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MCD Building Survey: सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में इमारतों की बड़े स्तर पर जांच, 1,355 बिल्डिंग पहली नजर में खतरनाक; 3 PG भवनों पर एक्शन

MCD Building Survey: सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में इमारतों की बड़े स्तर पर जांच, 1,355 बिल्डिंग पहली नजर में खतरनाक; 3 PG भवनों पर एक्शन

नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली नगर निगम ने राजधानी में जर्जर और खतरनाक इमारतों को लेकर बड़े स्तर पर सर्वे तेज कर दिया है। MCD की टीमों ने अलग-अलग इलाकों में भवनों की स्थिति की जांच शुरू की है। शुरुआती सर्वे में 1,355 इमारतें ऐसी पाई गई हैं, जो देखने में खतरनाक नजर आ रही हैं। अब इन भवनों की विस्तृत तकनीकी जांच की जा रही है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि इनमें रहना सुरक्षित है या तत्काल कार्रवाई की जरूरत है।

सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद राजधानी में पुरानी, जर्जर और नियमों का उल्लंघन कर बनाई गई इमारतों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। हादसे के बाद MCD ने सभी जोन में भवनों की स्थिति की जांच और खतरनाक निर्माणों की पहचान का अभियान तेज किया है।

नगर निगम की टीमें अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर इमारतों का भौतिक निरीक्षण कर रही हैं। इस दौरान ऐसे भवनों की पहचान की जा रही है जिनमें झुकाव, दरारें, कमजोर ढांचा या अन्य ऐसी स्थितियां दिखाई देती हैं, जिनसे भविष्य में दुर्घटना की आशंका हो सकती है।

MCD के सर्वे में अब तक 1,355 इमारतों को पहली नजर में खतरनाक पाया गया है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी इमारतों को तत्काल गिराया जाएगा। इनकी वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए आगे विस्तृत निरीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा।

जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि किसी इमारत की संरचना कितनी मजबूत है, उसमें किस तरह की क्षति हुई है और क्या मरम्मत के जरिए उसे सुरक्षित बनाया जा सकता है। यदि किसी भवन को रहने के लिए असुरक्षित पाया जाता है तो निगम निर्धारित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई कर सकता है।

सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD का विशेष ध्यान PG और किराए पर चलने वाली इमारतों पर भी है। ऐसे भवनों में बड़ी संख्या में छात्र और नौकरीपेशा लोग रहते हैं, इसलिए किसी तरह की संरचनात्मक कमजोरी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

सर्वे के दौरान तीन PG इमारतों को लेकर भी कार्रवाई की बात सामने आई है। निगम की जांच में इन भवनों से संबंधित सुरक्षा और नियमों के पालन के पहलुओं की पड़ताल की गई। आवश्यक प्रक्रिया के तहत इन पर कार्रवाई की जा रही है।

दिल्ली के कई इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसी इमारतें मौजूद हैं, जिनमें समय के साथ अतिरिक्त निर्माण किए गए हैं। कई स्थानों पर पुराने भवनों के ऊपर अतिरिक्त मंजिलें बनाने या संरचना में बदलाव करने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

ऐसे निर्माणों में सबसे बड़ा खतरा भवन की मूल भार क्षमता को लेकर होता है। किसी पुरानी इमारत के ऊपर बिना पर्याप्त संरचनात्मक जांच के अतिरिक्त मंजिल बनाने पर उसके कॉलम, बीम और नींव पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

इसी वजह से MCD की टीमें सर्वे के दौरान केवल भवन की बाहरी स्थिति नहीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर उसकी संरचनात्मक सुरक्षा का भी आकलन करा सकती हैं। निगम का उद्देश्य ऐसे भवनों की समय रहते पहचान करना है, जहां भविष्य में हादसे का खतरा हो सकता है।

सत्य निकेतन की घटना ने खास तौर पर निर्माण और मरम्मत के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन का मुद्दा सामने ला दिया है। किसी भवन में दीवार हटाने, बड़े स्तर पर तोड़फोड़ करने या संरचनात्मक बदलाव करने से पहले तकनीकी सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी होता है।

हादसे के बाद MCD ने अलग-अलग जोन के अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। निगम की टीमें जर्जर भवनों के अलावा अनधिकृत निर्माण और भवन नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों पर भी नजर रख रही हैं।

सर्वे के दौरान यदि किसी इमारत को तत्काल खतरा माना जाता है तो आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर भवन खाली कराने, खतरनाक हिस्से को हटाने या उसे सील करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि किसी इमारत को केवल बाहर से देखकर अंतिम रूप से खतरनाक घोषित नहीं किया जाता। शुरुआती सर्वे में संदिग्ध स्थिति मिलने के बाद विस्तृत तकनीकी जांच महत्वपूर्ण होती है। इसी जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाती है।

MCD के सामने चुनौती यह भी है कि दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों में कई पुरानी इमारतें बेहद संकरी गलियों में मौजूद हैं। इनमें बड़ी संख्या में परिवार, किराएदार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित होते हैं। ऐसी स्थिति में सुरक्षा संबंधी कार्रवाई के साथ लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

पुरानी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली और दक्षिण दिल्ली के कई घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भवनों की उम्र, अतिरिक्त निर्माण और रखरखाव की स्थिति अलग-अलग है। इसलिए निगम के सर्वे में प्रत्येक भवन की वास्तविक स्थिति के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाना है।

निगम की कार्रवाई का उद्देश्य केवल हादसे के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि संभावित रूप से खतरनाक भवनों की पहले से पहचान करना भी है। यदि किसी इमारत में गंभीर संरचनात्मक कमजोरी मिलती है तो हादसा होने से पहले वहां आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।

दिल्ली में भवनों की सुरक्षा को लेकर मकान मालिकों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है। किसी पुराने भवन में बड़ी दरार, असामान्य झुकाव या संरचनात्मक कमजोरी दिखाई देने पर विशेषज्ञ से जांच कराना और आवश्यक मरम्मत कराना जरूरी माना जाता है।

इसी तरह अतिरिक्त मंजिल या बड़े निर्माण परिवर्तन के दौरान स्वीकृत नक्शे और निर्धारित भवन नियमों का पालन भी सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। बिना तकनीकी आकलन के संरचना में बदलाव भविष्य में गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

सत्य निकेतन हादसे के बाद शुरू हुए इस व्यापक अभियान में MCD का फोकस अब उन भवनों की विस्तृत जांच पर है, जिन्हें शुरुआती निरीक्षण में संदिग्ध या खतरनाक पाया गया है।

1,355 इमारतों के पहली नजर में खतरनाक पाए जाने का आंकड़ा राजधानी में भवन सुरक्षा की चुनौती को सामने लाता है। हालांकि इन सभी भवनों की अंतिम स्थिति तकनीकी जांच और निगम की आगे की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

फिलहाल MCD का सर्वे और निरीक्षण अभियान जारी है। सत्य निकेतन हादसे के बाद निगम की कोशिश ऐसे भवनों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई करने की है, जहां संरचनात्मक कमजोरी या नियमों के उल्लंघन के कारण लोगों की जान को खतरा हो सकता है।

 

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