Delhi Illegal Extortion: नाला बेलदारों की अवैध वसूली का खेल बेनकाब, जिम्मेदारी से बचते जेई और प्रशासन
दिल्ली में अवैध वसूली का खेल लगातार गहराता जा रहा है। राजधानी के कई इलाकों में Delhi Illegal Extortion का नया चेहरा “नाला बेलदार” के रूप में सामने आया है। सूत्रों और स्थानीय जांच में यह खुलासा हुआ कि कुछ निजी लोग, जो खुद को एमसीडी कर्मचारी बताकर पहचान बना चुके हैं, खुलेआम बिल्डरों से जबरन पैसों की उगाही कर रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस पूरे खेल में निगम के जूनियर इंजीनियर (JE) भी संदिग्ध भूमिका निभाते नज़र आ रहे हैं।
मोनू नाला बेलदार का नाम सबसे आगे
इस अवैध नेटवर्क का सबसे चर्चित नाम मोनू नाला बेलदार है। स्थानीय बिल्डरों और नागरिकों का कहना है कि कई बार उसके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई, एफआईआर भी हुई, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। नतीजा यह है कि उसका नेटवर्क आज भी पहले की तरह सक्रिय है और बिल्डरों से जबरन पैसों की वसूली कर रहा है।
शाहदरा साउथ जोन चेयरमैन का बड़ा बयान
जब इस मुद्दे पर शाहदरा साउथ जोन के अध्यक्ष रामकिशोर कुमार शर्मा से पूछा गया, तो उन्होंने माना कि जेई और कुछ नाला बेलदार मिलकर बिल्डरों से वसूली कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि निगम स्तर पर ऐसी सूची तैयार की जा रही है जिसमें इन लोगों के नाम शामिल होंगे और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने स्वीकारा कि यह सीधे तौर पर जेई की जिम्मेदारी है कि ऐसे लोगों को अपने साथ न रखें, लेकिन कई अधिकारी इस पर आंखें मूंदे हुए हैं।
एमसीडी का पत्र और कार्रवाई का अभाव
A1 न्यूज़ को जो बड़ा सबूत मिला वह और भी चौंकाने वाला है। एमसीडी के डीसी द्वारा तीनों जिलों के डीसीपी को लिखे पत्र में साफ-साफ उल्लेख किया गया कि जेई के साथ मिलकर कुछ प्राइवेट लोग बिल्डरों से अवैध वसूली कर रहे हैं। इस पत्र में उन लोगों की सूची भी शामिल थी और एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई थी।
इसके बावजूद अब तक किसी ठोस कार्रवाई का अभाव इस पूरे मामले को और संदिग्ध बना देता है। सवाल यह है कि जब डीसी स्तर तक अधिकारियों को पूरी जानकारी है, तो पुलिस और प्रशासन अब तक हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठे हैं?
कैमरे पर रंगेहाथ पकड़ा गया खेल
A1 न्यूज़ की टीम ने मौके पर जाकर जांच की तो उन्हें बड़ा सबूत मिला। टीम ने जेई विकास मीना को देखा, जिनके साथ वही मोनू नाला बेलदार मौजूद था। आसमानी रंग की कमीज पहने मोनू कैमरे में कैद हुआ। जैसे ही पत्रकारों ने जेई से पूछा कि यह व्यक्ति कौन है, तो वह कैमरे से बचते हुए भागने लगा। यह दृश्य साफ करता है कि अवैध वसूली के इस खेल में अधिकारी और नाला बेलदारों की मिलीभगत गहरी है।
स्थानीय लोगों का गुस्सा और आशंका
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इन नाला बेलदारों ने वसूली से करोड़ों की संपत्ति बना ली है। वे खुलेआम खुद को सरकारी कर्मचारी बताते हैं और प्रशासन की निष्क्रियता से उनका हौसला और बढ़ता जा रहा है। लोगों का यह भी कहना है कि अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में बिल्डरों और कारोबारियों के लिए हालात और खराब हो सकते हैं।
Delhi Illegal Extortion पर सरकार और पुलिस की चुप्पी
Delhi Illegal Extortion कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन अब यह बड़े पैमाने पर संगठित रूप में सामने आ रही है। एमसीडी और पुलिस दोनों के पास शिकायतें होने के बावजूद, किसी भी बड़े नेटवर्क को तोड़ने की कार्रवाई अब तक नहीं हुई है। इससे साफ है कि या तो अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव है या फिर मिलीभगत।
दिल्ली में बिल्डरों से की जा रही अवैध वसूली का यह खेल लोकतंत्र और प्रशासनिक ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। एमसीडी के नाम पर चल रहा यह Delhi Illegal Extortion नेटवर्क जेई और नाला बेलदारों की मिलीभगत से फल-फूल रहा है। अब देखना यह होगा कि पुलिस और एमसीडी इस पर सख्ती से कार्रवाई करते हैं या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
फिलहाल हालात यही बताते हैं कि इनकी दबंगई पर रोक लगाना शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों या न्यायपालिका के दखल के बिना संभव नहीं होगा।



