LBS Hospital Protest: अस्पताल में अव्यवस्थाओं के आरोप, मेडिकल सुपरीटेंडेंट के ऑफिस के बाहर धरने पर बैठे अनिल चौधरी
नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के लाल बहादुर शास्त्री (LBS) अस्पताल में मरीजों को कथित तौर पर हो रही परेशानियों और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर दिल्ली कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक अनिल चौधरी ने विरोध शुरू कर दिया है। अनिल चौधरी अस्पताल के मेडिकल सुपरीटेंडेंट के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को दवाइयों के साथ अब कॉटन और मास्क जैसी जरूरी मेडिकल सामग्री भी बाहर से लाने के लिए कहा जा रहा है। इन आरोपों पर अस्पताल प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।
अनिल चौधरी का कहना है कि वह पिछले दो दिनों से अस्पताल के मेडिकल सुपरीटेंडेंट से मुलाकात करने का प्रयास कर रहे थे। उनका उद्देश्य अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों से जुड़ी समस्याओं और व्यवस्थाओं को लेकर बातचीत करना था। उन्होंने दावा किया कि लगातार प्रयास के बावजूद मेडिकल सुपरीटेंडेंट से मुलाकात नहीं हो सकी, जिसके बाद उन्होंने उनके कार्यालय के बाहर धरने पर बैठने का फैसला किया।
अनिल चौधरी ने कहा कि जब तक मेडिकल सुपरीटेंडेंट उनसे मुलाकात नहीं करते और मरीजों से जुड़ी समस्याओं पर बातचीत नहीं होती, तब तक वह धरना जारी रखेंगे। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को इलाज के दौरान जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी है और यदि किसी स्तर पर परेशानी है तो उसका समाधान किया जाना चाहिए।
धरने के दौरान अनिल चौधरी ने अस्पताल में दवाइयों और मेडिकल सामग्री की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले मरीजों को बाहर से दवाइयां खरीदने के लिए कहे जाने की शिकायतें सामने आती थीं, लेकिन अब कॉटन और मास्क जैसी बुनियादी मेडिकल सामग्री भी बाहर से मंगाए जाने की शिकायत मिल रही है।
उन्होंने अस्पताल में मरीजों को दी जाने वाली पर्चियों को लेकर भी सवाल उठाए। अनिल चौधरी का दावा है कि मरीजों को दी जाने वाली कुछ पर्चियों के नीचे ‘NA’ यानी ‘Not Applicable’ लिखा होता है। उन्होंने इस व्यवस्था को लेकर सवाल करते हुए कहा कि सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि उन्हें कौन-कौन सी सुविधाएं अस्पताल से उपलब्ध कराई जाएंगी।
अनिल चौधरी ने गर्भवती महिलाओं और ऑपरेशन कराने वाले मरीजों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी गर्भवती महिला का ऑपरेशन होना हो और उस दौरान मास्क, कॉटन या दूसरी आवश्यक मेडिकल सामग्री की जरूरत पड़े तो उसकी व्यवस्था कौन करेगा। उनका कहना है कि अस्पताल आने वाला मरीज पहले ही बीमारी और इलाज की चिंता में रहता है, ऐसे में मेडिकल सामान के लिए उसे या उसके तीमारदारों को बाहर भेजा जाना अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकता है।
अस्पताल में कथित तौर पर सक्रिय दलालों को लेकर भी अनिल चौधरी ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सामान्य प्रक्रिया से ऑपरेशन कराने वाले मरीजों को कई बार काफी आगे की तारीख मिलती है, जबकि कथित बिचौलियों के माध्यम से जल्दी तारीख और विशेष सुविधा उपलब्ध कराने जैसी बातें सामने आती हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।
अनिल चौधरी ने मांग की कि अस्पताल प्रशासन इन आरोपों की जांच करे और यदि किसी स्तर पर बिचौलियों या दलालों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज की व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए और प्रत्येक मरीज को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुविधाएं मिलनी चाहिए।
धरने के दौरान उन्होंने दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी राजनीतिक सवाल उठाए। कांग्रेस शासन के समय की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने दावा किया कि उस दौरान मरीजों को इस तरह जरूरी सुविधाओं के लिए परेशान होकर इधर-उधर नहीं भटकना पड़ता था। यह उनका राजनीतिक दावा है और मौजूदा अस्पताल व्यवस्था से इसकी स्वतंत्र तुलना की पुष्टि नहीं हुई है।
अनिल चौधरी ने मेडिकल सुपरीटेंडेंट की अस्पताल में अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक, मेडिकल सुपरीटेंडेंट एक ब्लड कैंप में गए हुए थे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रम के तहत आयोजन किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि अस्पताल में मरीजों की समस्याओं का समाधान प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। इस संबंध में मेडिकल सुपरीटेंडेंट या अस्पताल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है।
अनिल चौधरी का कहना है कि उनका धरना मरीजों को अस्पताल में बेहतर सुविधाएं दिलाने और कथित समस्याओं को प्रशासन के सामने रखने के उद्देश्य से है। उन्होंने दोहराया कि मेडिकल सुपरीटेंडेंट से मुलाकात और मरीजों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होने तक वह अपना विरोध जारी रखेंगे।
फिलहाल पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन के आधिकारिक जवाब का इंतजार है। दवाइयां, कॉटन और मास्क बाहर से मंगाए जाने तथा अस्पताल में कथित बिचौलियों की सक्रियता से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन का पक्ष और इन आरोपों पर होने वाली किसी जांच के नतीजे महत्वपूर्ण होंगे।



