Delhi Saudi Riyal Fraud: दिल्ली में सऊदी रियाल बदलने के नाम पर 2 लाख की ठगी, 500 CCTV कैमरों की जांच के बाद आरोपी गिरफ्तार
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में विदेशी मुद्रा यानी सऊदी रियाल को भारतीय रुपयों में बदलने का झांसा देकर एक टैक्सी चालक से 2 लाख रुपये की बड़ी ठगी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पूर्वी जिला पुलिस की एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वॉड (AATS) टीम ने इस पेचीदा मामले की गहन पड़ताल करते हुए 45 वर्षीय मुख्य आरोपी सादिक शेख को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हर्ष विहार इलाके से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शातिर ठगों की पहचान करने और उनके ठिकाने तक पहुंचने के लिए पुलिस टीम को करीब 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को बारीकी से खंगालना पड़ा। फिलहाल पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित शिकायतकर्ता अखिलेश कुमार पेशे से एक ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म पर कैब और टैक्सी चलाने का काम करते हैं। इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 13 अक्टूबर 2026 को उस वक्त हुई, जब अखिलेश कुमार मध्य दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाके में मौजूद थे। वहां एक अज्ञात व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और सऊदी अरब की मुद्रा (सऊदी रियाल) को भारतीय रुपयों में बदलने के लिए मदद मांगी। ठगों ने बेहद शातिराना तरीके से पहले एक छोटे और शुरुआती लेन-देन को सही तरीके से अंजाम दिया, जिससे टैक्सी चालक अखिलेश कुमार का उन पर पूरा भरोसा हो गया। एक बार विश्वास जीतने के बाद आरोपियों ने सस्ते दर पर बड़ी मात्रा में सऊदी रियाल देने का लालच देकर उन्हें बड़ी रकम के लेन-देन के लिए तैयार कर लिया।
आरोप है कि ठगों के झांसे में आकर 17 अक्टूबर 2026 को शिकायतकर्ता अखिलेश कुमार 2 लाख रुपये की नकद राशि लेकर पूर्वी दिल्ली के मंगलम रेड लाइट क्षेत्र के पास पहुंचे। वहां प्रेस एन्क्लेव बस स्टैंड के नजदीक आरोपियों ने मुलाकात की और उन्हें सऊदी रियाल से भरा हुआ एक बैग दिखाकर पूरी तरह आश्वस्त कर दिया। बातचीत और लेन-देन के दौरान आरोपियों ने हाथ की सफाई दिखाते हुए बेहद चालाकी से नकदी वाला बैग बदल दिया और अखिलेश कुमार को दूसरा बैग थमा दिया। जब पीड़ित ने कुछ देर बाद अपना बैग खोलकर देखा, तो उनके होश उड़ गए क्योंकि उस बैग में असली नोटों या सऊदी रियाल की जगह सिर्फ रद्दी अखबार के टुकड़े भरे हुए थे। जब तक वह कुछ समझ पाते और शोर मचाते, तब तक आरोपी उनके 2 लाख रुपये लेकर मौके से फरार हो चुके थे।
इस ठगी के बाद पीड़ित ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और उनकी शिकायत के आधार पर 18 अक्टूबर 2026 को पूर्वी दिल्ली के मधु विहार थाने में एफआईआर (FIR) संख्या 444/2026 दर्ज की गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 3(5) के तहत धोखाधड़ी तथा सामूहिक साजिश का मुकदमा दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू की। वारदात की गंभीरता को देखते हुए मामले को सुलझाने के लिए पूर्वी जिले की AATS की एक विशेष जांच टीम गठित की गई। इंस्पेक्टर प्रमोद के नेतृत्व में गठित इस विशेष टीम ने घटनास्थल से लेकर आरोपियों के भागने के संभावित रास्तों पर लगे लगभग 500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया, साथ ही तकनीकी निगरानी और जमीनी मुखबिर तंत्र के जरिए संदिग्धों की आवाजाही का सटीक सुराग लगाया।
जांच के दौरान पुलिस के सामने इस ठगी गिरोह से जुड़े चार संदिग्धों—यासीन शेख, सादिक, अमिर्रोन और रिंकू के नाम सामने आए। पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए हर्ष विहार इलाके से 45 वर्षीय सादिक शेख को दबोच लिया और प्रारंभिक पूछताछ के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उसे मधु विहार थाने के जांच अधिकारी के हवाले कर दिया। पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार आरोपी सादिक शेख का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और पूर्वी दिल्ली के प्रीत विहार थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 368/2025 के एक अन्य मामले में भी उसकी कथित संलिप्तता सामने आई है। फिलहाल पुलिस गिरोह के बाकी फरार सदस्यों को गिरफ्तार करने और पीड़ित टैक्सी चालक से ठगी गई 2 लाख रुपये की नकदी बरामद करने के लिए सघन प्रयास कर रही है।



