Himanshu Bhau Syndicate: हिमांशु भाऊ सिंडिकेट के चार गुर्गे कोटा से गिरफ्तार, हत्या और ताबड़तोड़ फायरिंग के कई मामलों में थे वांटेड
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की काउंटर-इंटेलिजेंस टीम ने हिमांशु भाऊ सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान के कोटा से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में दो कथित शूटर और उनके दो सहयोगी शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि दोनों शूटर हत्या, जानलेवा हमला और ताबड़तोड़ फायरिंग की कई वारदातों में वांटेड थे और लंबे समय से अलग-अलग राज्यों की पुलिस उनकी तलाश कर रही थी।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रमन उर्फ फौजी (19), करण (22), शेखर तिवारी (23) और विनोद तिवारी (30) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार रमन और करण हिमांशु भाऊ सिंडिकेट से जुड़े कथित शूटर हैं, जबकि शेखर और विनोद पर दोनों फरार आरोपियों को छिपने के लिए ठिकाना उपलब्ध कराने और उनकी अन्य तरीकों से मदद करने का आरोप है।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक रमन उर्फ फौजी और करण के खिलाफ दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न स्थानों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। दोनों पर हत्या और फायरिंग की कई सनसनीखेज वारदातों में शामिल होने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी दिसंबर 2025 में दक्षिण दिल्ली के आया नगर इलाके में डेयरी कारोबारी रतन की हत्या के मामले में वांटेड थे। आरोप है कि इस वारदात के दौरान हमलावरों ने 70 से अधिक राउंड फायरिंग की थी। घटना के बाद से जांच एजेंसियां इसमें शामिल आरोपियों की तलाश कर रही थीं।
इसके अलावा अगस्त 2025 में दिल्ली के द्वारका मोड़ इलाके में मोहित डागर की हत्या के मामले में भी रमन और करण की तलाश की जा रही थी। पुलिस के मुताबिक इस वारदात के दौरान भी हमलावरों ने 20 से अधिक राउंड गोलियां चलाई थीं।
जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों कथित शूटरों का नाम दिसंबर 2025 में हरियाणा के रोहतक स्थित रिटोली गांव में हुई एक अन्य वारदात से भी जुड़ा है। पुलिस का दावा है कि इस दौरान हिमांशु भाऊ के प्रतिद्वंद्वी बताए जाने वाले सनी रिटोली को निशाना बनाकर जानलेवा हमला किया गया था।
पुलिस के मुताबिक रिटोली में हुए हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए थे। वारदात के बाद जांच के दौरान रमन और करण की कथित भूमिका सामने आने पर पुलिस ने उनकी तलाश तेज कर दी थी।
इसके बाद मई 2026 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के ककोड़ क्षेत्र में हुई फायरिंग की एक अन्य घटना में भी दोनों की कथित भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार इस वारदात में गैंगस्टर नीरज फरीदपुरिया के प्रतिद्वंद्वी बताए जाने वाले जितेंद्र उर्फ जीतू को निशाना बनाया गया था।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस वारदात की योजना किसने बनाई थी और गिरफ्तार आरोपियों की इसमें क्या भूमिका थी। इसके साथ ही वारदात में शामिल अन्य लोगों की पहचान और सिंडिकेट से उनके संबंधों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक करण का आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला गया है। उसके खिलाफ मई 2024 में हरियाणा के रेवाड़ी स्थित मोहल्ला कुतुबपुर में एक व्यक्ति के घर पर फायरिंग करने का मामला दर्ज होने की बात कही गई है।
इसके अलावा दिसंबर 2024 में पलवल के महेशपुर गांव के सरपंच पर हुए हमले के मामले में भी करण का नाम सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस के अनुसार इस हमले में ऑटोमेटिक कार्बाइन का इस्तेमाल किया गया था।
वहीं रमन उर्फ फौजी के खिलाफ दिल्ली क्राइम ब्रांच में आर्म्स एक्ट के तहत भी एक मामला दर्ज बताया गया है। पुलिस उसके पुराने रिकॉर्ड और अन्य आपराधिक मामलों में संभावित संलिप्तता की जानकारी जुटा रही है।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक रमन और करण दोनों इनामी अपराधी हैं। अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों के कारण कई पुलिस टीमें उनकी तलाश कर रही थीं। फरारी के दौरान दोनों लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे ताकि जांच एजेंसियों से बच सकें।
इसी बीच दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की काउंटर-इंटेलिजेंस टीम को दोनों के राजस्थान के कोटा में छिपे होने से संबंधित जानकारी मिली। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए दोनों कथित शूटरों को उनके दो सहयोगियों के साथ गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने रमन और करण के अलावा शेखर तिवारी तथा विनोद तिवारी को भी गिरफ्तार किया है। दोनों आपस में भाई बताए गए हैं। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने फरार शूटरों को ठहरने के लिए सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराया था।
जांच में शेखर और विनोद की आर्थिक भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस का आरोप है कि दोनों कथित तौर पर मनी म्यूल के रूप में काम कर रहे थे। जांच एजेंसियां अब उनके बैंक खातों और संदिग्ध आर्थिक लेनदेन से जुड़ी जानकारी की जांच कर सकती हैं, ताकि सिंडिकेट के वित्तीय नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फरारी के दौरान रमन और करण को आर्थिक मदद कहां से मिल रही थी और उनके रहने, यात्रा तथा अन्य खर्चों का इंतजाम कौन कर रहा था। इस संबंध में गिरफ्तार सहयोगियों से भी पूछताछ की जा रही है।
चारों आरोपियों को गिरफ्तारी के बाद संबंधित अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेज दिया है। स्पेशल सेल अब आरोपियों से विस्तृत पूछताछ कर रही है।
पूछताछ का मुख्य उद्देश्य हिमांशु भाऊ सिंडिकेट के अन्य सदस्यों और सहयोगियों की पहचान करना है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि गिरफ्तार कथित शूटर किन लोगों के सीधे संपर्क में थे और उन्हें वारदातों को अंजाम देने के निर्देश किस माध्यम से दिए जाते थे।
इसके साथ ही सिंडिकेट के हथियारों के नेटवर्क को लेकर भी जानकारी जुटाई जा रही है। हत्या और फायरिंग की जिन वारदातों में आरोपियों की कथित भूमिका बताई गई है, उनमें बड़ी संख्या में गोलियां चलाए जाने और अत्याधुनिक हथियारों के इस्तेमाल के आरोप सामने आए हैं।
ऐसे में पुलिस के सामने यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण है कि गिरोह को हथियार और गोला-बारूद कहां से उपलब्ध कराया जाता था। इसके अलावा वारदात के बाद आरोपियों को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने वाले लोगों की पहचान भी जांच के दायरे में है।
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल अब गिरफ्तार आरोपियों से अलग-अलग मामलों को लेकर पूछताछ कर रही है। दिल्ली के आया नगर और द्वारका मोड़ की हत्याओं से लेकर हरियाणा के रोहतक, रेवाड़ी और पलवल तथा उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की वारदातों तक आरोपियों की कथित भूमिका की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ और जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर अन्य मामलों में भी आरोपियों की भूमिका स्पष्ट की जाएगी। इसके साथ हिमांशु भाऊ सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों और उसके कथित नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास जारी है।
फिलहाल कोटा से चार आरोपियों की गिरफ्तारी को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल हिमांशु भाऊ सिंडिकेट के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई के रूप में देख रही है। रमन उर्फ फौजी और करण पर लगे गंभीर आरोपों की संबंधित मामलों में जांच जारी है, जबकि शेखर और विनोद की कथित मदद तथा वित्तीय भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।



