Cyber Fraud: अमेजन टास्क और फर्जी क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर ₹4.29 लाख की ठगी, अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के छह सदस्य गिरफ्तार
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम जिला दिल्ली पुलिस के साइबर पुलिस स्टेशन ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए छह सक्रिय सदस्यों को राजस्थान और मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर अमेजन प्रमोशनल टास्क, फर्जी क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग और झूठे कमीशन के नाम पर दिल्ली के एक निवासी से ₹4.29 लाख की ठगी करने का आरोप है। पुलिस ने वित्तीय लेनदेन की गहन जांच, बैंक खातों की पड़ताल, यूपीआई ट्रांजैक्शन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), एटीएम के सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी निगरानी के जरिए पूरे नेटवर्क का खुलासा किया।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित को सबसे पहले व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से संपर्क किया गया, जहां खुद को अमेजन से जुड़ी एक डिजिटल मार्केटिंग कंपनी का प्रतिनिधि बताकर ऑनलाइन प्रमोशनल टास्क पूरे करने पर आकर्षक कमीशन देने का लालच दिया गया। शुरुआत में छोटे-छोटे भुगतान कर आरोपियों ने पीड़ित का विश्वास जीत लिया। इसके बाद उसे टेलीग्राम ग्रुप में जोड़कर लगातार अधिक रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने “कॉइनबेस” के नाम पर एक फर्जी क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म दिखाकर नकली मुनाफा और ऊंचे रिटर्न का झांसा दिया। पीड़ित से अलग-अलग यूपीआई आईडी और बैंक खातों के जरिए लगातार पैसे ट्रांसफर करवाए गए। जब उसने अपनी जमा राशि निकालने का प्रयास किया तो आरोपियों ने उसका ट्रेडिंग अकाउंट फ्रीज होने का बहाना बनाकर अकाउंट एक्टिवेशन, निकासी प्रक्रिया और अन्य शुल्क के नाम पर और अधिक पैसे जमा कराने का दबाव बनाया। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर साइबर थाना दक्षिण-पश्चिम जिला में ई-एफआईआर संख्या 281/26 के तहत मामला दर्ज किया गया।
मामले की जांच के लिए एसआई अमित कुमार, एचसी संजय, एचसी लोकेश, एचसी राकेश और एचसी सचिन की विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक, एसएचओ साइबर थाना, दक्षिण-पश्चिम जिला तथा एसीपी ऑपरेशन संगमित्रा के मार्गदर्शन में बैंकिंग रिकॉर्ड, वित्तीय ट्रेल, यूपीआई ट्रांजैक्शन, सीडीआर, एटीएम सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया।
जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले जयपुर निवासी सुरेश कुमार यादव को गिरफ्तार किया, जिसके बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया गया था। पूछताछ में उसने बताया कि उसने कमीशन के बदले अपना बैंक खाता और सिम कार्ड पूरन मल यादव को उपलब्ध कराया था। इसके बाद पुलिस ने जयपुर ग्रामीण से पूरन मल यादव को भी गिरफ्तार कर लिया, जो गिरोह के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने और उनका समन्वय करने का काम करता था।
आगे की जांच में खुलासा हुआ कि ठगी की कुछ रकम मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित एटीएम से निकाली गई थी। एटीएम सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने अरशान मोहम्मद और गुफरान कुरैशी की पहचान कर दोनों को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए।
जांच के दौरान अभिजीत पाटीदार और आर्यन राठौर को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार अभिजीत उस बैंक खाते का धारक था जिसमें ठगी की रकम जमा हुई थी। उसने कमीशन के बदले अपना बैंक खाता अपने मित्र आर्यन राठौर को दिया, जिसने बाद में यह खाता गिरोह के अन्य सदस्यों अरशान और गुफरान तक पहुंचाया। इसी खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया गया।
पुलिस जांच में सामने आया कि सभी छह आरोपी एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं। गिरोह के सदस्य फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने, बैंकिंग क्रेडेंशियल्स संचालित करने, एटीएम से नकदी निकालने और ठगी की रकम का बंटवारा करने जैसी अलग-अलग भूमिकाएं निभा रहे थे।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से छह मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें साइबर ठगी से जुड़े कई चैट और डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। इसके अलावा एटीएम से नकदी निकालते समय पहने गए कपड़े भी जब्त किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों तथा देशभर में इनके नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।



