Credit Card Fraud: लिमिट बढ़ाने के नाम पर फर्जी बैंक वेबसाइट से साइबर ठगी, उत्तर-पूर्वी दिल्ली पुलिस ने 5 आरोपियों को दबोचा
नई दिल्ली। क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर लोगों से कार्ड की गोपनीय जानकारी हासिल करने और फिर उससे कथित तौर पर अनधिकृत ऑनलाइन खरीदारी करने वाले एक साइबर ठगी गिरोह का उत्तर-पूर्वी दिल्ली की साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से नौ मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किया गया है। पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान आरोपियों से जुड़े मोबाइल नंबरों का देशभर में दर्ज 14 NCRP शिकायतों से भी संबंध सामने आया है।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान करण उर्फ काके, राकेश कुमार उर्फ राणा, फैजान, गौरव शर्मा और रौनक के रूप में हुई है। पांचों पर साइबर ठगी के अलग-अलग हिस्सों में भूमिका निभाने का आरोप है। कोई कथित तौर पर लोगों को बैंक प्रतिनिधि बनकर फोन करता था, तो किसी पर फर्जी वेबसाइट तैयार करने और मोबाइल फोन तथा सिम कार्ड उपलब्ध कराने का आरोप है।
मामले की शुरुआत करावल नगर निवासी प्रशांत शर्मा की शिकायत से हुई। पुलिस के अनुसार पीड़ित के पास एक फोन कॉल आया था। कॉल करने वाले ने खुद को बैंक से जुड़ा प्रतिनिधि बताते हुए उनके क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने की पेशकश की।
आरोप है कि बातचीत के दौरान पीड़ित को विश्वास दिलाया गया कि क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के लिए एक ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद उन्हें एक ऐसी वेबसाइट पर जानकारी दर्ज करने के लिए कहा गया, जो देखने में कथित तौर पर बैंक की आधिकारिक वेबसाइट जैसी लगती थी।
पुलिस का कहना है कि इस फर्जी वेबसाइट का इस्तेमाल पीड़ित के कार्ड से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करने के लिए किया गया। जानकारी दर्ज होने के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर उसका इस्तेमाल कर क्रेडिट कार्ड से करीब 31,663 रुपये की अनधिकृत खरीदारी कर ली।
पीड़ित को जब अनधिकृत लेन-देन की जानकारी मिली तो मामला पुलिस तक पहुंचा। शिकायत के आधार पर उत्तर-पूर्वी दिल्ली की साइबर पुलिस ने जांच शुरू की और डिजिटल लेन-देन से संबंधित कड़ियों को खंगाला।
जांच टीम ने उस रकम का डिजिटल ट्रेल तलाशना शुरू किया, जो पीड़ित के क्रेडिट कार्ड से खर्च की गई थी। बैंक लेन-देन और ऑनलाइन खरीदारी से संबंधित रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया। इसी जांच के दौरान पुलिस को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला।
पुलिस के मुताबिक ठगी से हासिल रकम का कथित तौर पर इस्तेमाल Ajio वेबसाइट से एक ग्राम सोने की ईंट खरीदने के लिए किया गया था। इस खरीदारी की डिलीवरी दिल्ली के तिलक नगर इलाके के एक संदिग्ध पते पर कराई गई थी।
पुलिस ने ऑनलाइन ऑर्डर, डिलीवरी एड्रेस और उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की जांच आगे बढ़ाई। तकनीकी साक्ष्यों को जोड़ते हुए जांच टीम ने गिरोह से कथित तौर पर जुड़े लोगों की पहचान शुरू की।
इसी दौरान पुलिस ने गौरव शर्मा की पहचान की। पुलिस का आरोप है कि गौरव ने वह फर्जी बैंक वेबसाइट तैयार की थी, जिसका इस्तेमाल पीड़ित से क्रेडिट कार्ड संबंधी जानकारी हासिल करने के लिए किया गया। जांच एजेंसी अब वेबसाइट से जुड़े अन्य तकनीकी पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।
पुलिस के मुताबिक रौनक की भूमिका भी जांच के दौरान सामने आई। आरोप है कि उसने फर्जी वेबसाइट तैयार कराने के लिए भुगतान की व्यवस्था की थी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वेबसाइट का इस्तेमाल केवल इसी मामले में हुआ या इसके जरिए अन्य लोगों को भी निशाना बनाया गया था।
वहीं करण उर्फ काके और राकेश कुमार उर्फ राणा पर कथित फर्जी कॉल सेंटर चलाने का आरोप लगाया गया है। पुलिस का दावा है कि यह कॉल सेंटर मंगोलपुरी इलाके से संचालित किया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार करण और राकेश कथित तौर पर बैंक प्रतिनिधि बनकर संभावित पीड़ितों को फोन करते थे। बातचीत के दौरान लोगों को उनके क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का लालच दिया जाता और फिर कथित बैंकिंग प्रक्रिया के नाम पर फर्जी वेबसाइट की ओर भेजा जाता था।
जांच में फैजान की कथित भूमिका भी सामने आई। पुलिस का आरोप है कि वह गिरोह के सदस्यों को मोबाइल फोन और सिम कार्ड उपलब्ध कराता था। साइबर अपराध में इस्तेमाल हुए नंबरों और उपकरणों की जांच के जरिए पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है।
पुलिस टीम ने 9 सितंबर को कार्रवाई करते हुए सबसे पहले करण उर्फ काके और राकेश कुमार उर्फ राणा को गिरफ्तार किया। दोनों से पूछताछ और तकनीकी जांच के दौरान मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने आगे कार्रवाई की।
इसके बाद फैजान, रौनक और गौरव शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने पांचों आरोपियों से कुल नौ मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद करने की जानकारी दी है। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जांच के दायरे में लिया गया है।
पुलिस के मुताबिक बरामद मोबाइल नंबरों की जांच करने पर उनका देश के विभिन्न हिस्सों में दर्ज 14 NCRP शिकायतों से कथित लिंक सामने आया है। इस जानकारी के आधार पर जांच का दायरा अब शिकायत के मूल मामले से आगे बढ़ गया है।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन शिकायतों में कितनी घटनाओं में गिरफ्तार आरोपियों की सीधी भूमिका रही और गिरोह ने कुल कितने लोगों को निशाना बनाया। इसके अलावा कथित ठगी से हासिल कुल रकम का आकलन भी किया जा रहा है।
जांच में सामने आए कथित तौर-तरीके के अनुसार पहले संभावित पीड़ित से बैंक अधिकारी या प्रतिनिधि बनकर संपर्क किया जाता था। इसके बाद क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने जैसी सुविधा का लालच देकर विश्वास हासिल करने का प्रयास किया जाता था।
अगले चरण में पीड़ित को बैंक जैसी दिखाई देने वाली फर्जी वेबसाइट पर भेजा जाता था। पुलिस का आरोप है कि वहां दर्ज की गई कार्ड संबंधी संवेदनशील जानकारी आरोपियों तक पहुंच जाती थी और फिर उसका इस्तेमाल अनधिकृत ऑनलाइन लेन-देन के लिए किया जाता था।
मामले ने एक बार फिर ऑनलाइन बैंकिंग और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतने की जरूरत को सामने रखा है। किसी अनजान कॉल पर कार्ड नंबर, CVV, OTP, पासवर्ड या दूसरी संवेदनशील बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए और बैंक से संबंधित किसी वेबसाइट पर जाने से पहले उसके आधिकारिक होने की पुष्टि करना जरूरी है।
फिलहाल उत्तर-पूर्वी दिल्ली की साइबर पुलिस मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। गिरफ्तार आरोपियों की व्यक्तिगत भूमिका, अन्य संभावित साथियों, कथित फर्जी कॉल सेंटर, वेबसाइट और इससे जुड़े डिजिटल नेटवर्क की जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस तरीके से और कितने लोगों को निशाना बनाया गया तथा कथित साइबर ठगी से कुल कितनी रकम हासिल की गई।



