Delhi Protest: जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद, 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का दावा; मारपीट के भी आरोप
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 2 अक्टूबर 2026 को हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान 500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ मीडिया रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या करीब एक हजार तक बताए जाने का उल्लेख किया गया। प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने पुलिस पर धक्का-मुक्की, कथित मारपीट और सख्ती बरतने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों की वास्तविक संख्या और कथित मारपीट से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। पूरे मामले में आधिकारिक जानकारी और उपलब्ध साक्ष्य सामने आने के बाद ही कार्रवाई की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
यह विरोध-प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शन में छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों के शामिल होने की जानकारी सामने आई। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर जवाबदेही और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई तथा पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग के जरिए लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लेकर बसों के माध्यम से अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि हिरासत में लिए गए लोगों में से कुछ को स्टेडियम में ले जाया गया था। हालांकि, इन दावों के संबंध में हिरासत में लिए गए लोगों की पूरी सूची, उन्हें ले जाए गए स्थानों और बाद में उनकी रिहाई की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। अलग-अलग रिपोर्टों में सामने आ रही संख्याओं के बीच अंतर को देखते हुए आधिकारिक आंकड़ों का महत्व और बढ़ जाता है।
कार्रवाई के बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए। उनका कहना है कि हिरासत में लेने के दौरान धक्का-मुक्की की गई और कुछ लोगों के साथ सख्ती बरती गई। इन आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट करने के लिए संबंधित लोगों के बयान, उपलब्ध वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी और किसी भी औपचारिक शिकायत की जांच महत्वपूर्ण होगी। केवल आरोपों के आधार पर घटना के सभी तथ्यों को स्थापित नहीं माना जा सकता। इसी तरह, मामले की पूरी स्थिति समझने के लिए पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
प्रदर्शन का एक प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया रहा। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और मतदाता सूची से जुड़े सवालों का जवाब देने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार के बदलाव की प्रक्रिया में नागरिकों के अधिकारों और उनकी भागीदारी को महत्व दिया जाना चाहिए। मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी इसी विरोध का हिस्सा बताई गई। हालांकि, प्रदर्शनकारियों की मांगों और एसआईआर को लेकर उठाई गई आपत्तियों का मूल्यांकन संबंधित तथ्यों, चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर किया जाना चाहिए।
इस घटनाक्रम ने सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भूमिका और हिरासत की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने की स्थिति में लागू कानूनी प्रक्रियाओं और उसके अधिकारों का पालन करना भी आवश्यक है। यदि किसी व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार या मारपीट हुई है, तो उसकी शिकायत की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। वहीं, प्रदर्शन के आयोजकों और प्रतिभागियों के दावों की पुष्टि भी साक्ष्यों के आधार पर की जानी चाहिए, ताकि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले घटनाक्रम के सभी पहलुओं को समझा जा सके।
जंतर-मंतर पर हुई इस कार्रवाई के संबंध में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब अभी स्पष्ट होना बाकी हैं। हिरासत में कुल कितने लोगों को लिया गया? क्या 500 से अधिक लोगों को हिरासत में लेने का दावा आधिकारिक आंकड़ों से मेल खाता है? करीब एक हजार लोगों को हिरासत में लिए जाने की चर्चा का आधार क्या है? कितने लोगों को बाद में रिहा किया गया और उन्हें किन स्थानों पर ले जाया गया? इसके अलावा, कथित मारपीट को लेकर क्या कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई और क्या उसकी जांच शुरू हुई? इन सवालों के जवाब मिलने से पूरे मामले की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी।
फिलहाल, 2 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिरासत और कथित मारपीट को लेकर सामने आए दावों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों, हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और कार्रवाई के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर संबंधित अधिकारियों की जानकारी महत्वपूर्ण होगी। आधिकारिक पक्ष, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच संबंधी विवरण सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्रवाई के दौरान क्या हुआ और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। इस मामले में पारदर्शिता और तथ्यपरक जानकारी सामने आना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि यह सार्वजनिक प्रदर्शन, पुलिस की कार्रवाई और नागरिकों के कानूनी अधिकारों से जुड़ा विषय है।



