Wednesday, February 11, 2026
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Para Athletics India: Para Athletics में मास्टर्स कैटेगरी की मांग को लेकर मां शक्ति की ऐतिहासिक पहल, दिल्ली स्टेट चैंपियनशिप में गूंजा मुद्दा

Para Athletics India: Para Athletics में मास्टर्स कैटेगरी की मांग को लेकर मां शक्ति की ऐतिहासिक पहल, दिल्ली स्टेट चैंपियनशिप में गूंजा मुद्दा

नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 5 से 7 फरवरी के बीच आयोजित थर्ड दिल्ली स्टेट पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025-26 न केवल दिव्यांग खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के लिए याद की जाएगी, बल्कि पैरा एथलेटिक्स में मास्टर्स कैटेगरी लागू करने की मजबूत मांग के लिए भी यह प्रतियोगिता खास बन गई। यह आयोजन दिल्ली पैरा स्पोर्ट्स ऑर्गेनाइजेशन द्वारा पैरालंपिक कमिटी ऑफ इंडिया के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से आए दिव्यांग खिलाड़ियों ने अपने जज्बे और प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया।

इस चैंपियनशिप में मां शक्ति अंतरराष्ट्रीय संस्था से जुड़े कई दिव्यांग खिलाड़ियों ने भाग लिया और उत्कृष्ट प्रदर्शन कर संस्था का नाम रोशन किया। मां शक्ति अंतरराष्ट्रीय संस्था की अध्यक्ष एडवोकेट अनीता गुप्ता ने शॉट पुट और जैवलिन थ्रो में गोल्ड मेडल जीतने के साथ-साथ 100 मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल हासिल कर न केवल संस्था बल्कि देश का गौरव भी बढ़ाया। उनके इस प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि उम्र और दिव्यांगता कभी भी आत्मविश्वास और संकल्प के आड़े नहीं आ सकते। मां शक्ति अंतरराष्ट्रीय संस्था लंबे समय से दिव्यांगजनों के अधिकार, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के लिए कार्य कर रही है और “Disability to Ability” के सिद्धांत को खेलों के माध्यम से साकार कर रही है। संस्था का मानना है कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के लिए सम्मान, आत्मविश्वास और सामाजिक स्वीकार्यता का सबसे मजबूत माध्यम है। इसी सोच के तहत संस्था ने पैरा एथलेटिक्स में मास्टर्स कैटेगरी के गठन की आवश्यकता को जोर-शोर से उठाया है। भारत में सामान्य खेलों में जूनियर, सीनियर और मास्टर्स जैसी श्रेणियां पहले से मौजूद हैं, लेकिन पैरा एथलेटिक्स में अब तक मास्टर्स कैटेगरी लागू नहीं की गई है। उम्र बढ़ने के साथ दिव्यांग खिलाड़ियों को शारीरिक चुनौतियों का सामना अधिक करना पड़ता है और कम उम्र के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करना उनके लिए कठिन हो जाता है, जिसके चलते कई अनुभवी खिलाड़ी मजबूरन खेलों से दूर हो जाते हैं।

इसी गंभीर मुद्दे को ध्यान में रखते हुए मां शक्ति अंतरराष्ट्रीय संस्था ने पैरालंपिक कमिटी ऑफ इंडिया और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के समक्ष अपनी मांग रखी है। संस्था ने माननीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार, श्री बी.एल. वर्मा, श्री रामदास आठवले और दिव्यांग प्रकोष्ठ के चेयरपर्सन श्री करनैल सिंह को इस विषय से अवगत कराते हुए भारत में पैरा एथलेटिक्स के लिए मास्टर्स कैटेगरी लागू करने का आग्रह किया है। संस्था का मानना है कि यदि मास्टर्स कैटेगरी की शुरुआत होती है तो वरिष्ठ दिव्यांग खिलाड़ियों को न्यायसंगत अवसर मिलेगा, वे लंबे समय तक खेलों से जुड़े रह सकेंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के पदक जीतने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इस पहल को आगे बढ़ाने में मां शक्ति के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अधिवक्ता दिनेश कुमार गुप्ता, अधिवक्ता विजेंद्र कौशिक, संदीप कुमार, नरेंद्र आनंद, कैलाश गुप्ता, ओम प्रकाश राही, नैना सिंह, जगजीत सिंह और एन.के. सेठी का विशेष सहयोग रहा।

वहीं संस्था की एडवाइजर डॉ. स्नेहा मोहन ने भी दिव्यांग खिलाड़ियों को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करते हुए यह बताया कि किस प्रकार खेल के माध्यम से दिव्यांगता को आत्मबल में बदला जा सकता है। मां शक्ति अंतरराष्ट्रीय संस्था को पूरा विश्वास है कि पैरा एथलेटिक्स में मास्टर्स कैटेगरी की यह पहल न केवल भारत के पैरा स्पोर्ट्स को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी, बल्कि हमारे दिव्यांग खिलाड़ियों को विश्व पटल पर देश का परचम लहराने का सुनहरा अवसर भी प्रदान करेगी।

 

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