दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को आयोजित इंडिया गठबंधन की रैली को लेकर राजधानी की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने इस रैली की सफलता और इसमें शामिल हुए लोगों की संख्या पर सवाल उठाते हुए विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधा है। केंद्रीय राज्य मंत्री एवं दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने इंडिया गठबंधन की इस रैली को पूरी तरह ‘महा फ्लॉप’ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि रैली में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने के दावे किए गए थे, लेकिन वास्तविक स्थिति इसके विपरीत दिखाई दी और रामलीला मैदान में आधी से ज्यादा कुर्सियां खाली पड़ी रहीं।
हर्ष मल्होत्रा ने रैली में भीड़ जुटाने को लेकर किए गए दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इंडिया गठबंधन की ओर से इस आयोजन में करीब 10 लाख लोगों के शामिल होने की बात कही जा रही थी, लेकिन मैदान में बैठने के लिए केवल 25 हजार कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने दावा किया कि इन कुर्सियों में से भी आधी से ज्यादा खाली नजर आईं। उनके मुताबिक, यदि गठबंधन की ओर से लाखों लोगों के जुटने की उम्मीद जताई जा रही थी, तो आयोजन स्थल पर मौजूद भीड़ और बैठने की व्यवस्था को देखते हुए यह दावा वास्तविकता से काफी दूर दिखाई देता है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इंडिया गठबंधन की रैली में अपेक्षित जनसमर्थन देखने को नहीं मिला। विपक्षी दलों ने जिस बड़े स्तर पर इस कार्यक्रम का प्रचार किया था, उसके अनुरूप रामलीला मैदान में भीड़ नहीं पहुंची। उन्होंने खाली कुर्सियों का हवाला देते हुए विपक्षी गठबंधन की राजनीतिक ताकत और उसके जनाधार पर भी सवाल खड़े किए। भाजपा की ओर से इस आयोजन को लेकर की गई टिप्पणी को विपक्षी गठबंधन की एकजुटता और उसकी राजनीतिक सक्रियता पर हमला माना जा रहा है।
गौरतलब है कि रविवार को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की ओर से एक बड़ी राजनीतिक रैली का आयोजन किया गया था। इस रैली का मुख्य मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग था। कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के विभिन्न घटक दलों के नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे। विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए अपनी राजनीतिक आवाज बुलंद करने का प्रयास किया।
रैली के आयोजन को लेकर इंडिया गठबंधन की ओर से इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में पेश किया गया था। वहीं, भाजपा ने आयोजन के बाद इसमें शामिल लोगों की संख्या को लेकर सवाल खड़े कर दिए। हर्ष मल्होत्रा के बयान के बाद रैली की सफलता, भीड़ के दावों और विपक्षी दलों की राजनीतिक ताकत को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
दिल्ली की राजनीति में इस बयान को भाजपा और इंडिया गठबंधन के बीच जारी राजनीतिक टकराव के एक और उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। जहां विपक्षी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर अपनी बात रखने के लिए रामलीला मैदान में शक्ति प्रदर्शन किया, वहीं भाजपा ने खाली कुर्सियों का मुद्दा उठाकर इस आयोजन को कमजोर साबित करने की कोशिश की है। आने वाले दिनों में इस रैली को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।
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