Patparganj Industrial Area Plight: पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया में टूटी सड़कों और उफनते सीवर से कारोबारी त्रस्त, डीएसआईआईडीसी पर अनदेखी का आरोप
पूर्वी दिल्ली के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शुमार पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा, ध्वस्त बुनियादी ढांचे और भीषण प्रदूषण की मार झेल रहा है। सरकार को हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व और टैक्स देने वाले इस औद्योगिक क्षेत्र की सड़कें गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, जबकि जगह-जगह जाम पड़े सीवरों का गंदा और बदबूदार पानी मुख्य सड़कों पर बह रहा है। टूटी सड़कों से दिनभर उड़ने वाली धूल के गुबार ने पूरे इलाके की आबोहवा को इस कदर जहरीला बना दिया है कि यहां काम करने वाले हजारों श्रमिकों और उद्यमियों को सांस लेने संबंधी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।
पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया एसोसिएशन के अध्यक्ष और महासचिव मनमोहन मेहरा ने दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) तथा दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की कार्यप्रणाली पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। पदाधिकारियों ने दस्तावेज दिखाते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2010 के बाद से इस औद्योगिक क्षेत्र में न तो पीने के साफ पानी की व्यवस्था दुरुस्त की गई और न ही सड़कों व सीवर लाइनों का नवीनीकरण हुआ। उद्यमियों का कहना है कि पिछले एक दशक से वे संबंधित विभागों के चक्कर काट रहे हैं और सैकड़ों शिकायती पत्र दे चुके हैं, लेकिन एमसीडी और डीएसआईआईडीसी के अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
उद्यमियों ने तंज कसते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को औद्योगिक क्षेत्र से एकमुश्त वोट बैंक नहीं मिलता, यही कारण है कि सरकारें बदलने के बावजूद यहां के विकास कार्यों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। कारोबारियों ने यह भी आरोप लगाया कि परिसर में स्थित डीएसआईआईडीसी के अस्थायी कार्यालय में तैनात सहायक अभियंता (एई) अरुण कुमार का रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना है और वे शिकायत लेकर पहुंचने वाले उद्योगपतियों से सीधे मुंह बात तक नहीं करते। नियमों के अनुसार प्रत्येक दस वर्ष में औद्योगिक सड़कों के पुनर्निर्माण का प्रावधान होने के बावजूद यहां की सड़कें बदहाल पड़ी हैं। उद्यमियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही सड़कों की मरम्मत, सीवर की सफाई और धूल नियंत्रण के उपाय नहीं किए गए, तो वे सामूहिक रूप से प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।



