Aali Village Encroachment: आली गांव में 1800 मकान-दुकानों पर नोटिस, 27 सितंबर से कब्जा हटाने की तैयारी
नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के आली गांव में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की जमीन पर लंबे समय से बसे मकानों और दुकानों को खाली कराने की कार्रवाई तेज हो गई है। कोर्ट की ओर से नामित बैलिफ के माध्यम से करीब 1800 मकान और दुकानों पर नोटिस चस्पा किए गए हैं। स्थानीय लोगों को 26 सितंबर तक अपने घर और दुकानों से सामान हटाने का समय दिया गया है। निर्धारित अवधि में कब्जा स्वयं खाली नहीं करने की स्थिति में 27 सितंबर से पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई किए जाने की तैयारी है।
जानकारी के अनुसार, नोटिस आली चौक से शिव मंदिर तक पुश्ता रोड के दोनों ओर बने मकानों और दुकानों के अलावा पीर मोहल्ले में भी लगाए गए हैं। आली चौक से शिव मंदिर तक सड़क के दोनों तरफ करीब 1500 मकान और दुकानें होने की बात सामने आई है, जबकि पीर मोहल्ले में लगभग 300 मकानों पर नोटिस चस्पा किए गए हैं। इस तरह कुल मिलाकर करीब 1800 संपत्तियां इस कार्रवाई के दायरे में बताई जा रही हैं।
प्रशासन की ओर से दी गई समयसीमा के तहत स्थानीय लोगों को 26 सितंबर तक अपने घरों और दुकानों से जरूरी सामान हटाने के लिए कहा गया है। इसके बाद यदि निर्धारित क्षेत्र से लोग स्वयं कब्जा नहीं हटाते हैं तो 27 सितंबर को पुलिस की मदद से मकानों और दुकानों को खाली कराने की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। इसके बाद उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग जमीन को अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।
आली गांव के तहत आने वाले जामिया-ओखला क्षेत्र में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की जमीन पर कथित कब्जे का मामला पिछले कुछ समय से चर्चा में रहा है। मामला उस समय ज्यादा प्रमुखता से सामने आया, जब इस जमीन पर रह रहे कुछ लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज होने की बात सामने आई। इसके बाद इस मुद्दे को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठे और जमीन के स्वामित्व तथा कब्जे से संबंधित पुराना विवाद फिर सामने आया।
मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अधिशासी अभियंता बीके सिंह को नोडल अधिकारी नामित किए जाने की जानकारी है। इसके बाद कोर्ट द्वारा नियुक्त बैलिफ के साथ समन्वय कर जमीन को कब्जे से मुक्त कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की तैयारी के साथ स्थानीय स्तर पर नोटिस देने और प्रभावित संपत्तियों को चिह्नित करने का काम भी किया गया है।
इस जमीन को लेकर विवाद नया नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद यमुना तट से जुड़ी सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण से संबंधित कुछ जमीनें उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग को हस्तांतरित की गई थीं। बाद के वर्षों में इन जमीनों के कुछ हिस्सों पर कथित रूप से कब्जे होने की बात सामने आई। इसके बाद जमीन के स्वामित्व और कब्जे को लेकर लंबे समय तक कानूनी विवाद चलता रहा।
बताया जाता है कि इस मामले में लंबे समय तक अदालती कार्यवाही चली और वर्ष 2002 में फैसला उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के पक्ष में आया। इसके बाद वर्ष 2004 में जमीन के कुछ हिस्सों से कब्जा हटाने की कार्रवाई भी की गई थी। हालांकि, आबादी वाले हिस्सों में कार्रवाई पूरी तरह आगे नहीं बढ़ सकी और वहां रहने वाले लोगों के कारण मामला लंबे समय तक उलझा रहा।
इसके बाद कब्जे में रह रहे कुछ लोगों ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया। स्थानीय लोगों की ओर से यह तर्क दिया गया कि उनके पास आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, बिजली और पानी के बिल सहित ऐसे कई दस्तावेज हैं, जिनके आधार पर वे लंबे समय से वहां रह रहे हैं। कुछ लोगों की ओर से यह दावा भी किया गया कि जिस जमीन पर उनके मकान बने हैं, वह पुरानी ग्राम सीमा और लाल डोरा क्षेत्र से संबंधित रही है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले वर्ष इस मामले में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद विभाग की जमीन को कब्जे से मुक्त कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ। अब आली गांव में बड़े स्तर पर नोटिस चस्पा किए जाने के बाद कार्रवाई की तैयारी तेज कर दी गई है।
प्रशासन की प्रस्तावित कार्रवाई के तहत सबसे पहले लोगों को अपने स्तर पर मकान और दुकानों से सामान हटाने का अवसर दिया गया है। समयसीमा समाप्त होने के बाद यदि कब्जा नहीं हटाया जाता है तो पुलिस बल की मौजूदगी में मकानों और दुकानों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसके बाद जमीन पर विभागीय कब्जा स्थापित करने की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
इस कार्रवाई का असर बड़ी संख्या में परिवारों और दुकानदारों पर पड़ सकता है। करीब 1800 संपत्तियों पर नोटिस लगाए जाने के कारण इलाके में लोगों के बीच चिंता का माहौल है। कई परिवारों के लिए यह केवल संपत्ति हटाने का मामला नहीं है, बल्कि उनके लंबे समय से चले आ रहे निवास और रोजगार से भी जुड़ा हुआ है। दुकानदारों के सामने कारोबार और सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की चुनौती भी है।
प्रशासन और पुलिस के लिए भी यह कार्रवाई संवेदनशील मानी जा रही है, क्योंकि बड़ी संख्या में आवासीय और व्यावसायिक प्रतिष्ठान एक साथ प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना, लोगों को निर्धारित प्रक्रिया की जानकारी देना और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल 26 सितंबर की समयसीमा महत्वपूर्ण है। इसके बाद 27 सितंबर से प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों और प्रशासन दोनों की नजरें आगे की प्रक्रिया पर रहेंगी। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से जमीन को अपने कब्जे में लेने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है और आने वाले दिनों में आली गांव में इस कार्रवाई का व्यापक असर देखने को मिल सकता है।



