Okhla Cylinder Blast: दिल्ली के ओखला में ऑक्सीजन सिलेंडर फटने से कर्मचारी की मौत, चार घायल; AIIMS ट्रॉमा सेंटर भेजे गए
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के ओखला फेज-1 में बुधवार सुबह ऑक्सीजन सिलेंडर में हुए जोरदार धमाके में एक कर्मचारी की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए। घटना ओखला फेज-1 स्थित D-23 परिसर में हुई, जिसका इस्तेमाल SM Traders नाम की फर्म गोदाम के रूप में कर रही थी। हादसे के बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू की गई। घायलों को इलाज के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया है।
पुलिस को घटना की जानकारी बुधवार सुबह करीब 10 बजकर 43 मिनट पर DD नंबर 36A के माध्यम से मिली। सूचना मिलते ही ओखला इंडस्ट्रियल एरिया थाने की पुलिस हरकत में आ गई। जांच अधिकारी, थाना प्रभारी, ACP, ERV और PCR की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल विभाग को भी सूचना दी गई और राहत एवं बचाव की कार्रवाई शुरू की गई।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि D-23 परिसर का इस्तेमाल SM Traders गोदाम के तौर पर करती है। हादसे के समय फर्म के नाम पर रजिस्टर्ड एक टाटा 407 वाहन गाजियाबाद से कमर्शियल ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर यहां पहुंचा था। वाहन से सिलेंडरों को उतारकर गोदाम के अंदर रखने का काम किया जा रहा था। कर्मचारी उमेश, मोहित और पंकज इस काम में लगे हुए थे।
फर्म के मैनेजर के शुरुआती बयान के अनुसार वाहन रोजाना की तरह सुबह ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर पहुंचा था। कर्मचारी वाहन से सिलेंडर उतार रहे थे, तभी एक सिलेंडर नीचे गिरकर सड़क पर आ गया। इसके तुरंत बाद उसमें जोरदार विस्फोट हो गया। प्रारंभिक जांच में एक ही सिलेंडर के फटने की बात सामने आई है। हालांकि सिलेंडर में विस्फोट होने की वास्तविक तकनीकी वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। इसकी पुष्टि फोरेंसिक और तकनीकी जांच के बाद होने की उम्मीद है।
इस हादसे में 35 वर्षीय मोहित सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। मोहित मूल रूप से राजस्थान के जयपुर के रहने वाले थे और करीब तीन साल से SM Traders में हेल्पर के रूप में काम कर रहे थे। धमाके में उमेश, अरविंद, मनोज और पंकज घायल हुए हैं। चारों को इलाज के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। पुलिस उनकी मेडिकल स्थिति से संबंधित जानकारी भी जुटा रही है।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि SM Traders GST में रजिस्टर्ड फर्म है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक कंपनी पिछले करीब एक से दो वर्षों से किराए के इस परिसर से अपना काम कर रही थी। यहां करीब तीन से चार लोग काम करते हैं। फर्म मुख्य रूप से ऑक्सीजन सिलेंडरों की ट्रेडिंग और स्थानीय स्तर पर उनकी सप्लाई का काम करती है।
पुलिस की शुरुआती जांच में परिसर के अंदर ऑक्सीजन सिलेंडर भरने का कोई प्लांट नहीं मिला है। बताया गया है कि सिलेंडर गाजियाबाद से भरे हुए मंगाए जाते थे। जांच में राम अवतार नाम के एक सप्लायर का नाम भी सामने आया है, जिसके माध्यम से सिलेंडर मंगाए जाने की बात कही गई है। इसके बाद इन्हें ओखला क्षेत्र के व्यापारियों और फैक्ट्रियों में सप्लाई किया जाता था।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक फर्म में रोजाना करीब 70 से 80 सिलेंडर हैंडल किए जाते थे। हालांकि पुलिस अभी इस आंकड़े को फर्म के आधिकारिक रिकॉर्ड के जरिए सत्यापित कर रही है। इसके साथ ही सिलेंडरों के मालिकाना हक, उनकी सप्लाई कहां से हो रही थी और संबंधित सप्लायर के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस की जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ऑक्सीजन सिलेंडरों के भंडारण और कारोबार के लिए आवश्यक लाइसेंस और अनुमतियों से भी जुड़ा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्म के पास सिलेंडरों को रखने और उनकी सप्लाई करने के लिए जरूरी दस्तावेज और अनुमति मौजूद थी या नहीं। इसके अलावा सिलेंडरों को लाने, उतारने और गोदाम में रखने के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया जा रहा था, इसकी भी जांच की जा रही है।
धमाके के बाद घटनास्थल को सुरक्षित कर दिया गया है और संबंधित साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि सिलेंडर के गिरने के बाद उसमें विस्फोट किस वजह से हुआ और क्या सिलेंडर में पहले से कोई तकनीकी खराबी थी। फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद विस्फोट के वास्तविक कारण को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल पुलिस फर्म के रिकॉर्ड, सिलेंडरों की सप्लाई से जुड़े दस्तावेज, आवश्यक लाइसेंस और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों की जांच कर रही है। हादसे में एक कर्मचारी की जान जाने और चार लोगों के घायल होने के बाद ऑक्सीजन सिलेंडरों की हैंडलिंग और स्टोरेज के दौरान अपनाए गए सुरक्षा उपाय भी जांच के दायरे में हैं।



