Delhi Crime Branch: 31 साल पुराने अपहरण-फिरौती केस में उम्रकैद का फरार दोषी गिरफ्तार, 26 साल बाद देहरादून से पकड़ा गया अमित यादव
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को 31 साल पुराने अपहरण और फिरौती के सनसनीखेज मामले में बड़ी सफलता मिली है। क्राइम ब्रांच की ARSC टीम ने उम्रकैद की सजा पाने के बाद करीब 26 वर्षों से फरार चल रहे दोषी अमित यादव को उत्तराखंड के देहरादून से गिरफ्तार किया है। आरोपी वर्ष 2000 में दिल्ली हाईकोर्ट से एक महीने की अंतरिम जमानत मिलने के बाद जेल वापस नहीं लौटा था। इसके बाद से वह अपनी पहचान और ठिकाने बदलकर फरार चल रहा था।
पुलिस के मुताबिक, अमित यादव की गिरफ्तारी पर वर्ष 2000 में पांच हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। इतने लंबे समय तक फरार रहने के दौरान उसने अपनी पहचान बदल ली और दिल्ली से दूर उत्तराखंड के देहरादून में रहना शुरू कर दिया। पुलिस का दावा है कि वहां वह निर्माण कारोबार से जुड़कर बिल्डर के रूप में काम कर रहा था।
पूरा मामला वर्ष 1995 का है। पुलिस के अनुसार, 12 सितंबर 1995 को ऋषि सेठी नाम के व्यक्ति को दिल्ली में AIIMS निदेशक के आवास के पास से अगवा कर लिया गया था। ऋषि सेठी अपनी कार के पास मौजूद थे, तभी हथियारबंद बदमाशों ने उन्हें निशाना बनाया और जबरन अपने साथ ले गए।
अपहरण के बाद आरोपियों ने ऋषि सेठी को बंधक बना लिया और उनकी रिहाई के बदले एक करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की। उस समय यह मामला दिल्ली पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। पुलिस ने अपहृत व्यक्ति को सुरक्षित बरामद करने और आरोपियों तक पहुंचने के लिए विस्तृत अभियान शुरू किया।
जांच के दौरान फिरौती की रकम देने की प्रक्रिया के तहत 10 लाख रुपये उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित होटल मयूर के कमरा नंबर 221 में रखे गए। पुलिस की टीम आरोपियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थी और रकम लेने आने वाले व्यक्ति को पकड़ने की तैयारी की गई थी।
16 सितंबर 1995 को अमित यादव फिरौती की रकम लेने होटल पहुंचा। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से फिरौती के पूरे 10 लाख रुपये बरामद किए गए। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की गई और अपहृत ऋषि सेठी के ठिकाने के बारे में जानकारी जुटाई गई।
पुलिस के मुताबिक, अमित यादव की निशानदेही पर टीम गाजियाबाद के राजनगर स्थित एक मकान तक पहुंची। वहां ऋषि सेठी को जंजीरों से बांधकर रखा गया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें सुरक्षित मुक्त कराया। इस तरह अपहरण के चार दिन बाद पीड़ित को आरोपियों के कब्जे से बचा लिया गया था।
मामले की सुनवाई के बाद वर्ष 1999 में अदालत ने अमित यादव को दोषी ठहराया। उसे उम्रकैद की सजा सुनाने के साथ 2.50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। इसके बाद वह जेल में अपनी सजा काट रहा था।
वर्ष 2000 में अमित यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया और उसे एक महीने की अंतरिम जमानत मिल गई। पुलिस के अनुसार, जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद उसे जेल वापस लौटना था, लेकिन वह वापस नहीं आया और फरार हो गया।
इसके बाद आरोपी की तलाश शुरू की गई, लेकिन वह पुलिस से बचता रहा। उसकी अपील भी बाद में खारिज कर दी गई और उसे घोषित अपराधी करार दिया गया। वर्ष 2000 में ही उसकी गिरफ्तारी पर पांच हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
पुलिस का कहना है कि करीब 26 वर्षों तक अमित यादव ने अपनी पहचान और रहने के ठिकाने बदलकर गिरफ्तारी से बचने की कोशिश की। इतने लंबे समय के कारण उसे तलाश करना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण था। पुराने रिकॉर्ड में उपलब्ध जानकारी के आधार पर क्राइम ब्रांच ने एक बार फिर उसकी तलाश शुरू की।
क्राइम ब्रांच की ARSC टीम ने दशकों पुराने दस्तावेज और पुलिस रिकॉर्ड खंगाले। आरोपी की वास्तविक पहचान सुनिश्चित करने के लिए फिंगरप्रिंट ब्यूरो की भी मदद ली गई। जांच के दौरान पुलिस को संकेत मिले कि अमित यादव उत्तराखंड के देहरादून में नई पहचान के साथ रह रहा है।
पुलिस ने उसके बारे में जानकारी जुटानी शुरू की और तकनीकी तथा स्थानीय सूचनाओं के आधार पर उसकी गतिविधियों की पुष्टि की। जांच में सामने आया कि वह देहरादून में निर्माण कारोबार से जुड़ चुका था और बिल्डर के रूप में काम कर रहा था। लंबे समय से नई जिंदगी जी रहे आरोपी की पहचान पुराने रिकॉर्ड से मिलाना इस ऑपरेशन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
13 अगस्त 2026 को पुलिस को अमित यादव के ठिकाने के बारे में विशेष सूचना मिली। इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम देहरादून पहुंची और निर्धारित स्थान पर छापेमारी की। करीब 26 साल से फरार चल रहे अमित यादव को टीम ने गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड और फिंगरप्रिंट के जरिए उसकी पहचान की पुष्टि की। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि पकड़ा गया व्यक्ति वही अमित यादव है जिसे 1995 के अपहरण और फिरौती मामले में दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी और जो अंतरिम जमानत मिलने के बाद फरार हो गया था।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अमित यादव को दिल्ली लाया गया। इसके बाद उसे तिहाड़ जेल भेज दिया गया है, जहां अब उसे अदालत द्वारा सुनाई गई सजा के अनुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा।
करीब तीन दशक पुराने मामले में हुई यह गिरफ्तारी उन मामलों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिनमें दोषी वर्षों तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहते हैं। क्राइम ब्रांच अब उसके फरारी के पूरे समय से जुड़ी जानकारी भी जुटा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा सकता है कि नई पहचान के साथ रहने के दौरान उसे किसी अन्य व्यक्ति ने गिरफ्तारी से बचने में सहायता दी थी या नहीं।



