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Yuvraj Murder Case: युवराज हत्याकांड में पैसों के लेन-देन का एंगल, गर्दन में दो गोलियां मारने का आरोप; कार में शव लेकर घूमते रहे आरोपी

Yuvraj Murder Case: युवराज हत्याकांड में पैसों के लेन-देन का एंगल, गर्दन में दो गोलियां मारने का आरोप; कार में शव लेकर घूमते रहे आरोपी

नई दिल्ली। दिल्ली के सरिता विहार निवासी 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा की हत्या के मामले में पुलिस जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में हत्या के पीछे पैसों के लेन-देन से जुड़ा विवाद होने की आशंका जताई जा रही है। मामले में युवराज की पूर्व सहकर्मी अन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा को गिरफ्तार किया गया है। दोनों फिलहाल पांच दिन की पुलिस कस्टडी में हैं।

युवराज गुरुग्राम के सेक्टर-29 स्थित एक रियल एस्टेट कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत था। परिवार के मुताबिक, इसी साल उसकी शादी होने वाली थी। 6 सितंबर को वह अपनी बहन हरसिमरन मनचंदा के साथ दिल्ली के लाजपत नगर स्थित सेंट्रल मार्केट में शादी की खरीदारी करने गया था।

खरीदारी के बाद भाई-बहन लाजपत नगर-2 के एक रेस्टोरेंट पहुंचे। शाम करीब चार बजे युवराज ने अपनी बहन को बताया कि उसे गुरुग्राम में किसी से मिलने जाना है और वह रात करीब 10 बजे तक घर वापस लौट आएगा। इसके बाद युवराज अपनी कार लेकर गुरुग्राम के लिए निकल गया।

पुलिस जांच में सामने आया कि गुरुग्राम में युवराज की मुलाकात उसकी पूर्व ऑफिस सहयोगी अन्या वत्स से हुई। दोनों एक मॉल के बाहर मिले और इसके बाद युवराज अपनी गाड़ी छोड़कर अन्या की क्रेटा कार में बैठ गया। पुलिस के मुताबिक, युवराज और अन्या के बीच पहले से कथित वित्तीय लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था।

पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, मुलाकात के दौरान पैसों को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई। आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद युवराज की गर्दन में दो गोलियां मारी गईं, जिससे उसकी मौत हो गई। हालांकि हत्या के पूरे घटनाक्रम और दोनों आरोपियों की अलग-अलग भूमिका की जांच अभी जारी है।

युवराज की हत्या के बाद शव को क्रेटा कार में ही रखे जाने की बात सामने आई है। पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर शव को ठिकाने लगाने के लिए जगह तलाशते हुए गुरुग्राम में घूमते रहे। युवराज का शव करीब दो दिन तक कार में रखे जाने की बात भी जांच में सामने आई है।

इसके बाद शव को गुरुग्राम के बादशाहपुर इलाके में एक नाले में फेंक दिया गया। 10 सितंबर को गुरुग्राम पुलिस ने नाले से एक अज्ञात युवक का शव बरामद किया था। उस समय शव की पहचान नहीं हो सकी थी। बाद में दिल्ली पुलिस ने तस्वीरें हासिल कर युवराज के परिवार को दिखाईं, जिसके बाद परिवार ने उसकी पहचान युवराज सिंह मनचंदा के रूप में की।

उधर, युवराज के घर नहीं लौटने के बाद परिवार लगातार उसकी तलाश कर रहा था। उसका मोबाइल फोन भी बंद आ रहा था। कोई जानकारी नहीं मिलने पर उसकी बहन ने 11 सितंबर को लाजपत नगर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू की।

पुलिस ने युवराज के मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी डेटा की जांच की। इसमें सामने आया कि युवराज की आखिरी बातचीत अन्या वत्स से हुई थी। परिवार ने भी पुलिस को बताया कि युवराज गुरुग्राम में अन्या से मिलने जाने की बात कहकर निकला था।

पुलिस ने अन्या की तलाश शुरू की तो उसका मोबाइल बंद मिला। इसके बाद युवराज और अन्या के पुराने कार्यालयों से जुड़े लोगों से पूछताछ की गई और CCTV फुटेज सहित दूसरे तकनीकी साक्ष्य खंगाले गए। इसी दौरान जांच टीम को पता चला कि अन्या कथित तौर पर एक नए मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर रही है।

नए नंबर की लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड की जांच करते हुए पुलिस उत्तराखंड तक पहुंची। पुलिस के मुताबिक, युवराज का शव ठिकाने लगाने के बाद अन्या वत्स और संयम सचदेवा उत्तराखंड चले गए थे और कैंची धाम के पास एक पीजी गेस्ट हाउस में ठहरे हुए थे। दिल्ली पुलिस की टीम ने वहां पहुंचकर दोनों को पकड़ लिया।

दोनों आरोपियों को दिल्ली लाने के बाद अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया। पुलिस अब उनसे पूछताछ कर हत्या से पहले और बाद के पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है।

जांच का एक प्रमुख पहलू युवराज और अन्या के बीच कथित वित्तीय विवाद है। पुलिस अन्या के बैंक खाते में हुए लेन-देन की भी जांच कर रही है। जांच में खाते में आने वाली रकम और उसके बाद दूसरे खातों में किए गए ट्रांसफर की जानकारी खंगाली जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि युवराज और अन्या के बीच कितनी रकम को लेकर विवाद था।

पुलिस दोनों के पुराने पेशेवर संबंधों की भी जांच कर रही है। दोनों पहले एक ही रियल एस्टेट कंपनी में काम कर चुके थे। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या दोनों के कुछ कॉमन क्लाइंट थे और उनके बीच चल रहा कथित वित्तीय विवाद किसी साझा कारोबारी लेन-देन से जुड़ा था।

परिवार का आरोप है कि अन्या लगातार युवराज से संपर्क करती थी और 6 सितंबर को भी उसी ने उसे गुरुग्राम बुलाया था। पुलिस इस दावे का कॉल रिकॉर्ड और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों से मिलान कर रही है।

पुलिस के सामने अन्या वत्स से जुड़े पुराने मामलों की जानकारी भी आई है। उसके खिलाफ पहले ठगी से संबंधित मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। इनमें से एक मामला दिल्ली के संसद मार्ग थाने में दर्ज बताया गया है। हालांकि इन पुराने मामलों का युवराज की हत्या से कोई सीधा संबंध है या नहीं, इसकी जांच की जा रही है।

हत्या में इस्तेमाल हथियार और क्रेटा कार को लेकर भी पुलिस जांच आगे बढ़ा रही है। आरोपियों के बयानों को कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन, CCTV फुटेज और अन्य फोरेंसिक एवं तकनीकी साक्ष्यों से मिलाया जा रहा है।

पुलिस फिलहाल पैसों के विवाद को संभावित कारण मानकर जांच कर रही है, लेकिन हत्या का अंतिम मकसद और दोनों आरोपियों की व्यक्तिगत भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।

 

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