DMRC Apology: CJP प्रदर्शन के दौरान 45 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद करने पर दिल्ली मेट्रो ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी बिना शर्त माफी
नई दिल्ली। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद किए जाने के मामले में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगी है। 14 अक्टूबर 2026 को अदालत में दाखिल हलफनामे में DMRC की चेयरपर्सन डी. थारा ने कहा कि 10 अक्टूबर को मेट्रो सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं की गई थीं और निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार ट्रेनों का संचालन जारी रहा। यह मामला प्रदर्शन के मद्देनजर मेट्रो स्टेशनों पर लगाई गई पाबंदियों और आम यात्रियों को हुई परेशानी से जुड़ा है।
10 अक्टूबर को CJP और कुछ छात्र संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा निर्वाचन आयोग के कामकाज से जुड़े कथित मुद्दों को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और मेट्रो के कई स्टेशनों के प्रवेश तथा निकास द्वार बंद कर दिए गए। इस कदम को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अदालत ने पहले निर्देश दिया था कि मेट्रो और दिल्ली आने वाली ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जानी चाहिए तथा सेवाओं को उचित व्यवस्था के तहत जारी रखा जाना चाहिए।
DMRC ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया कि 10 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो नेटवर्क पूरी तरह बंद नहीं था। निगम के अनुसार, दिल्ली मेट्रो के कुल 303 स्टेशनों में से 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास पर प्रतिबंध लगाया गया था, जबकि शेष 258 स्टेशन यात्रियों के लिए चालू रहे। DMRC ने कहा कि पुलिस और कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों के निर्देशों तथा उनके सुरक्षा आकलन के आधार पर ये कदम उठाए गए थे। निगम ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए वह बिना शर्त माफी मांग रहा है, हालांकि उसके अनुसार, जब अदालत ने पहले आदेश पारित किया, तब निगम को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिला था।
मेट्रो प्रशासन ने अदालत को बताया कि 10 अक्टूबर को 271 ट्रेनों का संचालन किया गया और कुल 4,157 ट्रेन ट्रिप पूरी की गईं। DMRC का दावा है कि निर्धारित ट्रेन सेवाओं में कटौती नहीं की गई और किसी ट्रेन ट्रिप को रद्द नहीं किया गया। प्रतिबंधित स्टेशनों में भी 14 प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों को मेट्रो लाइन बदलने यानी इंटरचेंज की सुविधा उपलब्ध रही। इनमें राजीव चौक, कश्मीरी गेट, केंद्रीय सचिवालय, मंडी हाउस और हौज खास जैसे स्टेशन शामिल थे। निगम के मुताबिक, 10 अक्टूबर की रात 10 बजे से 45 स्टेशनों पर लगाए गए प्रवेश-निकास प्रतिबंध हटा दिए गए थे।
DMRC ने यात्रियों की संख्या का ब्योरा देते हुए कहा कि 10 अक्टूबर को लगभग 32 लाख लोगों ने मेट्रो से यात्रा की, जबकि सामान्य तौर पर दूसरे शनिवार को यह संख्या करीब 58 लाख रहती है। निगम के अनुसार, प्रदर्शन और स्टेशनों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण यात्रियों की संख्या में गिरावट आई और आम लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ा। हालांकि, DMRC ने इस बात पर जोर दिया कि ट्रेन संचालन की निर्धारित संख्या में कमी नहीं की गई थी और प्रतिबंध पूरे नेटवर्क पर लागू नहीं थे।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पहले मेट्रो और रेल सेवाओं पर व्यापक पाबंदियों को लेकर सवाल उठाए थे। अदालत ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह बाधित न हो। इसके बाद DMRC और संबंधित अधिकारियों से अनुपालन रिपोर्ट तथा हलफनामे दाखिल करने को कहा गया। अब निगम ने अपना पक्ष रखते हुए माफी मांगी है और अदालत से उसके खिलाफ जारी अवमानना नोटिस को समाप्त करने का अनुरोध किया है। हालांकि, माफी दाखिल किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि अवमानना के मुद्दे पर अदालत का अंतिम फैसला आ गया है। मामले में आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है।



