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Cyber Fraud: ब्लू डार्ट डिलीवरी के नाम पर ₹2.47 लाख की ठगी, ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ रैकेट का भंडाफोड़, चार आरोपी गिरफ्तार

Cyber Fraud: ब्लू डार्ट डिलीवरी के नाम पर ₹2.47 लाख की ठगी, ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ रैकेट का भंडाफोड़, चार आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की साइबर थाना (नॉर्थ-ईस्ट डिस्ट्रिक्ट) टीम ने ब्लू डार्ट कूरियर डिलीवरी के नाम पर 2.47 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले का सफल खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने जांच के दौरान एक ऐसे ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ रैकेट का पर्दाफाश किया, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने और निकालने के लिए किया जाता था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मो. अरबाज दानियाल उर्फ लब्बू, जिमी बथला, अब्दुल वदूद और अनिकेत वर्मा के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार यह मामला नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के बाबरपुर निवासी सतेंद्र, जो दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (DTL) में डिप्टी जनरल मैनेजर (DGM) के पद पर कार्यरत हैं, की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत ई-एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।

जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता को एक व्यक्ति ने फोन कर खुद को ब्लू डार्ट कूरियर कंपनी का कर्मचारी बताया। आरोपी ने कहा कि उनके नाम एक पार्सल आया है, जिसकी डिलीवरी के लिए कुछ प्रक्रिया पूरी करनी होगी। बातचीत के दौरान उसने शिकायतकर्ता को एक विशेष नंबर डायल करने और मोबाइल फोन में कॉल फॉरवर्डिंग और मैसेज फॉरवर्डिंग की सुविधा सक्रिय करने के लिए झांसे में ले लिया।

जैसे ही शिकायतकर्ता ने बताए गए निर्देशों का पालन किया, उनके मोबाइल पर आने वाले सभी कॉल और एसएमएस, जिनमें बैंकिंग OTP (वन टाइम पासवर्ड) भी शामिल थे, सीधे साइबर ठगों के नियंत्रण वाले नंबरों पर पहुंचने लगे। इसका फायदा उठाकर आरोपियों ने शिकायतकर्ता के बैंक खाते से 2.47 लाख रुपये निकाल लिए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर पुलिस ने वित्तीय लेन-देन का विस्तृत विश्लेषण, तकनीकी निगरानी और फील्ड इंटेलिजेंस के आधार पर जांच शुरू की। मनी ट्रेल की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम में से 80 हजार रुपये आरोपी मो. अरबाज दानियाल उर्फ लब्बू के नैनीताल बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे।

आगे की जांच में खुलासा हुआ कि यह बैंक खाता जानबूझकर साइबर अपराध से प्राप्त धनराशि को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस ने बैंक रिकॉर्ड, तकनीकी साक्ष्य और फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर उत्तराखंड के काशीपुर तथा उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर, लखनऊ और सुल्तानपुर में उन लोगों की पहचान की, जिनके नाम पर ऐसे बैंक खाते खोले गए थे।

11 जुलाई 2026 को पुलिस ने काशीपुर से मो. अरबाज दानियाल उर्फ लब्बू और जिमी बथला को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में मो. अरबाज ने खुलासा किया कि उसने 50 हजार रुपये के लालच में अपना बैंक खाता खुलवाकर जिमी बथला को उपलब्ध कराया था। इसके बाद जिमी ने वही खाता अपने साथी अब्दुल वदूद को 1 लाख रुपये में सौंप दिया, जिसका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर करने में किया गया।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बरामद मोबाइल फोन की जांच की, जिसमें पैसों के लेन-देन और बैंक खातों के इस्तेमाल से जुड़े कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले। इन सबूतों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया।

जिमी बथला की पुलिस रिमांड के दौरान मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने मिर्जापुर से अब्दुल वदूद और सुल्तानपुर से अनिकेत वर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि सभी आरोपी साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से ट्रांसफर कर निकालने के नेटवर्क का हिस्सा थे।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने देशभर में कितनी साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं को अंजाम दिया है। साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास भी किए जा रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर मोबाइल में कॉल फॉरवर्डिंग, मैसेज फॉरवर्डिंग या अन्य सेटिंग्स कभी भी सक्रिय न करें और बैंकिंग संबंधी किसी भी जानकारी या ओटीपी को किसी के साथ साझा न करें।

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