Cyber Crime: ₹1.16 लाख की UPI ठगी में Layer-1 Beneficiary गिरफ्तार, 200 किमी पीछा कर जयपुर से दबोचा
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के ईस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर थाना पुलिस ने ₹1,16,220.02 की ऑनलाइन UPI धोखाधड़ी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए Layer-1 Beneficiary को राजस्थान के जयपुर से गिरफ्तार किया है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम ने करीब 200 किलोमीटर तक पीछा किया और लगभग छह घंटे तक लगातार तकनीकी निगरानी तथा जमीनी स्तर पर तलाश अभियान चलाया।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने ठगी की रकम अपने बैंक ऑफ बड़ौदा खाते में प्राप्त की थी। इसके बाद रकम को कई अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया, ताकि पैसों के वास्तविक ट्रेल को छिपाया जा सके। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल किए जाने की आशंका वाला OPPO F27 Pro+ 5G मोबाइल फोन और दो बैंक पासबुक बरामद की हैं।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान राजस्थान के टोंक जिले के टोडारायसिंह क्षेत्र के खल्कड़ावा गांव निवासी 28 वर्षीय कैलाश सैनी के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार आरोपी छठी कक्षा तक पढ़ा है और मौसमी तौर पर ट्रैक्टर चालक तथा मजदूर के रूप में काम करता है। आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस साइबर फ्रॉड सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने तथा ठगी की बाकी रकम का पता लगाने में जुटी है।
UPI ट्रांजेक्शन के जरिए हुई थी ₹1.16 लाख की ठगी
पुलिस के अनुसार इस मामले में शिकायतकर्ता बाबिता खुरमी ने साइबर थाना ईस्ट में शिकायत दी थी। उन्होंने बताया कि उनके साथ फर्जी UPI ट्रांजेक्शन के जरिए ₹1,16,220.02 की धोखाधड़ी की गई।
शिकायत के आधार पर साइबर थाना ईस्ट में e-FIR नंबर 285/2026 दर्ज की गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319 और 340 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने ठगी गई रकम के बैंकिंग ट्रेल को खंगालना शुरू किया। NCRP मनी ट्रेल, बैंकिंग लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से पता चला कि ठगी की रकम सबसे पहले कैलाश सैनी के नाम पर मौजूद बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते में पहुंची थी।
Layer-1 Beneficiary के खाते में पहुंची रकम
पुलिस ने बैंक रिकॉर्ड का विश्लेषण कर कैलाश सैनी को इस मामले में Layer-1 Beneficiary के तौर पर चिन्हित किया। जांच में सामने आया कि रकम उसके खाते में आने के तुरंत बाद उसे कई अलग-अलग खातों में भेज दिया गया।
पुलिस के मुताबिक रकम को अलग-अलग खातों में भेजने का उद्देश्य पैसों के मूल स्रोत और ट्रांजेक्शन की कड़ी को छिपाना था। बैंक रिकॉर्ड, ATM से निकासी की जानकारी और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का मिलान करने के बाद जांच की दिशा राजस्थान के टोंक जिले के टोडारायसिंह तक पहुंची।
इसके बाद पुलिस टीम ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए राजस्थान जाने का फैसला किया।
गांव पहुंची पुलिस तो मोबाइल बंद कर फरार था आरोपी
साइबर थाना ईस्ट की जांच टीम में SI विनय कुमार, HC देवेंद्र, कांस्टेबल विवेक और महिला कांस्टेबल आंचल शामिल थीं। टीम ने इंस्पेक्टर पवन यादव, SHO साइबर थाना ईस्ट की निगरानी और ACP/Operations ईस्ट डिस्ट्रिक्ट पवन कुमार के मार्गदर्शन में कार्रवाई आगे बढ़ाई।
पुलिस टीम जब आरोपी के पैतृक गांव पहुंची तो उसे वहां से फरार पाया। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया था और लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था।
इसके बावजूद पुलिस टीम ने जांच बंद नहीं की। स्थानीय स्तर पर सूचना जुटाने, गुप्त निगरानी और लगातार पूछताछ के साथ नए तकनीकी सुरागों का विश्लेषण किया गया।
करीब 200 किलोमीटर तक चला पीछा
पुलिस के मुताबिक आरोपी को पकड़ने के लिए टीम ने राजस्थान के अलग-अलग स्थानों पर लगातार तलाश की। करीब छह घंटे के दौरान पुलिस टीम ने लगभग 200 किलोमीटर तक आरोपी का पीछा किया।
आरोपी बार-बार अपनी लोकेशन बदल रहा था और डिजिटल नेटवर्क से दूर रहने की कोशिश कर रहा था। पुलिस ने तकनीकी सुरागों और स्थानीय खुफिया जानकारी को जोड़कर उसके संभावित ठिकाने का पता लगाया।
इसके बाद पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए कैलाश सैनी को जयपुर से गिरफ्तार कर लिया। उसे दिल्ली लाया गया और आगे की कानूनी कार्रवाई की गई।
मोबाइल फोन और दो बैंक पासबुक बरामद
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक OPPO F27 Pro+ 5G मोबाइल फोन बरामद किया। पुलिस को संदेह है कि इस मोबाइल का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी में किया गया था।
इसके अलावा पुलिस ने वित्तीय लेनदेन से संबंधित दो बैंक पासबुक भी बरामद की हैं। इन दस्तावेजों और मोबाइल फोन में मौजूद डिजिटल साक्ष्यों का पुलिस आगे विश्लेषण कर रही है।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी के बैंक खाते में ठगी की रकम पहुंचने के बाद उसे किन-किन खातों में ट्रांसफर किया गया और इस प्रक्रिया में कितने लोग शामिल थे।
साइबर फ्रॉड सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की तलाश
पुलिस के मुताबिक कैलाश सैनी की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ाया गया है। पुलिस ठगी की रकम के पूरे बैंकिंग ट्रेल का विश्लेषण कर रही है। इसके जरिए अन्य लाभार्थी खातों और साइबर अपराध से जुड़े लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
जांच टीम जब्त मोबाइल फोन से डिजिटल साक्ष्य जुटाने के साथ-साथ बैंकिंग दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। पुलिस का लक्ष्य ठगी के पूरे नेटवर्क का पता लगाना और अपराध से जुड़े अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करना है।
आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है।
दिल्ली पुलिस ने लोगों को किया सतर्क
ईस्ट डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने नागरिकों से ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन करते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे किसी भी व्यक्ति के साथ OTP, UPI PIN, बैंकिंग क्रेडेंशियल या पासवर्ड साझा न करें।
पुलिस ने SMS, WhatsApp, ईमेल या सोशल मीडिया के जरिए आने वाले संदिग्ध लिंक और QR कोड पर क्लिक नहीं करने की सलाह भी दी है। किसी भी भुगतान अनुरोध पर रकम भेजने से पहले उसकी सत्यता की जांच करने को कहा गया है।
पुलिस के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति के साथ साइबर धोखाधड़ी हो जाती है तो उसे तुरंत 1930 पर सूचना देनी चाहिए या National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। समय पर शिकायत मिलने से धोखाधड़ी की रकम को फ्रीज कराने और पीड़ित के पैसे वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।



