Delhi Firecrackers: दिल्ली में दिवाली के पटाखों ने जीवन में घेरा अंधेरा, 3 की रोशनी गई, कुछ के हाथ कटे
दिल्ली में दिवाली की रात आतिशबाजी ने कई लोगों के जीवन में स्थायी अंधेरा और गंभीर चोटें पहुंचाईं। राजधानी में 250 से ज्यादा लोग जलने की घटनाओं का शिकार हुए। दिल्ली एम्स के बर्न्स एंड प्लास्टिक सेंटर के हेड डॉ. मनीष सिंघल ने बताया कि केवल एम्स में ही 76 लोग पटाखों से घायल हुए, जिनमें तीन मामलों की स्थिति बेहद गंभीर थी।
घायलों में कई को हाथ जलने के कारण काटना पड़ा, जबकि आंखों की चोटों के 13 मामले सामने आए। इनमें से तीन लोगों की दोनों आंखों की रोशनी स्थायी रूप से चली गई। छह से सात मरीजों को आंखों की सर्जरी की आवश्यकता पड़ी। डॉ. सिंघल ने बताया कि दिवाली के जश्न में पोटेशियम नाइट्रेट युक्त पटाखों के इस्तेमाल से गंभीर हाथ और आंखों की चोटें होती हैं, और लगभग 70 प्रतिशत मामलों में हाथ गंवाने की स्थिति बन जाती है।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, दिवाली की रात राजधानी में आग से घायल होने वाले मामलों में सफदरजंग अस्पताल ने 129, गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल ने 37, दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) अस्पताल ने 16 और लोक नायक जय प्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल ने 15 मामले दर्ज किए। सफदरजंग अस्पताल की बर्न यूनिट के आंकड़ों में 118 मामले सीधे तौर पर पटाखों के कारण हुए।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पटाखों के अंधाधुंध प्रयोग से जीवन और दृष्टि दोनों को गंभीर खतरा होता है। डॉ. सिंघल ने कहा, “कल्पना कीजिए कि दिवाली के जश्न में किसी की आंख या हाथ चले जाए, यह अत्यंत खतरनाक है। सावधानी और सुरक्षित उपायों का पालन करना जरूरी है।”



