाद भवन सुरक्षा का मुद्दा और गंभीर हो गया है। किसी जर्जर या असुरक्षित भवन में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी दुर्घटना की स्थिति में जान-माल के बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। इसी कारण राजधानी में ऐसी संपत्तियों के सर्वे और पहचान पर जोर बढ़ा है।

दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माणों की पहचान के साथ खतरनाक इमारतों को लेकर भी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। पूर्वी दिल्ली में न्यू अशोक नगर, लक्ष्मी नगर और मधु विहार में हुई कार्रवाई को इसी अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है।

नगर निगम की ओर से संकेत दिया गया है कि सर्वे आगे भी जारी रहेगा। निरीक्षण के दौरान किसी भवन या परिसर में नियमों का उल्लंघन सामने आने पर उसकी प्रकृति के आधार पर सीलिंग, तोड़फोड़ या अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।

वहीं प्रभावित दुकानदार चाहते हैं कि उनकी वर्षों पुरानी मौजूदगी, कारोबार, टैक्स भुगतान और कानूनी दावों को भी कार्रवाई के दौरान ध्यान में रखा जाए। उनका कहना है कि दुकानें बंद होने से सीधे उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित होती है।

सत्य निकेतन हादसे के बाद शुरू हुई इस सख्ती के बीच अब चुनौती यह है कि राजधानी में भवन सुरक्षा और निर्माण नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करते हुए कार्रवाई कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप की जाए। साथ ही जिन लोगों के कानूनी या न्यायिक दावे लंबित हैं, उनके मामलों का निपटारा भी संबंधित प्रक्रिया के तहत हो।

फिलहाल MCD ने साफ संकेत दिया है कि राजधानी में सर्वे और नियमों का उल्लंघन करने वाली संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। दूसरी तरफ मधु विहार जैसे इलाकों में प्रभावित दुकानदार कार्रवाई के तरीके और अपनी आजीविका को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में सर्वे का दायरा बढ़ने के साथ दिल्ली के अन्य इलाकों में भी ऐसी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

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