Encroachment Problem: पूर्वी दिल्ली के नॉर्थ ईस्ट जोन में अतिक्रमण और अवैध पार्किंग बनी बड़ी समस्या, सड़कों पर जाम से लोग परेशान
नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के नॉर्थ ईस्ट जोन में लगातार बढ़ता अतिक्रमण और अवैध पार्किंग स्थानीय लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। शाहदरा से लेकर कर्दमपुरी, दयालपुर, सीलमपुर, दुर्गापुरी चौक और ज्योति नगर समेत कई इलाकों में सड़क किनारे और फुटपाथ पर अतिक्रमण के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कई जगह सड़क का बड़ा हिस्सा अतिक्रमण और अवैध रूप से खड़े वाहनों की चपेट में आने से आए दिन जाम जैसी स्थिति बन रही है।
सबसे ज्यादा परेशानी व्यस्त सड़कों और बाजारों के आसपास देखने को मिलती है। सड़क किनारे सामान रखे जाने, दुकानों का दायरा फुटपाथ तक बढ़ने और अवैध पार्किंग के कारण वाहनों के गुजरने के लिए जगह कम हो जाती है। इसका सीधा असर यातायात पर पड़ता है और पीक आवर्स के दौरान समस्या और गंभीर हो जाती है।
अतिक्रमण के कारण केवल वाहन चालकों को ही परेशानी नहीं हो रही, बल्कि पैदल राहगीरों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कई स्थानों पर फुटपाथ पर कब्जा होने की वजह से लोगों को मजबूरन सड़क पर चलना पड़ता है। इससे दुर्घटना का खतरा बढ़ने के साथ सड़क पर यातायात भी प्रभावित होता है।
कर्दमपुरी इलाके में भी अतिक्रमण और अवैध पार्किंग की समस्या लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। इस मुद्दे को लेकर कर्दमपुरी के निगम पार्षद मुकेश बंसल से बातचीत की गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली नगर निगम की ओर से अतिक्रमण के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाती है, लेकिन कार्रवाई के कुछ समय बाद कई स्थानों पर स्थिति दोबारा पहले जैसी हो जाती है।
पार्षद मुकेश बंसल के मुताबिक, एमसीडी की टीम अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई करती है और कब्जे वाले स्थानों को खाली कराया जाता है। समस्या तब पैदा होती है जब कार्रवाई समाप्त होने के बाद उन्हीं स्थानों पर दोबारा अतिक्रमण होने लगता है। ऐसे में बार-बार कार्रवाई के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाता।
उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाना एमसीडी की जिम्मेदारी है, जबकि एक बार अतिक्रमण हटाए जाने के बाद संबंधित स्थान पर दोबारा कब्जा नहीं होने देना पुलिस की जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि कई बार पुलिस की मौजूदगी के बावजूद उन स्थानों पर फिर से अतिक्रमण हो जाता है, जहां पहले एमसीडी कार्रवाई कर चुकी होती है।
निगम पार्षद ने नॉर्थ ईस्ट जोन के बड़े क्षेत्रफल और उपलब्ध संसाधनों का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक, नॉर्थ ईस्ट जोन दिल्ली के सबसे बड़े जोन में शामिल है। इतने बड़े क्षेत्र में अतिक्रमण की निगरानी करने और लगातार कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद संबंधित स्थानों की नियमित निगरानी नहीं होने पर कुछ समय बाद दोबारा कब्जा होने की शिकायतें सामने आती हैं। इससे स्थानीय लोगों को बार-बार उसी समस्या का सामना करना पड़ता है और प्रशासन की कार्रवाई का असर लंबे समय तक दिखाई नहीं देता।
शाहदरा, कर्दमपुरी, दयालपुर, सीलमपुर, दुर्गापुरी चौक और ज्योति नगर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यह समस्या ज्यादा गंभीर दिखाई देती है। इन इलाकों में पहले से ही सड़कों पर वाहनों का दबाव अधिक रहता है। ऐसे में सड़क किनारे अतिक्रमण और अवैध पार्किंग होने से उपलब्ध सड़क और संकरी हो जाती है।
कई जगह अवैध तरीके से खड़े वाहन भी यातायात व्यवस्था में बाधा बनते हैं। व्यस्त सड़कों पर गलत तरीके से पार्क किए गए वाहनों के कारण दूसरे वाहनों को निकलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती। इससे कुछ ही समय में वाहनों की लंबी कतार लगने लगती है और जाम की स्थिति पैदा हो जाती है।
पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ का खाली रहना भी बेहद जरूरी है। लेकिन अतिक्रमण होने के बाद राहगीरों को सड़क पर उतरकर चलना पड़ता है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए ऐसी स्थिति ज्यादा जोखिम भरी हो सकती है। स्थानीय स्तर पर समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से लोगों को रोजाना इसी परेशानी से गुजरना पड़ रहा है।
पार्षद मुकेश बंसल का कहना है कि एमसीडी की ओर से कार्रवाई लगातार की जा रही है, लेकिन केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकती। इसके लिए संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
उन्होंने कहा कि स्थायी समाधान के लिए एमसीडी, दिल्ली पुलिस और स्थानीय नागरिकों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी। एमसीडी अतिक्रमण हटाए, पुलिस यह सुनिश्चित करे कि खाली कराए गए स्थान पर दोबारा कब्जा न हो और स्थानीय लोग भी सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्जे को बढ़ावा न दें।
अतिक्रमण और अवैध पार्किंग का मुद्दा सीधे तौर पर यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। यदि फुटपाथ और सड़क किनारे के हिस्से अतिक्रमण मुक्त रहें तो पैदल यात्रियों को सुरक्षित रास्ता मिलने के साथ वाहनों की आवाजाही भी बेहतर हो सकती है।
कर्दमपुरी के निगम पार्षद मुकेश बंसल के मुताबिक, समस्या का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह सुनिश्चित करना है कि एक बार कार्रवाई के बाद उसी स्थान पर दोबारा अतिक्रमण न हो। इसके लिए लगातार निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी है।
फिलहाल पूर्वी दिल्ली के नॉर्थ ईस्ट जोन में अतिक्रमण और अवैध पार्किंग की समस्या स्थानीय लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब सवाल यह है कि एमसीडी और पुलिस के संयुक्त प्रयासों से क्या इन इलाकों को स्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त किया जा सकेगा या कार्रवाई के कुछ समय बाद सड़कों और फुटपाथों पर दोबारा वही स्थिति दिखाई देगी।



