Homeक्राइमMangolpuri Factory Fire: दिल्ली की जूता फैक्ट्री में भीषण आग से चार...

Mangolpuri Factory Fire: दिल्ली की जूता फैक्ट्री में भीषण आग से चार मजदूरों की मौत, दो घायल; पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ा

दिल्ली के मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार रात एक जूता बनाने वाली फैक्ट्री में भीषण आग लगने से चार मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित फैक्ट्री में हुआ। आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर काम कर रहे मजदूरों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। दमकल विभाग और पुलिस की टीमों ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान चलाया। फैक्ट्री के अंदर से छह लोगों को बेहोशी की हालत में बाहर निकाला गया और संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने चार को मृत घोषित कर दिया। दोनों घायलों का उपचार जारी है। इस मामले में पुलिस ने लापरवाही और गैर इरादतन हत्या से संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर दो लोगों को हिरासत में लिया है।

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार 30 अक्टूबर की रात करीब 9:30 बजे मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 की एक जूता निर्माण फैक्ट्री में आग लगने की सूचना दमकल विभाग को मिली। सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां और पुलिस की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं। आग फैक्ट्री की बेसमेंट में लगी थी, जहां जूते बनाने और रखने का काम किया जाता था। देखते ही देखते वहां धुआं भर गया और ऊपरी मंजिलों तक फैल गया। फैक्ट्री की इमारत में बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और कई ऊपरी मंजिलें थीं। धुएं के कारण अंदर फंसे मजदूरों को बाहर निकलने में भारी परेशानी हुई।

दमकलकर्मियों ने कई घंटों तक आग बुझाने और अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया। बचाव अभियान के दौरान छह लोग बेहोशी की हालत में मिले। इनमें से एक व्यक्ति को तीसरी मंजिल की सीढ़ियों के पास से और पांच लोगों को चौथी मंजिल पर स्थित एक कमरे से बाहर निकाला गया। सभी को तत्काल संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने चार लोगों को मृत घोषित कर दिया, जबकि दो घायलों को अस्पताल में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। आग पर काबू पाने के बाद भी घटनास्थल पर तलाशी और कूलिंग का काम किया गया, ताकि दोबारा आग भड़कने की आशंका को खत्म किया जा सके।

हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों की पहचान 25 वर्षीय अशोक, 40 वर्षीय हरिहर, 38 वर्षीय लाल बाबू और 50 वर्षीय प्रेमचंद के रूप में हुई है। अशोक बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले थे, जबकि हरिहर मंगोलपुरी के निवासी बताए गए हैं। अन्य मृतकों की पहचान भी पुलिस ने की है। हादसे में घायल हुए लोगों की पहचान हरेंद्र और विकास के रूप में सामने आई है। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज जारी है।

हादसे में बचाए गए मजदूर विकास ने बताया कि आग लगने के समय वह अपने साथियों के साथ फैक्ट्री की पहली मंजिल पर खाना खा रहे थे। इसी दौरान उन्हें नीचे की ओर आग लगने और धुआं फैलने का पता चला। मजदूरों ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन उनके अनुसार बाहर जाने वाला दरवाजा बंद था। इसके बाद वे धुएं से बचने के लिए छत की तरफ जाने लगे। विकास ने बताया कि कुछ ही समय में इमारत के अंदर इतना धुआं भर गया कि सांस लेना और रास्ता देखना मुश्किल हो गया। उसने कपड़े को मुंह पर रखकर और पानी डालकर धुएं से बचने की कोशिश की। वह किसी तरह बच गया, लेकिन उसके कई साथी बाहर नहीं निकल सके। इस घटना ने फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा और आपातकालीन निकास व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे के समय फैक्ट्री में करीब 20 से 25 लोग मौजूद थे। इनमें से अधिकांश मजदूर किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि छह लोग अंदर फंस गए थे। एक प्रत्यक्षदर्शी और बचाए गए मजदूर के बयान के अनुसार, बाहर निकलने का रास्ता बंद होने के कारण मजदूरों को परेशानी हुई। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि फैक्ट्री के दरवाजे बंद क्यों थे और क्या इमारत में आपातकालीन निकास के पर्याप्त इंतजाम मौजूद थे। फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आशंका है कि फैक्ट्री में जूते बनाने के लिए रखे गए कच्चे माल और अन्य ज्वलनशील सामग्री ने आग और धुएं को फैलाने में भूमिका निभाई हो सकती है। हालांकि, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, राज पार्क थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 287, 125(ए), 105 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उनकी पहचान सुरेश चंद और अशोक के रूप में हुई है। पुलिस फैक्ट्री के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और आग लगने के समय मौजूद लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। अन्य संभावित आरोपियों की तलाश और जिम्मेदारी तय करने के लिए भी पुलिस की टीमें काम कर रही हैं।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, फैक्ट्री मालिक को भी जांच के लिए बुलाया गया है। ठेकेदार और वहां काम करने वाले कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि हादसे के समय फैक्ट्री में कितने मजदूर मौजूद थे और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए क्या इंतजाम किए गए थे। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि फैक्ट्री में अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास और सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि आग लगने की पूरी परिस्थितियों और संभावित लापरवाही की पड़ताल के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मंगोलपुरी की इस घटना ने दिल्ली के औद्योगिक इलाकों में चल रही फैक्ट्रियों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। जूते और अन्य उत्पाद बनाने वाली इकाइयों में बड़ी मात्रा में कच्चा माल, पैकिंग सामग्री और ज्वलनशील पदार्थ रखे जाते हैं। ऐसे स्थानों पर आग से बचाव के उपकरण, खुले निकास मार्ग और नियमित सुरक्षा जांच बेहद जरूरी हैं। फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रबंधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। चार मजदूरों की मौत के बाद अब पुलिस जांच के साथ-साथ यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या फैक्ट्री में सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था। मामले की जांच जारी है और पुलिस की कार्रवाई के बाद हादसे की वास्तविक वजह तथा जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments