Sunday, January 25, 2026
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Delhi Cyber Crime: निवेश के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी का पर्दाफाश, दिल्ली पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय गिरोह के 8 सदस्य दबोचे

Delhi Cyber Crime: निवेश के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी का पर्दाफाश, दिल्ली पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय गिरोह के 8 सदस्य दबोचे

दिल्ली पुलिस की साउथ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर टीम ने निवेश के नाम पर आम लोगों को ठगने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का खुलासा किया है। इस बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने 8 शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो मोटे मुनाफे और गारंटी रिटर्न का लालच देकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह संगठित गिरोह भारत के कई राज्यों में सक्रिय था और ठगी की रकम को म्यूल बैंक अकाउंट्स के जरिए कंबोडिया में बैठे मास्टरमाइंड्स तक पहुंचाया जा रहा था।

शुरुआती जांच में ही इस नेटवर्क से जुड़ी 63 से अधिक NCRP शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जिससे इस गिरोह के बड़े और सुनियोजित नेटवर्क का अंदाजा लगाया जा रहा है। पूरा मामला उस वक्त उजागर हुआ जब वसंत कुंज की रहने वाली 42 वर्षीय महिला ने साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता को व्हाट्सएप के माध्यम से शेयर मार्केट में निवेश का ऑफर दिया गया और सुरक्षित निवेश व गारंटीड रिटर्न का झांसा देकर उससे 15 लाख 58 हजार रुपये की ठगी कर ली गई। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जिन व्हाट्सएप नंबरों से पीड़िता से संपर्क किया गया था, वे विदेश से संचालित हो रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर पुलिस स्टेशन साउथ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट में एक विशेष टीम का गठन किया गया। इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में टीम ने डिजिटल फॉरेंसिक, बैंकिंग लेन-देन के विश्लेषण और तकनीकी सर्विलांस की मदद से पूरे नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कीं।

लगातार की गई तकनीकी जांच और इनपुट्स के आधार पर पुलिस ने तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में एक के बाद एक छापेमारी कर गिरोह के सदस्यों को दबोचा। तेलंगाना से म्यूल अकाउंट सप्लायर वनापतला सुनील और शंकर को गिरफ्तार किया गया, जो फर्जी खातों के जरिए ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर करने का काम करते थे। उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर, बनारस और बरेली से गिरोह के अन्य सदस्यों को पकड़ा गया, जबकि राजस्थान के कोटा से एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया गया जो टेलीग्राम के माध्यम से विदेशी हैंडलर्स को बैंक अकाउंट उपलब्ध कराता था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े विदेशी मास्टरमाइंड्स और ठगी की कुल रकम का पता लगाने में जुटी है और आगे और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।

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