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Delhi cyber fraud: APK फाइल से 3.60 करोड़ की ठगी का खुलासा, शाहदरा साइबर पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

Delhi cyber fraud: APK फाइल से 3.60 करोड़ की ठगी का खुलासा, शाहदरा साइबर पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

दिल्ली के शाहदरा जिले की साइबर पुलिस ने एक बड़े ऑनलाइन साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो APK फाइल के जरिए लोगों के मोबाइल फोन हैक कर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दे रहे थे। इस गिरोह का मास्टरमाइंड विदेश में ट्रेनिंग लेकर भारत में साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहा था। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गैंग ने करीब 3.60 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया है।

यह मामला FIR संख्या 128/25 के तहत दर्ज किया गया था, जिसमें पीड़ित पीयूष ने शिकायत दी थी कि उसके बैंक खाते से बिना जानकारी के 6,65,992 रुपये निकाल लिए गए। पीड़ित ने बताया कि वह ऑनलाइन गेमिंग करता था और इसी दौरान 27 अक्टूबर से 30 अक्टूबर 2025 के बीच उसके खाते से कई अनधिकृत ट्रांजेक्शन हुए। जांच में पता चला कि उसके मोबाइल फोन में एक संदिग्ध APK फाइल इंस्टॉल की गई थी, जिसके जरिए साइबर अपराधियों ने उसके डिवाइस पर कंट्रोल हासिल कर लिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना शाहदरा की टीम ने तकनीकी जांच शुरू की, जिसमें बैंक ट्रांजेक्शन, IP लॉग्स और डिजिटल डेटा का विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान यह सामने आया कि ठगी की रकम एक एक्सिस बैंक खाते में ट्रांसफर की गई, जो ‘आर पी टोल एंड पार्किंग’ के नाम पर था और जिसे राम अवतार सिंह नाम का व्यक्ति संचालित कर रहा था।

तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस टीम ने उत्तर प्रदेश के आगरा के शास्त्रीपुरम इलाके में छापा मारकर आरोपी राम अवतार सिंह को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने अपने साथी विक्रांत सोनी का नाम बताया, जिसके बाद पुलिस ने जगदीशपुरा इलाके में दबिश देकर उसे भी गिरफ्तार कर लिया।

जांच में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित हो रहा था। मुख्य आरोपी विक्रांत सोनी को 2023 में पिंकी यादव नाम की महिला ने कंबोडिया में नौकरी का झांसा दिया था। इसके बाद वह टेलीग्राम के जरिए ‘लियो’ नाम के एक चीनी नागरिक के संपर्क में आया। जुलाई 2024 में उसे बैंकॉक ले जाया गया और वहां से कंबोडिया के नोम पेन्ह शहर के बाहरी इलाके में स्थित साइबर फ्रॉड कैंप में पहुंचाया गया।

इन कैंपों में उसे 3-4 महीने तक साइबर ठगी की विशेष ट्रेनिंग दी गई, जिसमें भारतीय लोगों को निशाना बनाना, सोशल इंजीनियरिंग तकनीक, फर्जी स्क्रिप्ट के जरिए लोगों को झांसा देना और APK लिंक के जरिए मोबाइल हैक करना सिखाया गया। ट्रेनिंग के बाद वह भारत लौट आया और यहां अपना खुद का साइबर फ्रॉड नेटवर्क शुरू कर दिया।

विक्रांत सोनी टेलीग्राम के जरिए विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में रहता था और अपने साथियों के साथ मिलकर म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल कर ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करता था। इसी नेटवर्क के जरिए राम अवतार सिंह जैसे लोगों के खाते का इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस के अनुसार इस गिरोह ने अब तक करीब 3.60 करोड़ रुपये की ठगी की है।

गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक सैमसंग मोबाइल फोन, आपत्तिजनक टेलीग्राम चैट और कई डिजिटल सबूत जैसे IP लॉग्स, बैंक डिटेल्स और ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं। इन सबूतों के आधार पर पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों और विदेशी कनेक्शन की जांच कर रही है।

यह मामला दर्शाता है कि APK फाइल के जरिए होने वाले साइबर फ्रॉड तेजी से बढ़ रहे हैं और लोग अनजाने में किसी लिंक या एप्लिकेशन को डाउनलोड कर बड़ी ठगी का शिकार हो रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर अपनी तत्परता दिखाते हुए इस बड़े साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है और लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक या ऐप को डाउनलोड करने से बचें।

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