Delhi Blast Case: ईडी की बड़ी कार्रवाई, दिल्ली–फरीदाबाद में 25 जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी
दिल्ली ब्लास्ट मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल पर कार्रवाई तेज करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार सुबह राजधानी दिल्ली और फरीदाबाद में 25 लोकेशंस पर एक साथ छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई विशेष रूप से ओखला स्थित अल-फलाह ट्रस्ट और फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े ठिकानों पर केंद्रित है। एजेंसी को संदेह है कि ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े मालिकों और प्रबंधन ने बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और फंड के दुरुपयोग को अंजाम दिया है।
ओखला–जामिया नगर से फरीदाबाद तक ईडी की टीम तैनात, दस्तावेज और डिजिटल सबूतों की तलाश
सूत्रों के मुताबिक, ईडी की कई टीमें सुबह तड़के ही ओखला, जामिया नगर, ओखला विहार और फरीदाबाद के सेक्टर-22 स्थित यूनिवर्सिटी कैंपस में तैनात हो गईं। छापेमारी के दौरान एजेंसी का मुख्य फोकस दस्तावेज, डिजिटल डाटा, बैंक रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े लेन-देन से जुड़े सबूतों को खंगालना है।
छापों का दायरा व्यापक रखा गया है, जिसमें यूनिवर्सिटी प्रबंधन से जुड़े लोगों के घर, ऑफिस और ट्रस्ट के मुख्य दफ्तर शामिल हैं।
शेल कंपनियों का जाल! अल-फलाह ग्रुप की 9 कंपनियां एक ही पते पर रजिस्टर्ड
जांच एजेंसी की प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
ईडी को पता चला है कि अल-फलाह ग्रुप से जुड़ी 9 कंपनियां एक ही पते पर रजिस्टर्ड हैं। दिए गए पते पर न तो कोई सक्रिय ऑफिस मिला, न ही बिजली और पानी के उपयोग का कोई रिकॉर्ड।
जांच में यह भी सामने आया कि:
- कई कंपनियों में एक ही मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी का इस्तेमाल किया गया।
- EPFO और ESIC में कोई फाइलिंग नहीं मिली, जबकि कागजों में इन्हें बड़ी कंपनियां दिखाया गया था।
- कई कंपनियों के डायरेक्टर और अधिकृत साइनटरी एक ही व्यक्ति पाए गए।
- बैंक स्टेटमेंट में सैलरी ट्रांसफर बेहद कम दिखा, जिससे फर्जी कर्मचारियों की आशंका बढ़ी।
- कंपनियों के HR और प्रशासन से जुड़े कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे।
- लगभग सभी कंपनियां एक ही पैटर्न पर बनाई गई थीं और संपर्क विवरण भी एक जैसे पाए गए।
ये सभी संकेत इस ओर इशारा करते हैं कि अल-फलाह नेटवर्क के जरिए शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर फंड की हेराफेरी की जा रही थी।
दिल्ली ब्लास्ट कनेक्शन की पड़ताल जारी, ईडी का फोकस फंडिंग चैनल पर
दिल्ली ब्लास्ट मामले की जांच में ईडी मुख्य रूप से फंडिंग के सोर्स, लेन-देन के पैटर्न और संदिग्ध कंपनियों के नेटवर्क को समझने में जुटी है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन कंपनियों का इस्तेमाल हवाला, संदिग्ध डोनेशन, विदेशी फंडिंग या मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया।



