Delhi Lawyers Strike: कड़कड़डूमा कोर्ट: पुलिस गवाही छूट आदेश पर वकीलों की हड़ताल जारी, अदालतों का कामकाज ठप
दिल्ली की अदालतों में शुक्रवार को भी वकीलों की हड़ताल जारी रही। कड़कड़डूमा कोर्ट सहित कई अन्य अदालतों में वकील न्यायिक कार्यों से दूर रहे। यह हड़ताल उस आदेश के विरोध में की जा रही है, जिसके तहत पुलिस अधिकारियों को थाने से ही गवाही देने की अनुमति दी गई है। वकीलों का कहना है कि यह आदेश न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ है और अदालत की गरिमा को कम करता है।
बार एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि हड़ताल कम से कम दो दिन और चलेगी। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठाती, वकील कोर्ट में पेश नहीं होंगे। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन और लंबा खिंच सकता है।
हड़ताल से अदालतों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई मामलों की सुनवाई टल गई है और बड़ी संख्या में आने वाले पक्षकारों को निराश होकर लौटना पड़ा। खासतौर पर जमानत, पेशी और तात्कालिक सुनवाई वाले मामलों में देरी होने से आम लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
एक वरिष्ठ वकील ने कहा, “या तो सरकार इस आदेश को तत्काल रद्द करे, या फिर नए आपराधिक कानून, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita – BNSS) को लागू करे। जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, हड़ताल जारी रहेगी।”
दिल्ली की अदालतों में यह पहली बार नहीं है जब वकीलों ने इस तरह विरोध जताया हो। इससे पहले भी बार एसोसिएशनों ने कई बार न्यायिक सुधारों और आदेशों के खिलाफ आवाज उठाई है। फिलहाल, हड़ताल से सबसे अधिक प्रभावित वे लोग हो रहे हैं जो अपने मामलों की सुनवाई के लिए अदालत पहुंचे थे।
कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में शुक्रवार को सन्नाटा छाया रहा। केवल अदालत कर्मचारी और कुछ न्यायिक अधिकारी मौजूद थे, लेकिन वकीलों के बहिष्कार के चलते न्यायिक कामकाज लगभग ठप रहा। अब सबकी निगाहें सरकार और न्यायपालिका पर हैं कि इस विवाद का समाधान कैसे निकलेगा।



