Delhi Cyber Crime: दिल्ली पुलिस ने साइबर ठगी के चार बड़े नेटवर्क का किया भंडाफोड़, 6 आरोपी गिरफ्तार, 1.59 करोड़ की धोखाधड़ी से जुड़ी 125 शिकायतें सामने आईं
दिल्ली पुलिस के आउटर नॉर्थ जिले की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने साइबर ठगी के खिलाफ चार अलग-अलग मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए म्यूल बैंक खातों, फर्जी सिम कार्ड और APK फाइल के जरिए की जाने वाली ऑनलाइन धोखाधड़ी के नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इन चार ऑपरेशनों में कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि चार बैंक खाताधारकों और एक डाकिये को पाबंद किया गया है। जांच के दौरान करीब 70 बैंक खाते साइबर अपराधियों तक पहुंचाने, वर्ष 2026 में कथित तौर पर 187 फर्जी सिम कार्ड जारी कराने और तीन बैंक खाते 20 हजार रुपये में बेचने का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, इन मामलों से जुड़ी कुल 125 NCRP शिकायतों में लगभग 1.59 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की जानकारी मिली है। इसके अलावा एक अन्य APK आधारित साइबर ठगी मॉड्यूल में करीब 3.73 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जांच की जा रही है।
पुलिस उपायुक्त आउटर नॉर्थ जिला शोभित डी. सक्सेना के मुताबिक, इन कार्रवाइयों का उद्देश्य साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल माध्यमों के नेटवर्क को तोड़ना था। जांच में सामने आया कि साइबर अपराधी आम लोगों को बीमा लाभ, नौकरी, सैलरी या अन्य आर्थिक फायदे का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद बैंक की किट, एटीएम कार्ड, चेकबुक और पासबुक अपने कब्जे में लेकर इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए करते थे। पुलिस अब इन खातों के जरिए हुए लेन-देन और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर रही है।
पहले मामले में साइबर क्राइम थाना आउटर नॉर्थ में 21 अक्टूबर 2026 को एफआईआर नंबर 39/2026 दर्ज की गई थी। जांच के दौरान राजू दत्त के नाम पर खुले एसबीआई बैंक खाते का संबंध चार साइबर अपराध शिकायतों से मिला। पूछताछ में उसने बताया कि देवेंद्र उर्फ सचिन और मोहित ने उसे बैंक खाता खुलवाने के लिए तैयार किया था। शाहबाद डेयरी इलाके के अन्य लोगों सोनू और सीमा से भी पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि उन्हें बीमा लाभ या पैसे मिलने का लालच देकर अपने दस्तावेज देने और बैंक खाते खुलवाने के लिए कहा गया था। एक खाताधारक ने पुलिस को बताया कि उसे न तो एटीएम किट मिली और न ही पासबुक, जबकि बाद में उसके खाते से हुए लेन-देन की जानकारी भी उसे नहीं थी।
जांच में इलाके के डाकिये पंकज की भूमिका भी सामने आई। पुलिस के अनुसार, उसने बताया कि आरोपी खाताधारकों के आधार कार्ड दिखाकर बैंक से संबंधित किट और दस्तावेज प्राप्त करते थे। तकनीकी निगरानी और स्थानीय जांच के आधार पर पुलिस टीम ने 24 अक्टूबर 2026 को देवेंद्र उर्फ सचिन को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान 19 वर्षीय देवेंद्र उर्फ सचिन के रूप में हुई है, जो मूल रूप से झारखंड के हजारीबाग का रहने वाला है और दिल्ली के बेगमपुर, रोहिणी में रह रहा था। पुलिस के मुताबिक, वह करीब दो साल पहले काम की तलाश में दिल्ली आया था और यहां उसकी मुलाकात मोहित से हुई थी। बाद में कथित तौर पर वह हैदराबाद में सक्रिय साइबर नेटवर्क के संपर्क में आया।
पुलिस के अनुसार, देवेंद्र और उसका साथी मोहित शाहबाद डेयरी के आसपास रहने वाले लोगों को बैंक खाते खुलवाने के लिए तैयार करते थे। खाते खुलने के बाद वे एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक और अन्य बैंकिंग दस्तावेज अपने पास रख लेते थे और इन्हें हैदराबाद से संचालित बताए जा रहे नेटवर्क तक पहुंचाते थे। इसके बाद साइबर ठगी से प्राप्त रकम इन खातों में जमा कराई जाती थी। आरोप है कि देवेंद्र और उसके साथी इस काम के बदले करीब 10 प्रतिशत कमीशन रखते थे और बाकी रकम कैश डिपॉजिट मशीनों के माध्यम से नेटवर्क के बताए खातों में जमा कराते थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों करीब एक साल से सक्रिय थे और शाहबाद डेयरी क्षेत्र में लगभग 70 बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों तक पहुंचा चुके थे।
देवेंद्र की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने पांच मोबाइल फोन, 10,030 रुपये नकद, दो बैंक पासबुक, सात चेकबुक, आठ एटीएम और डेबिट कार्ड तथा एक पीओएस से संबंधित मशीन या उपकरण बरामद किया। इसके अलावा आरोपी के कब्जे से एक यामाहा R15M मोटरसाइकिल भी जब्त की गई, जिसे पुलिस के अनुसार संदिग्ध अवैध गतिविधियों से प्राप्त रकम से खरीदे जाने की आशंका है। मोबाइल फोन की शुरुआती जांच में चैट और अन्य डिजिटल सामग्री मिली है, जिसकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। इस मामले में नौ NCRP शिकायतों का संबंध सामने आया है, जिनमें लगभग 14.51 लाख रुपये की संदिग्ध वित्तीय गतिविधियां शामिल हैं। सह-आरोपी मोहित फिलहाल दूसरे मामले में न्यायिक हिरासत में है और उसकी भूमिका की जांच जारी है।
दूसरे मामले में पुलिस ने फर्जी तरीके से सिम कार्ड जारी कराने और उन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचाने वाले नेटवर्क का खुलासा किया है। यह मामला दिल्ली के समयपुर बादली निवासी 43 वर्षीय अजय सुनील की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, 23 जुलाई 2026 को उसे बैंक और क्रेडिट कार्ड प्रतिनिधि बनकर कुछ लोगों ने वॉयस कॉल और व्हाट्सऐप कॉल की। आरोपियों ने क्रेडिट कार्ड को लाइफटाइम फ्री कराने और उसकी लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर एक लिंक के माध्यम से एप्लिकेशन डाउनलोड कराई। इसके बाद उसके मोबाइल पर आए ओटीपी का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया और क्रेडिट कार्ड से 1,11,996 रुपये की अनधिकृत खरीदारी या निकासी कर ली गई। एक अन्य 1,11,996 रुपये का ट्रांजेक्शन असफल रहा था। इस तरह वास्तविक नुकसान 1,11,996 रुपये बताया गया, जबकि NCRP शिकायत में कुल 2,23,992 रुपये की राशि दर्ज थी।
जांच में मोबाइल नंबर 8750026230 का संबंध विजय विहार निवासी पूनम के नाम से सामने आया। पूछताछ में पूनम ने बताया कि उसने एटुल नाम के डीलर से केवल एक वोडाफोन आइडिया सिम कार्ड लिया था और उसके नाम पर किसी अन्य सिम कार्ड के जारी होने की जानकारी उसे नहीं थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपी एटुल एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के सिम कार्ड बेचने का काम करता था। वह नए एयरटेल सिम के लिए आने वाले ग्राहक की तस्वीर दो बार खींचता था और पहली तस्वीर स्पष्ट नहीं होने का बहाना बनाता था। आरोप है कि ग्राहक के दस्तावेज और दूसरी तस्वीर का इस्तेमाल करके उसकी जानकारी या सहमति के बिना उसी नाम पर अतिरिक्त VI सिम कार्ड जारी करवा लिया जाता था। इन अतिरिक्त सिम कार्डों को बाद में आरोपी अपने पास रख लेता था।
पुलिस का आरोप है कि एटुल इन अतिरिक्त सिम कार्डों को समीर उर्फ सैम और पंकज को करीब 1,500 रुपये प्रति सिम के हिसाब से बेचता था। जांच में वर्ष 2026 के दौरान इस तरीके से लगभग 187 सिम कार्ड जारी कराए जाने की आशंका सामने आई है। तकनीकी जांच में एटुल, समीर और पंकज की लोकेशन कई बार एक ही समय पर आसपास पाई गई। पुलिस ने इस मामले में एटुल, समीर उर्फ सैम और पंकज को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। जांच के दौरान इस नेटवर्क से जुड़ी 114 NCRP शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें करीब 1.40 करोड़ रुपये की कुल रिपोर्टेड राशि शामिल है। पुलिस यह पता लगा रही है कि इन सिम कार्डों का इस्तेमाल किन-किन साइबर अपराधों में किया गया और अन्य ग्राहकों के नाम पर कितने अनधिकृत कनेक्शन जारी किए गए।
तीसरे मामले में पुलिस ने तीन बैंक खाते 20 हजार रुपये में बेचने के आरोप में सुमित नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। यह मामला शाहबाद दौलतपुर निवासी नीरज शर्मा की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने 28 जुलाई 2026 को टाटा पावर से नया बिजली कनेक्शन लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। इसके बाद एक व्यक्ति ने खुद को टाटा पावर का अधिकारी बताकर उससे संपर्क किया और एक वेब लिंक के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करने को कहा। शिकायतकर्ता ने फोन करने वाले को वास्तविक अधिकारी समझकर निर्देशों का पालन किया। आरोप है कि 10 अगस्त 2026 को उसके बैंक खाते से एक लाख रुपये और 15,800 रुपये की दो अनधिकृत निकासी हो गई। इसके बाद उसने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
जांच में एक लाख रुपये की रकम इंडियन ओवरसीज बैंक में सुमित के नाम पर खुले खाते में पहुंचने का पता चला। तकनीकी विश्लेषण और स्थानीय पूछताछ के आधार पर पुलिस ने सुमित को महावीर एन्क्लेव से ट्रेस किया और 23 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने कथित तौर पर बताया कि उसने अपने परिचित विक्की चौहान के कहने पर बैंक खाता खुलवाया था और बैंक किट तथा सिम कार्ड सहित पूरा खाता 20 हजार रुपये में उसे सौंप दिया था। आगे की जांच में सुमित के नाम पर यूको बैंक की जनकपुरी शाखा और पंजाब नेशनल बैंक की पालम शाखा में दो अन्य खाते भी सामने आए। पुलिस के अनुसार, इन दोनों खातों को भी विक्की चौहान को सौंपा गया था।
पंजाब नेशनल बैंक के खाते का संबंध एक अन्य साइबर ठगी मामले से भी मिला है, जिसमें 15 अगस्त 2026 को ई-एफआईआर नंबर 00130/2026 दर्ज की गई थी। पुलिस ने अब तक इन तीन खातों के आधार पर दो साइबर ठगी के मामलों का खुलासा किया है। इनसे जुड़ी दो NCRP शिकायतों में लगभग 4.5 लाख रुपये की संदिग्ध वित्तीय गतिविधियां सामने आई हैं। पुलिस अब विक्की चौहान की तलाश कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तीनों बैंक खातों के जरिए कितनी रकम का लेन-देन किया गया तथा इस नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं।
चौथे मामले में पुलिस ने APK फाइल के माध्यम से मोबाइल फोन और बैंकिंग जानकारी को निशाना बनाकर साइबर ठगी करने वाले नेटवर्क का खुलासा किया है। इस मामले में नगर निगम के एक इंस्पेक्टर से करीब 6.5 लाख रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत मिली थी। आरोप है कि पीड़ित के मोबाइल में एक संदिग्ध APK फाइल इंस्टॉल कराई गई, जिसके बाद उसके फोन और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी तक आरोपियों की पहुंच हो गई। इसके बाद अलग-अलग माध्यमों से रकम ट्रांसफर कर ली गई। पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की और तकनीकी विश्लेषण, बैंक खातों की जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड तथा निगरानी के जरिए रकम के लेन-देन का पता लगाना शुरू किया।
जांच के दौरान पुलिस को झारखंड के जामताड़ा, गुजरात और पंजाब के जालंधर तक फैले एक कथित संगठित साइबर ठगी नेटवर्क के संकेत मिले। तकनीकी और वित्तीय जानकारी के आधार पर पुलिस टीम जालंधर पहुंची। 18 अगस्त 2026 को नरिंदर सिनेमा के पास बडवाल कॉम्प्लेक्स में छापेमारी कर आरोपी सौरव को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, वह कथित तौर पर धोखाधड़ी से प्राप्त रकम या गिफ्ट कार्ड के जरिए खरीदे गए सोने की डिलीवरी लेने पहुंचा था। उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन और सिम कार्ड के साथ एक पॉकेट राउटर बरामद किया गया।
सौरव के मोबाइल फोन की शुरुआती जांच में 124 बैंक खातों और कार्ड से जुड़ी जानकारी मिली। इनमें 29 पूर्ण बैंक खातों का विवरण, 85 डेबिट और क्रेडिट कार्ड तथा 10 मास्क्ड कार्ड की जानकारी शामिल बताई गई है। पुलिस के अनुसार, 28 वर्षीय सौरव जालंधर का रहने वाला है और वर्ष 2020 से साइबर ठगी के नेटवर्क में कथित रूप से सक्रिय था। जांच में उस पर जामताड़ा और गुजरात के साइबर गिरोहों के लिए वित्तीय लेन-देन संभालने तथा ठगी की रकम को आगे पहुंचाने का आरोप है। पुलिस का दावा है कि वह इस काम के बदले करीब 30 प्रतिशत कमीशन लेता था और ऑनलाइन सोने की खरीदारी, गिफ्ट कार्ड तथा क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान जैसे तरीकों से रकम को खपाने में मदद करता था।
पुलिस के मुताबिक, सौरव ने कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त रकम से करीब 500 वर्ग गज की बेकरी फैक्ट्री और महिंद्रा XUV 700 जैसी संपत्तियां खरीदीं। इन संपत्तियों की भी जांच की जा रही है। आरोपी के खिलाफ दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में पहले से आठ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब इन पुराने मामलों और मौजूदा जांच के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही है। इसके साथ ही नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान, ठगी की रकम का पूरा हिसाब और संदिग्ध संपत्तियों की जब्ती की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है।
चारों ऑपरेशनों की समग्र जांच में पुलिस ने कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें म्यूल बैंक खातों के मामले में देवेंद्र उर्फ सचिन, फर्जी सिम कार्ड नेटवर्क में एटुल, समीर उर्फ सैम और पंकज, बैंक खाते बेचने के मामले में सुमित तथा APK आधारित साइबर ठगी में सौरव शामिल हैं। पुलिस ने कुल आठ मोबाइल फोन, 10,030 रुपये नकद, दो बैंक पासबुक, सात चेकबुक, आठ एटीएम और डेबिट कार्ड, एक पीओएस उपकरण, एक यामाहा R15M मोटरसाइकिल और एक पॉकेट राउटर जब्त किया है। जांच में लगभग 70 बैंक खाते, 187 सिम कार्ड, तीन कथित रूप से बेचे गए बैंक खाते और सौरव के मोबाइल में मिले 124 बैंक खाते तथा कार्ड से संबंधित विवरण सामने आए हैं।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, इन मामलों में कुल 125 NCRP शिकायतों का संबंध सामने आया है। इन शिकायतों में रिपोर्ट की गई धोखाधड़ी की राशि करीब 1.59 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अतिरिक्त सौरव के जरिए कथित तौर पर संभाली गई करीब 3.73 करोड़ रुपये की रकम की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि MRM पोर्टल के माध्यम से आउटर नॉर्थ साइबर क्राइम थाने ने अब तक साइबर ठगी के पीड़ितों को 74.94 लाख रुपये वापस कराए हैं। वहीं, इस प्रेस विज्ञप्ति में शामिल मामलों के शिकायतकर्ताओं को कुल 1.12 करोड़ रुपये वापस किए जाने की जानकारी दी गई है।
दिल्ली पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को कमीशन या पैसे के लालच में अपना बैंक खाता, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, चेकबुक, बैंक किट या बैंकिंग से जुड़ी जानकारी न दें। किसी दूसरे व्यक्ति को अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने देना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है, खासकर तब जब खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने या आगे भेजने के लिए किया जाए। पुलिस ने नागरिकों को बीमा लाभ, नौकरी या आसान कमाई का लालच देकर बैंक खाते खुलवाने वाले लोगों से सावधान रहने की सलाह दी है।
पुलिस ने यह भी कहा है कि नागरिक अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की समय-समय पर जांच करें और किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर संदिग्ध लिंक न खोलें या APK फाइल डाउनलोड न करें। बैंक या बिजली विभाग का अधिकारी बनकर फोन करने वाले लोगों की पहचान आधिकारिक ग्राहक सेवा माध्यमों से सत्यापित करनी चाहिए। किसी के साथ OTP, बैंकिंग पासवर्ड या निजी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। साइबर ठगी का संदेह होने या खाते से अनधिकृत लेन-देन होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। पुलिस का कहना है कि चारों मामलों में आगे की जांच जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।



