Delhi Floods: दिल्ली में यमुना का बढ़ा जलस्तर, मयूर विहार में सैकड़ों लोग बेघर, भाजपा नेता ने राहत कार्यों का लिया जायजा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस समय बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है, जिसका असर सबसे ज्यादा पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार इलाके में देखा जा रहा है। यहां यमुना खादर में रहने वाले सैकड़ों परिवार अपने घर छोड़कर फ्लाईओवर और अस्थायी टैंटों में शरण लेने को मजबूर हो गए हैं।
बेघर हुए परिवारों में छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हैं। गर्मी, मच्छरों और असुविधाओं के बीच लोगों का जीवन बेहद कठिन हो गया है। कई लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उन्हें यमुना के बढ़ते जलस्तर के कारण घर छोड़ना पड़ा हो।
इस बीच, भाजपा के मयूर विहार जिला अध्यक्ष विजेंद्र धामा ने राहत कैंपों का दौरा किया और प्रभावित परिवारों से बातचीत की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि संकट की इस घड़ी में सरकार और संगठन पूरी तरह से उनके साथ खड़े हैं। धामा ने कहा कि भाजपा ने कभी दिल्ली की जनता को केवल वोट नहीं माना, बल्कि परिवार माना है, और परिवार की तरह हर परिस्थिति में जनता का साथ निभाया जाएगा।
प्रशासन और सामाजिक संगठनों की मदद से राहत कैंपों में खाने-पीने की वस्तुएं, साफ पानी और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों से बचाव के लिए प्रभावित इलाकों में फॉगिंग मशीनें लगाई गई हैं। साथ ही, मेडिकल टीमें भी तैनात की गई हैं ताकि किसी भी तरह की बीमारी फैलने से रोकी जा सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि राहत सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाओं से थोड़ी राहत मिली है, लेकिन खुले आसमान के नीचे और टैंटों में रहना बेहद मुश्किल है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, बुजुर्ग बीमारियों से जूझ रहे हैं और महिलाएं घर-गृहस्थी के काम अस्थायी परिस्थितियों में संभाल रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हर साल आने वाली इस स्थिति से निपटने के लिए लंबे समय तक काम करने की जरूरत है। यमुना बाढ़ क्षेत्र (floodplain) में अवैध निर्माण पर रोक, बेहतर शहरी योजना और आपदा प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था से ही ऐसी परेशानियों से बचा जा सकता है।
फिलहाल प्रशासन, एनजीओ और स्वयंसेवक लगातार राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। विभिन्न इलाकों में राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है और स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य करने की कोशिश जारी है।
दिल्ली बाढ़ और मयूर विहार का यह हाल बताता है कि राजधानी अभी भी यमुना नदी के मौसमी उफान से जूझने में सक्षम नहीं है। जब तक स्थायी समाधान नहीं निकलेगा, तब तक हर साल हजारों परिवारों को इस तरह की तकलीफें झेलनी पड़ेंगी और राहत कार्यों पर निर्भर रहना पड़ेगा।



