Bhavya Ramlila: ताड़का वध के बाद विशाल पुतले का दहन, ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंजा पंडाल
भव्य रामलीला सोसायटी की ओर से आयोजित रामलीला के दूसरे दिन 12 अक्टूबर को भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का आकर्षक मंचन किया गया। रात 8 बजे शुरू हुए कार्यक्रम में कलाकारों ने रावण के अत्याचारों, भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव और ताड़का वध सहित रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। धार्मिक उत्साह और भव्य आयोजन के बीच बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालु रामलीला के विभिन्न दृश्यों से जुड़े रहे।
कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। जैसे ही मंच पर श्रीराम जन्मोत्सव का प्रसंग प्रस्तुत किया गया, पूरा पंडाल ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ भगवान श्रीराम के जन्म का उत्सव मनाया और एक-दूसरे को बधाइयां दीं। पूरे आयोजन में भक्तिमय माहौल देखने को मिला और दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
इसके बाद महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा के लिए भगवान श्रीराम द्वारा ताड़का और सुबाहु के वध का प्रसंग मंचित किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। मंचन के जरिए दर्शकों को रामायण की उस कथा से रूबरू कराया गया, जिसमें भगवान श्रीराम धर्म की रक्षा और ऋषि-मुनियों के यज्ञ में बाधा डालने वाली आसुरी शक्तियों का अंत करते हैं।
ताड़का वध के मंचन के बाद बुराई के प्रतीक के रूप में ताड़का के विशाल पुतले का दहन किया गया। इस दौरान भव्य आतिशबाजी भी की गई, जिसने आयोजन के आकर्षण को और बढ़ा दिया। पुतला दहन देखने के लिए मौजूद दर्शकों में खासा उत्साह दिखाई दिया। धार्मिक मंचन, आतिशबाजी और जयकारों के बीच रामलीला का यह दृश्य कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा।
भव्य रामलीला सोसायटी के अध्यक्ष सतीश लूथरा ने बताया कि रामलीला का उद्देश्य लोगों तक मर्यादा, धर्म और नैतिकता का संदेश पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि रामायण के प्रसंगों के माध्यम से दर्शकों को जीवन में सदाचार और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। वहीं, समिति के आतिशबाजी निदेशक विजय गर्ग ने ताड़का वध के बाद विशाल पुतले के दहन और आतिशबाजी को कार्यक्रम की विशेष प्रस्तुति बताया।
इस अवसर पर भव्य रामलीला सोसायटी के उपाध्यक्ष संजय क्वात्रा ‘मोनू’ सहित संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे। कार्यक्रम के समापन पर सामूहिक आरती की गई और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान लोगों ने धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेकर भगवान श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त किया।
भव्य रामलीला के दूसरे दिन का आयोजन धार्मिक आस्था, पारंपरिक मंचन और आतिशबाजी का संगम रहा। श्रीराम जन्मोत्सव से लेकर ताड़का वध तक प्रस्तुत किए गए प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को रामायण की कथा से जोड़ा। साथ ही, आयोजन के माध्यम से मर्यादा, धर्म और नैतिक मूल्यों को अपनाने का संदेश भी दिया गया।



