Cyber Fraud: व्हाट्सऐप ग्रुप से फर्जी स्टॉक निवेश के नाम पर ठगी, शाहदरा साइबर पुलिस ने दो आरोपी गिरफ्तार किए
दिल्ली के शाहदरा जिले में साइबर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए व्हाट्सऐप के जरिए फर्जी स्टॉक निवेश का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो शेल कंपनियों और म्यूल बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर कर रहे थे। यह मामला 21 फरवरी 2026 को दर्ज ई-एफआईआर संख्या 41/26 के तहत सामने आया था, जिसमें पीड़ित मुनीश चंद्र से 6 लाख 83 हजार रुपये की ठगी की गई थी।
पीड़ित ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसे एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां खुद को “New Berry Capital Private Limited” नाम की कंपनी के प्रतिनिधि बताने वाले लोगों ने संपर्क किया। आरोपियों ने खुद को भरोसेमंद दिखाने के लिए फर्जी SEBI रजिस्ट्रेशन नंबर भी दिया और शुरुआत में मुफ्त में स्टॉक टिप्स और एनालिसिस रिपोर्ट देकर विश्वास जीत लिया। धीरे-धीरे उन्होंने ऊंचे मुनाफे का लालच देकर पीड़ित को निवेश के लिए तैयार कर लिया। भरोसा करने पर पीड़ित ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 6.83 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
आरोपियों ने पीड़ित को AYE Finance Limited और Marushika Technology Limited जैसे IPO में निवेश दिखाया और एक फर्जी पोर्टफोलियो तैयार कर उसे यह विश्वास दिलाया कि उसका पैसा निवेश हो चुका है। लेकिन जब पीड़ित ने पैसा निकालने की कोशिश की तो वह असफल रहा और उसे अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ।
जांच के दौरान साइबर पुलिस ने पाया कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड सिंडिकेट है, जो व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए लोगों को निशाना बनाता था। आरोपी फर्जी कंपनियां बनाकर अपनी विश्वसनीयता दिखाते थे और ठगी की रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाकर अंत में अपने पास पहुंचाते थे। जांच में खुलासा हुआ कि ठगी गई रकम में से 1.70 लाख रुपये सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते में ट्रेस किए गए, जो Trevanta Solutions Pvt. Ltd. नाम की कंपनी के नाम पर था। यह कंपनी असल में एक शेल कंपनी निकली, जो केवल ठगी के पैसों को ट्रांसफर करने के लिए बनाई गई थी और इसका वर्चुअल ऑफिस आसफ अली रोड, तुर्कमान गेट, दिल्ली में दिखाया गया था।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी शशिकांत शर्मा और दीपक इस गिरोह के सक्रिय सदस्य थे। इन्होंने मिलकर Trevanta Solutions Pvt. Ltd. नाम की फर्जी कंपनी बनाई और उसके जरिए बैंक खाते खोलकर ठगी की रकम को ट्रांसफर किया। ये दोनों अन्य आरोपियों के संपर्क में थे, जिनमें अनिरुद्ध प्रताप सिंह नाम का आरोपी पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। इनका मुख्य काम म्यूल बैंक अकाउंट्स की व्यवस्था करना और पैसे को ट्रेस होने से बचाना था।
तकनीकी सर्विलांस और खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने दिल्ली के पालम गांव में छापा मारकर 5 अप्रैल 2026 को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस ऑपरेशन को इंस्पेक्टर विजय कुमार के नेतृत्व में एसआई सुनील देव सिहाग, हेड कांस्टेबल रवि और हेड कांस्टेबल संदीप की टीम ने अंजाम दिया। गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक Oppo F-29 Pro 5G मोबाइल फोन और एक Vivo 1929 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
अब तक इस साइबर फ्रॉड गिरोह से जुड़ी 29 शिकायतें सामने आ चुकी हैं और जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि किसी भी तरह का वास्तविक निवेश नहीं किया गया था, बल्कि पूरी योजना एक सुनियोजित ठगी थी। पुलिस को मिले डिजिटल साक्ष्यों से इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने में मदद मिल रही है और आगे की जांच जारी है।
यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सऐप के जरिए फर्जी निवेश योजनाओं के नाम पर ठगी तेजी से बढ़ रही है। दिल्ली पुलिस की तत्परता और पेशेवर कार्रवाई से इस बड़े साइबर अपराध का खुलासा हुआ है, जिससे आम नागरिकों को जागरूक रहने की जरूरत है।



