Delhi Rain: घर में भरे बारिश के पानी में डूबने से युवक की मौत, सुंदर नगरी की घटना ने जल निकासी व्यवस्था पर उठाए सवाल
नई दिल्ली, 10 जुलाई: राजधानी दिल्ली में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली के नंद नगरी थाना क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। सुंदर नगरी के एफ-1 ब्लॉक में घर के अंदर भरे बारिश के पानी में डूबने से 47 वर्षीय धीरज की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह अपने घर में घुसे बारिश के पानी को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे, तभी उनका पैर फिसल गया और वह पानी में गिर पड़े। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद होने के कारण वह बाहर नहीं निकल सके और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और उन्होंने जल निकासी व्यवस्था को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार तड़के से हो रही तेज बारिश के कारण सुंदर नगरी के कई इलाकों में जलभराव हो गया था। गली नंबर-7 स्थित मकान संख्या-118 में रहने वाले धीरज अपने घर में जमा बारिश का पानी बाहर निकालने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वह कमरे में भरे पानी में गिर पड़े। चूंकि कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था, इसलिए वह बाहर नहीं निकल सके और पानी में डूबने से उनकी मौत हो गई।
कुछ समय बाद जब उनका ममेरा भाई घर पहुंचा तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी आवाज लगाने के बावजूद जब कोई जवाब नहीं मिला तो उसने दरवाजे की जाली से अंदर देखा। वहां धीरज का शव पानी में तैरता दिखाई दिया। इसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही नंद नगरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जीटीबी अस्पताल भेज दिया। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस दर्दनाक घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हर बारिश में सुंदर नगरी की गलियां और घर जलमग्न हो जाते हैं, लेकिन वर्षों से इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। लोगों का आरोप है कि कई बार संबंधित विभागों से शिकायत करने के बावजूद जल निकासी व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते नालों की सफाई और जल निकासी की समुचित व्यवस्था की गई होती तो शायद यह हादसा टल सकता था। उन्होंने संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना ने एक बार फिर राजधानी में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या और शहरी बुनियादी ढांचे की तैयारियों पर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत किया जाए और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।



