Homeदिल्ली-एनसीआरDelhi Diwali Firecrackers: दिल्ली में पटाखों पर पूरा बैन नहीं, सुप्रीम कोर्ट...

Delhi Diwali Firecrackers: दिल्ली में पटाखों पर पूरा बैन नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों को दी सशर्त मंजूरी

Delhi Diwali Firecrackers: दिल्ली में पटाखों पर पूरा बैन नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों को दी सशर्त मंजूरी

नई दिल्ली। दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। शीर्ष अदालत ने फिलहाल पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से इनकार किया है। कोर्ट ने कहा कि एक तरफ लोगों की धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य पर पटाखों के असर को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए अदालत ने पूर्ण प्रतिबंध और पूरे दिन आतिशबाजी की अनुमति, दोनों के बजाय बीच का रास्ता अपनाने की बात कही है।

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्न बी वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत न तो पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाएगी और न ही 24 घंटे आतिशबाजी की इजाजत देगी। कोर्ट के मुताबिक, पूरे दिन पटाखे चलाने से बच्चों, बुजुर्गों, बीमार लोगों और अन्य जीवों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। वहीं पूर्ण प्रतिबंध से लोगों की धार्मिक भावनाएं प्रभावित होने की बात भी अदालत ने कही।

सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों के इस्तेमाल के लिए निर्धारित समय तय करने की दिशा में संकेत दिया है। अदालत ने कहा कि दिवाली पर कुछ निश्चित घंटों के दौरान ही अनुमति वाले पटाखे चलाने की व्यवस्था की जा सकती है। हालांकि, 1 अक्टूबर की सुनवाई के बाद पटाखे चलाने का अंतिम टाइम स्लॉट अलग आदेश और आगे की प्रक्रिया के तहत स्पष्ट किया जाना है। इसलिए फिलहाल इसे पूरे दिन पटाखे चलाने की अनुमति नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने तय मानकों को पूरा करने वाले ‘नेक्स्ट-जेनरेशन जॉइंटेड ग्रीन क्रैकर्स’ यानी नई तकनीक से तैयार जुड़े हुए ग्रीन पटाखों के निर्माण और बिक्री को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर तरह की पारंपरिक लड़ी को मंजूरी मिल गई है। केवल निर्धारित फॉर्मूलेशन, उत्सर्जन, आवाज और सुरक्षा मानकों को पूरा करने वाले पटाखे ही इस व्यवस्था के दायरे में आएंगे।

इन नए ग्रीन पटाखों में पुराने जुड़े हुए पटाखों की तुलना में फटने की गति को कम करने की व्यवस्था बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुराने जॉइंटेड पटाखों में एक सेकंड में करीब 25 ब्रेड तक फटते थे, जबकि नए वर्जन में यह संख्या घटाकर पांच ब्रेड प्रति सेकंड करने का प्रावधान बताया गया है। इसका उद्देश्य एक साथ होने वाले धुएं और शोर को कम करना है।

हालांकि, ग्रीन पटाखों को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त नहीं माना जा सकता। इनका उद्देश्य पारंपरिक पटाखों की तुलना में प्रदूषक उत्सर्जन को कम करना है। सीएसआईआर-एनईईआरआई की ओर से तैयार किए गए फॉर्मूलेशन में विभिन्न रसायनों की मात्रा और संरचना में बदलाव किया गया है। कुछ परीक्षणों में नए फॉर्मूलेशन वाले पटाखों से पीएम10 और पीएम2.5 जैसे कणों के उत्सर्जन में कमी दर्ज होने की जानकारी दी गई है।

बेरियम आधारित पटाखों को लेकर अभी पूरी तस्वीर साफ नहीं हुई है। केंद्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि कुछ बेरियम आधारित पटाखों की आउटडोर टेस्टिंग अभी बाकी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संबंधित रिपोर्ट के लिए 15 अक्टूबर तक का समय मांगा गया है। इसके बाद अदालत यह तय कर सकती है कि किन श्रेणियों के पटाखों को किन शर्तों के साथ अनुमति दी जाएगी।

इससे पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखों को लेकर अलग-अलग वर्षों में प्रतिबंध और सीमित छूट की व्यवस्था लागू होती रही है। 2025 में भी सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में प्रमाणित ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल को निर्धारित समय और अन्य शर्तों के साथ अनुमति दी थी। उस व्यवस्था में बिक्री और इस्तेमाल के लिए तय स्थान, QR कोड वाले प्रमाणित पटाखे तथा निगरानी जैसी शर्तें शामिल थीं।

इस बार सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख के बाद दिल्ली में दिवाली के दौरान पटाखों को लेकर तस्वीर पिछले पूर्ण प्रतिबंध वाली व्यवस्था से अलग दिखाई दे रही है। हालांकि, पटाखों की किस श्रेणी को अंतिम रूप से अनुमति मिलेगी, उन्हें कब और कितनी देर तक चलाया जा सकेगा तथा बिक्री और निगरानी को लेकर क्या शर्तें होंगी, यह आगे आने वाले आदेशों और संबंधित एजेंसियों की गाइडलाइन से स्पष्ट होगा।

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments