Delhi Pollution: दिल्ली में प्रदूषण का बुरा हाल, आनंद विहार स्टेशन पर AQI 500 पार, सांस लेना हुआ मुश्किल
देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। आनंद विहार रेलवे स्टेशन जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 500 के पार दर्ज किया गया है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। इस बढ़ते प्रदूषण का सीधा असर यात्रियों और स्टेशन पर कार्यरत कर्मचारियों की सेहत पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आनंद विहार में प्रदूषण के प्रमुख कारणों में भारी ट्रैफिक, डीज़ल इंजनों का धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ती धूल और आसपास के औद्योगिक इलाकों का प्रभाव शामिल हैं। यहां बस टर्मिनल, रेलवे स्टेशन और इंटरस्टेट ट्रांसपोर्ट हब एक ही क्षेत्र में होने से वाहनों की संख्या बहुत अधिक है, जिससे प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर जो स्मोक टावर लगाया गया था, वह उद्घाटन के बाद से ही बंद पड़ा है। स्टेशन परिसर में धूल और धुएं की वजह से यात्रियों को आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो रही हैं। कई लोग मास्क पहनने के बावजूद असहज महसूस कर रहे हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से पानी का छिड़काव किया जा रहा है, लेकिन यह सिर्फ स्मोक टावर के आसपास तक सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए स्थानीय निकायों और परिवहन विभाग को मिलकर कदम उठाने होंगे, जैसे—डीज़ल वाहनों की संख्या घटाना, स्टेशन के आसपास हरियाली बढ़ाना और वायु गुणवत्ता की नियमित निगरानी सुनिश्चित करना।
एक हालिया सर्वे के अनुसार, आनंद विहार क्षेत्र में औसत AQI स्तर 500 के पार दर्ज किया गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुसार अत्यंत हानिकारक है। यह स्थिति फेफड़ों और दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा देती है। आनंद विहार स्टेशन पर वायु प्रदूषण की यह भयावह स्थिति न केवल स्थानीय लोगों के लिए खतरे की घंटी है, बल्कि पूरे दिल्ली-NCR की पर्यावरण नीति पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राजधानी में सांस लेना और भी मुश्किल हो जाएगा।



