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DTC Drivers Protest: दिल्ली में आज भी कॉन्ट्रेक्ट ड्राइवरों की हड़ताल, वेतन बढ़ोतरी और मेडिकल सुविधा की मांग

DTC Drivers Protest: दिल्ली में आज भी कॉन्ट्रेक्ट ड्राइवरों की हड़ताल, वेतन बढ़ोतरी और मेडिकल सुविधा की मांग

नई दिल्ली। दिल्ली में DTC की कॉन्ट्रेक्ट बसों के ड्राइवरों की हड़ताल बुधवार को भी जारी रही। वेतन बढ़ोतरी, मेडिकल सुविधा, ओवरटाइम भुगतान और काम से जुड़ी अन्य मांगों को लेकर बड़ी संख्या में कॉन्ट्रेक्ट ड्राइवर काम से दूर हैं। हड़ताली ड्राइवरों का दावा है कि बुधवार को राजधानी में करीब 600 बसों का संचालन प्रभावित हुआ और यदि उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में सड़कों से दूर रहने वाली बसों की संख्या और बढ़ सकती है।

कॉन्ट्रेक्ट ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें फिलहाल करीब 862 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाता है। उनकी प्रमुख मांग दैनिक वेतन को बढ़ाकर 1,500 रुपये करने की है। ड्राइवरों का आरोप है कि कई कर्मचारी 10 से 15 वर्षों से बस चला रहे हैं और उनके पास लंबा अनुभव है, इसके बावजूद उन्हें कुशल श्रमिकों के अनुरूप वेतन नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि इतने वर्षों तक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में काम करने के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

हड़ताली ड्राइवरों ने वेतन के अलावा मेडिकल सुविधा का मुद्दा भी उठाया है। उनका आरोप है कि उन्हें पर्याप्त मेडिकल और ECS जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। ड्राइवरों का कहना है कि सड़क पर बस चलाने के दौरान उन्हें लगातार कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है, इसलिए कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए उचित चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था होनी चाहिए।

ओवरटाइम भुगतान भी हड़ताल की प्रमुख मांगों में शामिल है। ड्राइवरों का आरोप है कि निर्धारित आठ घंटे की ड्यूटी के बजाय कई बार उनसे 10 से 11 घंटे तक काम कराया जाता है, लेकिन अतिरिक्त काम के बदले उन्हें उचित ओवरटाइम नहीं मिलता। ड्राइवरों का कहना है कि लंबी ड्यूटी के कारण शारीरिक और मानसिक दबाव भी बढ़ता है, जबकि इसके अनुरूप उन्हें आर्थिक लाभ नहीं दिया जाता।

हड़ताली कर्मचारियों ने बस को होने वाले नुकसान के बदले वेतन से कटौती किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। ड्राइवरों का आरोप है कि सड़क पर बस चलाते समय यदि किसी अन्य वाहन से मामूली टक्कर हो जाए या बस को किसी तरह का नुकसान पहुंच जाए तो कई मामलों में हर्जाने की रकम उनकी सैलरी से काट ली जाती है। ड्राइवर इस व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं।

प्रदर्शन कर रहे कॉन्ट्रेक्ट ड्राइवरों ने स्थायी DTC ड्राइवरों के वेतन से तुलना करते हुए भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि इसी तरह का काम करने वाले स्थायी ड्राइवरों को करीब 50 से 60 हजार रुपये या उससे अधिक मासिक वेतन मिलता है, जबकि कॉन्ट्रेक्ट पर काम करने वाले ड्राइवरों को दैनिक भुगतान के आधार पर काफी कम रकम मिलती है। हालांकि स्थायी कर्मचारियों के वेतन और अन्य आंकड़ों को लेकर यह तुलना हड़ताली ड्राइवरों की ओर से किया गया दावा है।

ड्राइवरों के मुताबिक, मौजूदा दैनिक वेतन में दिल्ली जैसे शहर में परिवार का खर्च चलाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। उनका कहना है कि बच्चों की स्कूल फीस, मकान का किराया, राशन और रोजमर्रा की दूसरी जरूरतों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ा है। ऐसे में करीब 862 रुपये प्रतिदिन के भुगतान में परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करना कठिन हो रहा है।

हड़ताली ड्राइवरों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर बस ऑपरेटर्स और डिपो अधिकारियों के सामने कई बार मुद्दे उठाए। बातचीत के बावजूद कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकलने पर मंगलवार से हड़ताल शुरू करने का फैसला लिया गया। ड्राइवरों के मुताबिक, हड़ताल शुरू होने के बाद इसका असर धीरे-धीरे अलग-अलग डिपो तक पहुंचा।

मंगलवार सुबह कुछ डिपो से कॉन्ट्रेक्ट बसें अपनी निर्धारित शिफ्ट के अनुसार सड़कों पर निकली थीं। ड्राइवरों का कहना है कि दोपहर तक हड़ताल की सूचना अलग-अलग डिपो में पहुंचने के बाद कई और ड्राइवर काम से दूर हो गए। इसके चलते विभिन्न रूटों पर बसों का संचालन प्रभावित होने लगा।

बुराड़ी और मयूर विहार फेज-3 समेत कई इलाकों में कॉन्ट्रेक्ट बसों की कतारें खड़ी दिखाई देने का दावा किया गया। बसों का संचालन प्रभावित होने से यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ स्थानों पर यात्रियों को बीच रास्ते में बस से उतरकर आगे की यात्रा के लिए दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ा। नौकरी और दूसरे जरूरी कामों के लिए निकलने वाले लोगों को भी देरी का सामना करना पड़ा।

ड्राइवरों का कहना है कि उनका उद्देश्य यात्रियों को परेशान करना नहीं है। उनके मुताबिक, वे लंबे समय से अपनी मांगों को संबंधित अधिकारियों और ऑपरेटर्स के सामने रखते रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं निकलने के कारण हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। हड़ताली ड्राइवरों ने कहा है कि उनकी मांगों पर ठोस फैसला होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।

DTC कर्मचारी एकता यूनियन के अध्यक्ष ललित चौधरी ने भी हड़ताली कॉन्ट्रेक्ट ड्राइवरों का समर्थन किया है। उनका कहना है कि बस चलाने वाले ड्राइवर कुशल और तकनीकी रूप से दक्ष कर्मचारी हैं, लेकिन कॉन्ट्रेक्ट व्यवस्था में उन्हें उनके कौशल और जिम्मेदारी के अनुरूप वेतन नहीं मिल रहा है। उनके मुताबिक, यूनियन की ओर से भी पहले कई बार ड्राइवरों की मांगों को उठाया जा चुका है और मौजूदा आंदोलन में यूनियन हड़ताली ड्राइवरों के साथ है।

इसी बीच हर्ष विहार टर्मिनल से एक अलग घटना की जानकारी भी सामने आई है। ड्राइवरों के मुताबिक, डिपो की ओर से एक बस को प्वाइंट से निर्धारित रूट पर ले जाने के लिए कहा गया था। इसी दौरान कुछ अज्ञात लोगों ने कथित तौर पर बस का शीशा तोड़ दिया। घटना को लेकर ड्राइवरों ने नाराजगी जताई है। हालांकि शीशा तोड़ने वाले लोगों की पहचान और घटना के वास्तविक कारण की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

हड़ताल जारी रहने की स्थिति में दिल्ली की सार्वजनिक बस सेवा पर इसका असर बढ़ सकता है। फिलहाल हड़ताली ड्राइवर अपनी मांगों पर फैसला होने का इंतजार कर रहे हैं। अब DTC प्रशासन, संबंधित बस ऑपरेटर्स और सरकार की ओर से वेतन, मेडिकल सुविधा, ओवरटाइम और अन्य मांगों को लेकर क्या कदम उठाया जाता है, इस पर ड्राइवरों के साथ-साथ रोजाना बसों से सफर करने वाले यात्रियों की भी नजर बनी हुई है।

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