Delhi Bus Drivers Strike: दिल्ली में बस ड्राइवरों की हड़ताल से मुफ्त बस सेवा प्रभावित, महिला यात्रियों को उठानी पड़ी परेशानी
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बस ड्राइवरों की हड़ताल का असर बुधवार को सड़कों पर साफ दिखाई दिया। ड्राइवरों के काम रोकने के कारण कई बसें अलग-अलग इलाकों में सड़क किनारे खड़ी नजर आईं, जिससे रोजाना सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसका असर खास तौर पर उन महिला यात्रियों पर देखने को मिला, जो दिल्ली की मुफ्त बस यात्रा सुविधा का इस्तेमाल करती हैं। बसें नहीं मिलने के कारण कई महिलाओं को छोटी दूरी के लिए भी ऑटो और दूसरे निजी परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ा।
हड़ताल कर रहे ड्राइवरों ने “एक काम, एक समान वेतन” समेत कई मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। ड्राइवरों का कहना है कि वे लंबे समय से वेतन और सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को उठा रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों का समाधान नहीं होने के कारण उन्हें काम रोककर विरोध करने का फैसला लेना पड़ा।
ड्राइवरों के मुताबिक, कुछ बसें निर्धारित समय पर डिपो से बाहर निकली थीं, लेकिन हड़ताल के चलते बाद में कई स्थानों पर बसों को सड़क किनारे खड़ा कर दिया गया। इस दौरान ड्राइवरों ने नारेबाजी करते हुए वेतन बढ़ोतरी और अन्य सुविधाओं की मांग उठाई। प्रदर्शनकारी ड्राइवरों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं पर ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रह सकता है।
हड़ताली ड्राइवरों की सबसे प्रमुख मांग वेतन बढ़ोतरी की है। ड्राइवरों के मुताबिक, उन्हें फिलहाल करीब 862 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाता है। उनका दावा है कि पूरे महीने काम करने पर ही उन्हें काम किए गए सभी दिनों का भुगतान मिलता है और छुट्टी लेने की स्थिति में उस दिन की रकम काट ली जाती है। ड्राइवर मौजूदा दैनिक भुगतान को बढ़ाकर करीब 1,500 रुपये करने की मांग कर रहे हैं।
ड्राइवरों का कहना है कि दिल्ली जैसे शहर में मौजूदा दैनिक भुगतान के आधार पर परिवार का खर्च चलाना मुश्किल होता जा रहा है। महंगाई बढ़ने के साथ मकान का किराया, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों पर होने वाला खर्च भी बढ़ा है। ऐसे में ड्राइवर चाहते हैं कि उनकी जिम्मेदारी और काम की प्रकृति को देखते हुए वेतन में बढ़ोतरी की जाए।
वेतन के अलावा प्रदर्शनकारी ड्राइवरों ने काम के दौरान मिलने वाली सुविधाओं को लेकर भी कई सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि उन्हें वर्दी, पर्याप्त मेडिकल सुविधा और नियमित छुट्टियों जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। ड्राइवरों ने महीने में कम से कम चार छुट्टियां दिए जाने की मांग भी रखी है।
बसों को होने वाले नुकसान की भरपाई को लेकर भी ड्राइवरों में नाराजगी है। उनका आरोप है कि ड्यूटी के दौरान यदि बस का शीशा टूट जाए, वाहन पर खरोंच आ जाए या किसी अन्य कारण से बस को नुकसान पहुंचे तो कई मामलों में इसकी रकम ड्राइवर से वसूल की जाती है। प्रदर्शनकारी ड्राइवर इस व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं।
ड्राइवरों ने स्थायी और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के बीच वेतन तथा सुविधाओं के अंतर का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि वे भी सड़कों पर बस चलाने की वही जिम्मेदारी निभाते हैं और लंबे समय तक ड्यूटी करते हैं। ऐसे में समान प्रकृति के काम के बावजूद वेतन और सुविधाओं में बड़ा अंतर नहीं होना चाहिए। इसी को लेकर प्रदर्शन में “एक काम, एक समान वेतन” की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
दूसरी तरफ हड़ताल का सीधा असर यात्रियों पर पड़ा। सामान्य दिनों में जिन यात्रियों को बस से 10 से 15 मिनट में अपने गंतव्य तक पहुंचने की उम्मीद रहती है, उन्हें बस स्टॉप पर काफी समय तक इंतजार करना पड़ा। कई स्थानों पर यात्रियों की भीड़ देखने को मिली। बस नहीं मिलने पर लोगों ने ऑटो, ई-रिक्शा और दूसरे निजी साधनों से अपनी यात्रा पूरी की।
महिला यात्रियों के लिए बस सेवा प्रभावित होना आर्थिक रूप से भी परेशानी का कारण बना। दिल्ली में महिलाओं के लिए उपलब्ध मुफ्त बस यात्रा सुविधा की वजह से बड़ी संख्या में महिलाएं अपने रोजमर्रा के सफर के लिए सार्वजनिक बसों पर निर्भर रहती हैं। कामकाजी महिलाओं के साथ घरेलू जरूरतों, पढ़ाई या अन्य कार्यों के लिए बाहर निकलने वाली महिलाओं को भी इस सुविधा से राहत मिलती है।
हड़ताल के दौरान बसों की उपलब्धता कम होने से कुछ महिला यात्रियों को छोटी दूरी के लिए भी निजी साधनों का इस्तेमाल करना पड़ा। यात्रियों के मुताबिक, जिन यात्राओं के लिए उन्हें सामान्य दिनों में बस से मुफ्त सफर की सुविधा मिल जाती है, उन्हीं के लिए उन्हें ऑटो या अन्य साधनों पर करीब 50 रुपये तक खर्च करने पड़े। इससे दैनिक यात्रा का खर्च अचानक बढ़ गया।
कई यात्रियों ने बस स्टॉप पर लंबे इंतजार और पर्याप्त बसें नहीं मिलने को लेकर परेशानी जताई। खासकर काम पर जाने और वापस लौटने वाले लोगों के लिए समय पर बस नहीं मिलना बड़ी समस्या बना। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में आई इस रुकावट का असर लोगों के समय के साथ उनकी जेब पर भी पड़ा।
एक तरफ ड्राइवर वेतन और सुविधाओं से जुड़ी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इसका असर रोजाना बसों से सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ रहा है। ड्राइवरों का कहना है कि वे यात्रियों को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन लंबे समय से समस्याओं का समाधान नहीं होने के कारण उनके सामने विरोध का रास्ता अपनाने की स्थिति बनी।
फिलहाल कई रूटों पर बस संचालन प्रभावित होने की बात सामने आई है। अब नजर सरकार, संबंधित बस संचालन एजेंसियों और प्रदर्शनकारी ड्राइवरों के बीच होने वाली बातचीत पर है। बातचीत से गतिरोध कब खत्म होगा और बसों का संचालन पूरी तरह सामान्य कब होगा, इसे लेकर यात्रियों को भी समाधान का इंतजार है। खास तौर पर मुफ्त बस सेवा पर निर्भर महिला यात्रियों के लिए बसों का नियमित संचालन बहाल होना महत्वपूर्ण है।



