Electric Bus Drivers Strike: दिल्ली में तीसरे दिन भी इलेक्ट्रिक बस ड्राइवरों की हड़ताल, गाजीपुर डिपो के बाहर प्रदर्शन; ₹1500 दैनिक वेतन की मांग
नई दिल्ली। दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों के ड्राइवरों की हड़ताल लगातार तीसरे दिन भी जारी रही। शुक्रवार को बड़ी संख्या में ड्राइवर गाजीपुर बस डिपो के बाहर एकत्र हुए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। हड़ताल कर रहे ड्राइवरों का कहना है कि जब तक वेतन और अन्य मांगों को लेकर कोई समाधान नहीं निकलता, तब तक उनकी अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।
प्रदर्शनकारी ड्राइवरों की प्रमुख मांग दैनिक वेतन बढ़ाने की है। ड्राइवरों के मुताबिक, फिलहाल उन्हें करीब 862 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। उनका कहना है कि मौजूदा महंगाई और काम की जिम्मेदारियों को देखते हुए यह राशि पर्याप्त नहीं है। ड्राइवर दैनिक भुगतान बढ़ाकर करीब 1500 रुपये करने की मांग कर रहे हैं।
गाजीपुर डिपो के बाहर प्रदर्शन कर रहे ड्राइवरों ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं और मांगों को संबंधित अधिकारियों के सामने उठा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उनका दावा है कि समस्याएं लेकर सरकारी अधिकारियों के पास जाने पर उन्हें बताया गया कि वे सीधे सरकार के कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि ठेकेदार के माध्यम से काम कर रहे हैं।
ड्राइवरों के मुताबिक, उन्हें अपनी मांगों के संबंध में संबंधित ठेकेदार या एजेंसी से बातचीत करने के लिए कहा गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बस सेवा सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का हिस्सा है, इसलिए उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार और संबंधित एजेंसियों को भी आगे आना चाहिए।
प्रदर्शन में शामिल एक ड्राइवर ने कहा कि वे अपनी दैनिक मजदूरी 862 रुपये से बढ़ाकर करीब 1500 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। ड्राइवरों का कहना है कि मांगों पर संतोषजनक फैसला होने तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।
लगातार तीसरे दिन हड़ताल जारी रहने से इलेक्ट्रिक बसों के संचालन पर भी असर पड़ा है। दिल्ली के विभिन्न रूटों पर इलेक्ट्रिक बसों की उपलब्धता प्रभावित होने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नियमित रूप से इन बसों का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को दूसरी बसों, मेट्रो, ऑटो और ई-रिक्शा जैसे वैकल्पिक साधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
बस सेवा को सामान्य बनाए रखने के लिए DTC की ओर से अपने नियमित ड्राइवरों के माध्यम से इलेक्ट्रिक बसों को सड़कों पर उतारने की व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई है। डिपो में खड़ी बसों को उन रूटों पर चलाने का प्रयास किया जा रहा है, जहां हड़ताल के कारण यात्रियों को बसों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि, हड़ताल कर रहे इलेक्ट्रिक बस ड्राइवरों ने इस व्यवस्था को लेकर सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि ऑटोमेटिक इलेक्ट्रिक बसों की तकनीक पारंपरिक बसों से अलग है और इन्हें चलाने से पहले विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।
ड्राइवरों के मुताबिक, इलेक्ट्रिक बसों को चलाने के लिए उन्हें करीब तीन दिन का प्रशिक्षण दिया गया था। उनका दावा है कि पर्याप्त प्रशिक्षण और इलेक्ट्रिक बस चलाने का अनुभव नहीं रखने वाले ड्राइवरों से इन बसों का संचालन कराना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है।
प्रदर्शनकारी ड्राइवरों ने यह भी दावा किया कि गुरुवार को इलेक्ट्रिक बसों से जुड़े दो हादसे हुए। हालांकि, इन कथित हादसों की संख्या, परिस्थितियों और उनके कारणों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में हादसों को हड़ताल के दौरान अपनाई गई वैकल्पिक व्यवस्था से सीधे जोड़ना फिलहाल उचित नहीं होगा।
ड्राइवरों का कहना है कि इलेक्ट्रिक बसों में ऑटोमेटिक सिस्टम सहित कई तकनीकी विशेषताएं होती हैं और इन्हें सुरक्षित तरीके से संचालित करने के लिए संबंधित सिस्टम की जानकारी जरूरी है। उन्होंने मांग की कि यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए केवल पर्याप्त प्रशिक्षण प्राप्त ड्राइवरों से ही बसों का संचालन कराया जाए।
दूसरी तरफ हड़ताल लंबी खिंचने के कारण यात्रियों की परेशानी बढ़ने की आशंका है। इलेक्ट्रिक बसें दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं और बड़ी संख्या में यात्री रोजाना इनका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में बसों के डिपो में खड़े रहने से विभिन्न रूटों पर दबाव बढ़ सकता है।
प्रदर्शनकारी ड्राइवरों ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन फिलहाल समाप्त नहीं होगा। वे दैनिक वेतन बढ़ाने के साथ अपनी अन्य समस्याओं का समाधान चाहते हैं और इसके लिए सरकार, DTC तथा संबंधित निजी एजेंसियों के बीच बातचीत की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल गाजीपुर बस डिपो के बाहर ड्राइवरों का प्रदर्शन जारी है। एक तरफ हड़ताली ड्राइवर अपनी मांगों पर अड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रभावित बस सेवा को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अब आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि ड्राइवरों, संबंधित एजेंसियों और परिवहन व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों के बीच बातचीत से क्या समाधान निकलता है।



