Trilokpuri Protest: AAP पार्षद विजय कुमार के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन, MCD कर्मचारी दीपक की मौत मामले में गिरफ्तारी की मांग
नई दिल्ली। त्रिलोकपुरी के 18 ब्लॉक में एमसीडी सफाई कर्मचारी दीपक की आत्महत्या के मामले को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मामले में आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद विजय कुमार के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में बीजेपी विधायक रविकांत, आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक रोहित कुमार महरौलिया, वाल्मीकि समाज के लोग और स्थानीय निवासी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पार्षद विजय कुमार की गिरफ्तारी, मामले की निष्पक्ष जांच और दीपक के परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।
मामले में कल्याणपुरी थाना पुलिस पहले ही पार्षद विजय कुमार के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर चुकी है। पुलिस दीपक की मौत और उससे जुड़े कथित आर्थिक विवाद की जांच कर रही है। बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं। हालांकि एफआईआर में लगाए गए आरोप अभी जांच का विषय हैं और विजय कुमार ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इनसे इनकार किया है।
प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक रोहित कुमार महरौलिया ने पार्षद विजय कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दीपक कथित रूप से आर्थिक और अन्य प्रकार के दबाव का सामना कर रहा था और उसकी मौत से जुड़े पूरे घटनाक्रम में विजय कुमार की भूमिका की गहराई से जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस एफआईआर दर्ज कर चुकी है और अब जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
महरौलिया ने प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं अरविंद केजरीवाल, सौरभ भारद्वाज और आतिशी समेत अन्य नेताओं का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि विजय कुमार को राजनीतिक संरक्षण मिला। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित नेताओं की इस मामले में किसी भूमिका को लेकर पुलिस जांच के बिना कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि मामले को केवल एक व्यक्ति तक सीमित न रखते हुए इससे जुड़े सभी आर्थिक लेनदेन और अन्य परिस्थितियों की जांच की जाए। उनका कहना था कि जांच में जो भी व्यक्ति जिम्मेदार पाया जाए, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान पार्षद विजय कुमार द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे कार्यालय को लेकर भी सवाल उठाए गए। रोहित महरौलिया ने दावा किया कि जिस कार्यालय का इस्तेमाल पार्षद कर रहे हैं, वह पहले एमसीडी कर्मचारियों के उपयोग में था। उन्होंने कहा कि कार्यालय को लेकर संबंधित विभाग के स्तर पर कार्रवाई की जाएगी और इसे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इस दावे की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की कार्रवाई के आधार पर ही हो सकेगी।
महरौलिया ने विजय कुमार पर कुछ लोगों के साथ कथित आर्थिक धोखाधड़ी के आरोप भी लगाए। उन्होंने दावा किया कि मामले की जांच आगे बढ़ने पर कुछ अन्य नाम भी सामने आ सकते हैं। हालांकि इन आरोपों की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और फिलहाल पुलिस की जांच जारी है।
दीपक की मौत के मामले में उसकी पत्नी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक शिकायत में करीब 15 लाख रुपये के लोन और आर्थिक लेनदेन से जुड़े विवाद का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि इस आर्थिक मामले के कारण दीपक पर दबाव था। पुलिस अब इन दावों की सत्यता का पता लगाने के लिए बैंकिंग रिकॉर्ड, दस्तावेज और संबंधित लोगों के बयान की जांच कर रही है।
दूसरी तरफ पार्षद विजय कुमार ने आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी कर्मचारी को लोन नहीं दिलाया और उन्हें गलत तरीके से मामले में फंसाया जा रहा है। ऐसे में पुलिस के सामने एक तरफ शिकायतकर्ता और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोप हैं, जबकि दूसरी तरफ विजय कुमार ने इन आरोपों से स्पष्ट रूप से इनकार किया है।
प्रदर्शन में शामिल वाल्मीकि समाज और स्थानीय लोगों ने दीपक के परिवार के लिए आर्थिक सहायता की मांग भी उठाई। इसके साथ ही परिवार के किसी सदस्य को रोजगार संबंधी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दीपक के परिवार को न्याय मिलने तक मामले में कार्रवाई जारी रहनी चाहिए।
दीपक की मौत के बाद मामला अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का रूप भी ले चुका है। बीजेपी विधायक और आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक के एक साथ प्रदर्शन में शामिल होने के कारण भी यह मामला चर्चा में है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग पार्षद विजय कुमार की गिरफ्तारी और मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की है।
फिलहाल पुलिस एफआईआर के आधार पर जांच कर रही है। आर्थिक लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दीपक की मौत से पहले किन परिस्थितियों का सामना कर रहा था और दर्ज एफआईआर में लगाए गए आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य सामने आते हैं। पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही विजय कुमार या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका के बारे में स्थिति स्पष्ट होगी।



