Satya Niketan Building Collapse: 5 मंजिला इमारत हादसे के बाद छात्रों में डर, PG और बहुमंजिला इमारतों के सेफ्टी ऑडिट की उठी मांग
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत के हादसे के बाद छात्रों और स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। घटना में अब तक सात लोगों की मौत की खबर सामने आने के बाद इलाके में संचालित पीजी और किराये के कमरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। बड़ी संख्या में छात्रों ने बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा जांच कराने और मकान मालिकों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक होने के कारण छात्रों के रहने के प्रमुख इलाकों में शामिल है। यहां दिल्ली के साथ देश के अलग-अलग राज्यों से पढ़ाई के लिए आने वाले बड़ी संख्या में छात्र पीजी और किराये के कमरों में रहते हैं। हादसे के बाद इन छात्रों के बीच अपनी इमारतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
छात्रों का आरोप है कि हादसे वाली इमारत की स्थिति पहले से ठीक नहीं थी और कई स्थानों पर मरम्मत की आवश्यकता थी। उनका दावा है कि इमारत की स्थिति को लेकर मकान मालिक से कई बार शिकायत की गई थी, लेकिन कथित तौर पर इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। हालांकि, इन आरोपों और इमारत की वास्तविक संरचनात्मक स्थिति की पुष्टि संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
हादसे के बाद छात्रों ने सवाल उठाया है कि सत्य निकेतन और आसपास के इलाकों में मौजूद अन्य बहुमंजिला इमारतें रहने के लिहाज से कितनी सुरक्षित हैं। उनका कहना है कि केवल हादसे वाली इमारत की जांच पर्याप्त नहीं होगी, क्योंकि आसपास की कई इमारतों में बड़ी संख्या में छात्र और युवा रह रहे हैं।
छात्रों ने मांग की है कि प्रशासन सत्य निकेतन और आसपास संचालित सभी पीजी तथा बहुमंजिला किराये की इमारतों का व्यापक सेफ्टी ऑडिट कराए। यदि जांच के दौरान किसी भवन में संरचनात्मक कमजोरी, निर्माण संबंधी खामी या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन मिलता है तो वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कार्रवाई की जाए।
हादसे के बाद पीजी में मिलने वाली सुविधाओं और वसूले जाने वाले किराये को लेकर भी सवाल उठे हैं। छात्रों के मुताबिक, सत्य निकेतन में कई जगह पीजी कमरों का किराया करीब 18 हजार से 25 हजार रुपये तक है। इसके बावजूद छात्रों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर किराये के अनुपात में बुनियादी सुविधाएं, नियमित रखरखाव और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई जाती।
छात्रों का कहना है कि पीजी या किराये का कमरा उपलब्ध कराने वाले मकान मालिकों की जिम्मेदारी केवल किराया लेने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। भवन का नियमित रखरखाव, आवश्यक मरम्मत, बिजली और अग्नि सुरक्षा के साथ इमारत की संरचनात्मक स्थिति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
घटना के बाद अब यह मांग तेज हो रही है कि छात्र बहुल इलाकों में पीजी के रूप में इस्तेमाल की जा रही इमारतों के लिए सुरक्षा नियमों का प्रभावी तरीके से पालन कराया जाए। विशेष रूप से पुरानी और बहुमंजिला इमारतों की समय-समय पर जांच कराने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
छात्रों का कहना है कि सत्य निकेतन में हजारों युवा अपने घरों से दूर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में उनके आवास की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन, संबंधित एजेंसियों और भवन मालिकों की साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए। किसी इमारत में गंभीर खामी मिलने पर हादसा होने का इंतजार करने के बजाय समय रहते सुधारात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल इमारत हादसे के वास्तविक कारण, निर्माण की स्थिति और जिम्मेदारी को लेकर जांच महत्वपूर्ण है। संबंधित एजेंसियों की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और क्या इसमें भवन की संरचना, रखरखाव या अन्य सुरक्षा संबंधी खामियों की भूमिका थी।
सत्य निकेतन की घटना ने राजधानी में छात्रों के लिए संचालित पीजी और किराये के आवासों की सुरक्षा को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हादसे के बाद छात्रों की प्रमुख मांग पूरे इलाके की बहुमंजिला इमारतों का सुरक्षा ऑडिट कराने और नियमों का उल्लंघन मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की है।



