Patparganj Illegal Construction: पटपड़गंज गांव में छह मंजिला निर्माण पर सवाल, सातवीं मंजिल की तैयारी का स्थानीय लोगों ने लगाया आरोप
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे के बाद अवैध और असुरक्षित निर्माण के खिलाफ नगर निगम तथा दिल्ली सरकार की ओर से कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद एमसीडी ने शहर के अलग-अलग इलाकों में अवैध निर्माण और खतरनाक इमारतों के खिलाफ सीलिंग और तोड़फोड़ की कार्रवाई की। एमसीडी ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया था कि सत्य निकेतन हादसे के बाद 17 दिनों में 543 संपत्तियां गिराई गईं, 178 को सील किया गया और बड़ी संख्या में नोटिस जारी किए गए।
इसी कार्रवाई के बीच पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज गांव से सामने आई तस्वीरों ने जमीनी स्तर पर निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मकान नंबर 196 में कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर बहुमंजिला निर्माण कराया जा रहा है। लोगों के मुताबिक संकरी गली में स्थित इस इमारत में पहले ही कई मंजिलों का निर्माण हो चुका है और अब एक और मंजिल बनाए जाने की तैयारी की जा रही है।
मौके से सामने आई तस्वीरों में निर्माणाधीन इमारत और उसके आसपास की बेहद संकरी गली दिखाई देती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर निर्माण हो रहा है, वहां पहले से ही आवाजाही के लिए सीमित जगह है। ऐसे में यदि किसी आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस या अन्य राहत वाहन को पहुंचना पड़े तो परेशानी हो सकती है। हालांकि, इस मकान का निर्माण स्वीकृत नक्शे और स्थानीय भवन नियमों के अनुरूप है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार मकान नंबर 196 में निर्माण का काम लगातार जारी है। उनका दावा है कि इमारत करीब छह मंजिल तक पहुंच चुकी है और अब सातवीं मंजिल के निर्माण की तैयारी की जा रही है। यदि यह दावा सही है तो यह सवाल जरूर उठता है कि इतने बड़े निर्माण की निगरानी संबंधित विभागों की ओर से किस स्तर पर की जा रही है और निर्माण की वैधता की जांच कब की गई।
सत्य निकेतन हादसे के बाद एमसीडी ने चार या उससे अधिक मंजिल वाली अवैध इमारतों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। बाद में नगर निगम ने अवैध निर्माण, खतरनाक इमारतों और भवन नियमों के उल्लंघन के खिलाफ शहरभर में अभियान चलाया। एमसीडी के अनुसार, 12 जोन में कार्रवाई की गई और सैकड़ों संपत्तियों को ध्वस्त या सील किया गया।
ऐसे में पटपड़गंज गांव में सामने आए इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि यदि मकान नंबर 196 का निर्माण स्वीकृत नियमों के विपरीत है तो अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने निर्माण को लेकर शिकायत भी की है, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने का आरोप है।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण का विरोध करने वाले लोगों के साथ विवाद और दबाव की स्थिति पैदा होती है। इन्हीं दावों के चलते आसपास रहने वाले कुछ लोग कैमरे पर अपनी बात रखने से बचते नजर आए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आना भी इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।
मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि निर्माण अवैध है तो उस पर कार्रवाई कब होगी? शिकायत के बावजूद निर्माण कैसे जारी रहा? यदि इमारत छह मंजिल तक बन चुकी है तो संबंधित विभागों की ओर से पहले निरीक्षण क्यों नहीं किया गया? और यदि निर्माण स्वीकृत है तो उसकी मंजूरी और भवन योजना की स्थिति क्या है?
वहीं, इस मामले में क्षेत्रीय पार्षद रेल चौधरी से बात किए जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस निर्माण की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि बिल्डिंग नियमों के खिलाफ बनाई जा रही है तो संबंधित विभाग को इसकी जांच करनी चाहिए और नियमों के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की स्थिति पैदा न हो।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद दिल्ली में भवन सुरक्षा और अवैध निर्माण को लेकर प्रशासनिक निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एमसीडी की ओर से हाईकोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी में हजारों पीजी इमारतों का सर्वे किया गया और कई संपत्तियों में भवन योजनाओं तथा सुरक्षा से जुड़े रिकॉर्ड की उपलब्धता को लेकर भी सवाल सामने आए।
पटपड़गंज गांव के मकान नंबर 196 को लेकर अब वास्तविक स्थिति नगर निगम की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। प्रशासन को यह देखना होगा कि भवन का निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुरूप है या नहीं, कितनी मंजिलों की अनुमति है, निर्माण की अवधि क्या है और स्थानीय लोगों की शिकायतों पर पहले कोई कार्रवाई हुई थी या नहीं। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता साफ होगा, जबकि निर्माण वैध पाए जाने पर प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।



