Cyber Fraud Network: फर्जी रिफंड के नाम पर 47,971 रुपये की ठगी, म्यूल अकाउंट नेटवर्क से जुड़े तीन आरोपी गिरफ्तार
नई दिल्ली। साइबर फ्रॉड के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस के ईस्ट जिला साइबर पुलिस स्टेशन की टीम ने म्यूल बैंक अकाउंट के जरिए कथित रूप से साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने वाले नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 19 वर्षीय सनी, 26 वर्षीय जैद और 31 वर्षीय घनी खान के रूप में हुई है। पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और अतिरिक्त बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है।
पुलिस के मुताबिक मामले की शुरुआत एक फर्जी रिफंड साइबर फ्रॉड की शिकायत से हुई थी। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी निवासी शिकायतकर्ता गोपाल कृष्ण ने फेसबुक पर एक विज्ञापन देखने के बाद ऑनलाइन ड्राई फ्रूट्स का ऑर्डर किया था। इसके बाद कथित साइबर ठगों ने उनसे WhatsApp के माध्यम से संपर्क किया।
पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता को बताया गया कि उनका ऑर्डर डिलीवर नहीं किया जा सकता और उन्हें भुगतान की गई रकम वापस करने के लिए रिफंड प्रक्रिया पूरी करनी होगी। आरोप है कि ठगों ने शिकायतकर्ता को कुछ निर्देश दिए। बताए गए तरीके को अपनाने के दौरान उनके बैंक खाते से कुल 47,971 रुपये की अनधिकृत निकासी हो गई।
अपने साथ ठगी होने का पता चलने के बाद शिकायतकर्ता ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। शिकायत मिलने पर साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू की। सबसे पहले ठगी की रकम के बैंकिंग ट्रेल का पता लगाने का प्रयास किया गया, ताकि यह मालूम हो सके कि शिकायतकर्ता के खाते से निकले रुपये किन बैंक खातों में पहुंचे।
पुलिस के मुताबिक जांच के दौरान ठगी की रकम का एक हिस्सा त्रिलोकपुरी स्थित पंजाब नेशनल बैंक के एक खाते में पहुंचने की जानकारी मिली। यह बैंक खाता सनी के नाम पर पाया गया। पुलिस को संदेह हुआ कि इस खाते का इस्तेमाल साइबर अपराध से हासिल रकम प्राप्त करने के लिए म्यूल अकाउंट के तौर पर किया जा रहा था।
इसके बाद बैंक रिकॉर्ड, लेनदेन की जानकारी, ATM से की गई निकासी, मोबाइल फोन डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की गई। तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने सनी की पहचान की और उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से Redmi 15C 5G मोबाइल फोन भी बरामद किया।
पुलिस का दावा है कि मोबाइल फोन की शुरुआती जांच में WhatsApp चैट के साथ बैंक खातों के इस्तेमाल और उनसे जुड़े लेनदेन से संबंधित डिजिटल सामग्री मिली। इसके आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया गया और नेटवर्क में कथित रूप से शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल शुरू की गई।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को पता चला कि कुछ लोग बैंक अकाउंट खोलने से संबंधित किट, ATM कार्ड और दूसरी बैंकिंग सामग्री दिल्ली से लेकर नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचाने का काम कथित रूप से कर रहे थे। इसी जांच के दौरान जैद और घनी खान का नाम सामने आया।
पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों की गतिविधियों से संबंधित जानकारी जुटाने के बाद जैद और घनी खान को निजामुद्दीन इलाके के पास से पकड़ा गया। पूछताछ के बाद दोनों को मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस का आरोप है कि दोनों दिल्ली से बैंक अकाउंट-ओपनिंग किट और खातों से संबंधित अन्य सामग्री लेकर उसे नेटवर्क में आगे पहुंचाने में शामिल थे।
जांच के दौरान पुलिस ने एक सफेद रंग की Maruti Suzuki Brezza भी बरामद की है। पुलिस का दावा है कि इस कार का इस्तेमाल दिल्ली आने-जाने और बैंक खातों से संबंधित सामग्री को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जाता था। वाहन की भूमिका और इसके इस्तेमाल से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक नेटवर्क में म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड से प्राप्त रकम को हासिल करने के लिए कथित रूप से किया जाता था। रकम बैंक खाते में पहुंचने के बाद उसे ATM के जरिए निकालने और फिर नेटवर्क के अन्य सदस्यों के निर्देश पर आगे पहुंचाने का आरोप है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन खातों का वास्तविक नियंत्रण किन लोगों के पास था।
तीनों आरोपियों को गिरफ्तारी के बाद अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस ने आरोपियों से बरामद मोबाइल फोन को भी जांच के लिए अपने कब्जे में लिया है। डिजिटल फॉरेंसिक जांच के जरिए मोबाइल फोन में मौजूद डेटा की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि तीनों मोबाइल फोन में मौजूद WhatsApp चैट, कॉन्टैक्ट, बैंक अकाउंट से संबंधित सामग्री, डिजिटल लेनदेन और नेटवर्क के दूसरे सदस्यों से संभावित संपर्क की जानकारी खंगाली जा रही है। इसके आधार पर साइबर फ्रॉड नेटवर्क की पूरी श्रृंखला तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
इस कार्रवाई को ACP/Operations अमनदीप कौर की निगरानी और SHO इंस्पेक्टर पवन यादव के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। पुलिस टीम में SI आजाद सिंह मलिक, SI भानु, HC अजय, कांस्टेबल मोहित, कांस्टेबल कुलदीप और कांस्टेबल अर्जुन राणा शामिल रहे।
पुलिस की जांच अब अतिरिक्त म्यूल बैंक खातों, ठगी की रकम के पूरे मनी ट्रेल और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान पर केंद्रित है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस नेटवर्क के जरिए अन्य साइबर ठगी की वारदातों की रकम भी ट्रांसफर या निकाली गई थी या नहीं। पुलिस के मुताबिक मामले में आगे की जांच जारी है और डिजिटल तथा बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर नेटवर्क की अन्य कड़ियों की तलाश की जा रही है।



